चवपैया

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चपैय्या छंद, हे माँ जग जननी, तुम्हरी अवनी, नाम रूप जगदंबा। शक्ति पीठ बावन, अतिशय पावन, नमन करूँ माँ अंबा।।

जय नव दुर्गा ^^ जय - जय माँ आदि शक्ति - छंद, शिल्प विधान, 10, 8, 12 मात्रा पर यति, प्रथम दो यति पर सम तुकांत, व प्रथम द्वितीय चरण का सम तुकांत....... ॐ जय माँ शारदा.......!शारदीय नवरात्रि के पावन अवसर पर माँ जगत जननी नवदुर्गा के 51 शक्तिपीठ को नमन करते हुए आप सभी को हार्दिक बधाई, ॐ जय माता दी!"चवपैय



“छंद चवपैया " (मात्रिक )जय जय शिवशंकर प्रभु अभ्यांकर नमन करूँ गौरीशा।

शिल्प विधान- कुल मात्रा =३० (१० ८ १२) १० और ८ पर अतिरिक्त तुकान्त “छंद चवपैया " (मात्रिक )जय जय शिवशंकर प्रभु अभ्यांकर नमन करूँ गौरीशा। जय जय बर्फानी बाबा दानी मंशा शिव आशीषा॥प्रतिपल चित लाऊँ तोहीं ध्याऊँ मन लागे कैलाशा। ज्योतिर्लिंग





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