चतुष्पदी

चतुष्पदी

"चतुष्पदी"वही नाव गाड़ी चढ़ी, जो करती नद पार।पानी का सब खेल है, सूख गई जलधार।किया समय से आप ने, वर्षों वर्ष करार-चढ़ते गए सवार बन, भूले क्यों करतार।।महातम मिश्र, गौतम गोरखपुरी



चतुष्पदी

"चतुष्पदी"बहुत याद आओगे तुम प्यारे गुलशन।बहारों की बगिया खुश्बुओं के मधुबन।कभी भूल मत जाना प्यारी सी चितवन।माफ करना ख़ता तुम हो न्यारे उपवन।।-1याद आएगी कल प्यारी पनघट सखी।खुश्बुओं से महकता ये गुलशन सखी।मेरी यादों के चितवन में छाएगी सखी।माफ़ करना ख़ता मन न अनबन सखी।।-2महातम मिश्र, गौतम गोरखपुरी



चतुष्पदी

"चतुष्पदी" पापकर के क्या मिला किसको मिला कुछ तो बता।एक घर इंसाफ का तुझको मिला कुछ तो बता।घूमता तू रोज सिर खैरात की टोकरी लिए।फल मिला अपराध का किनको मिला कुछ तो बता।।-1धैर्य की पहचान भारत ने बताया था तुझे।पर न सीखा जानकर तूने सिखाया था तुझे।आज गिन इत्मीनान से कब्र में कितने गए-फिर न आना भूलकर राहें द



“चतुष्पदी”सुना था कल की नीरज नहीं रहे।

सादर नमन साहित्य के महान सपूत गोपाल दास ‘नीरज’ जी को। ॐ शांति। “चतुष्पदी”सुना था कल की नीरज नहीं रहे। अजी साहित्य के धीरज नहीं रहे। गोपाल कभी छोड़ते क्या दास को- रस छंद गीत के हीरज नहीं रहे॥महातम मिश्र, गौतम गोरखपुरी





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