चान

1


पहचान

भारत एक राष्ट्र है लेकिन सही मायनों में भारत बहुत से राष्ट्रों का संघ है. जहां भाषा से लेकर विचार, पहनावे से लेकर खानपान सब अलग है. कोई भी अपनी पहचान छोड़ एक पहचान के हक़ में नहीं है. बंगाल में बंगाली है जिन्हे नाज़ है अपनी संस्कृति पर तो पंजाबियों को



बून चान की याद में.

" लिखा नहीं कुछ वक्त से बून तेरी याद में, गम तेरे दुनियां से कूच का कुछ इस कदर रहा." बून चान मेरी चिड़िया का नाम है , जो पिछले साल 10 नवम्बर को एक हादसे में दुनियां से कूच कर गई. बून चान हर वक्त मेरे कम्प्यूटर पर बैठी रहती थी और मै



बून चान

बून चान



संस्कृत हिंदी और विज्ञान

संस्कृत, हिंदी और विज्ञान स्वामी विवेकानन्दके अनुसार – दुनियाभर के वैज्ञानिक अपने नूतन परीक्षणों से जो परिणाम प्राप्त कररहे हैं, उनमें से अधिकांशहमारे ग्रंथों मे समाहित हैं। हमारी परम्परायें विकसित विज्ञान का पर्याय हैं ।हमारे ग्रंथ मूलत: संस्कृत भाषा में लिखे गये हैं ।



पैसे की पहचान यहाँ (Paise Ki Pahachaan Yahaan )- पहचान

पेहेक की पहचान याहान गीत पेहेचन के गीत: पैस की पहचान याहान 1 9 70 बॉलीवुड फिल्म पेचन से एक सुंदर हिंदी गीत है। यह गीत शंकर और जयकिशन द्वारा रचित है। मोहम्मद रफी ने इस गीत को गाया है। इसके गीत नीरज द्वारा लिखे गए हैं।पहचान (Pehchan )पैसे की यहाँ (Paise Ki Pahachaan Yahaan ) की लिरिक्स (Lyrics Of P



पहचान (Pehchan )

'पेहेचन' 1 9 70 की हिंदी फिल्म है जिसमें मनोज कुमार, बाबाता, सेलेश कुमार, बलराज साहनी, चांद उस्मानी, तिवारी, ट्यून ट्यून और सुलोचाना प्रमुख भूमिका निभाते हैं। हमारे पास और पेहेचन के एक गीत गीत हैं। शंकर और जयकिशन ने अपना संगीत बना लिया है। मोहम्मद रफी ने इन गीतों को गाया है जबकि नीरज ने अपने गीत लिख



सनम ओ सनम (Sanam O Sanam )- पहचान

पेहचान से सनम ओ सनम गीत अभिजीत भट्टाचार्य और कविता कृष्णमूर्ति द्वारा गाए जाते हैं और समीर द्वारा लिखे गए हैं। सनम ओ सनम का संगीत आनंद और मिलिंद द्वारा रचित है।पहचान (Pehchaan )सनम ओ सनम (Sanam O Sanam ) की लिरिक्स (Lyrics Of Sanam O Sanam )सनम ओ सनम ऐसे ही प्यार करते रहनासनम ओ सनम ऐसे ही प्यार क



तू मेरे दिल में रहती है (Tu Mere Dil Mein Rehti Hai )- पहचान

Tu Mere Dil Mein Rehti Hai Lyrics from Pehchaan is sung by Abhijeet Bhattacharya and written by Sameer. Music of Tu Mere Dil Mein Rehti Hai is composed by Anand and Milind.पहचान (Pehchaan )तू मेरे दिल में रहती है (Tu Mere Dil Mein Rehti Hai ) की लिरिक्स (Lyrics Of Tu Mere Dil Mein Rehti Hai )तू म



पहचान (Pehchaan )

'पेहचान' 1 99 3 की हिंदी फिल्म है जिसमें सुनील शेट्टी, सैफ अली खान, शिल्पा शिरोडकर और मधु प्रमुख भूमिका निभाते हैं। हमारे पास 2 गाने के गीत और पेहचान के 2 वीडियो गाने हैं। आनंद और मिलिंद ने अपना संगीत बना लिया है। अभिजीत भट्टाचार्य और कविता कृष्णमूर्ति ने इन गीतों को गाया है, जबकि समीर ने अपने गीत ल



"धूमिल पहचान"

"धूमिल पहचान"बहुत सौभाग्यशाली हूँ कि जन्मभूमि का दर्शन हुआ, रामायण का सम्पूर्ण पाठ, सत्यनारायण भगवान का कथा पूजन, हवन ब्राह्मण व वंधु बान्धव भोज व मेरे जुड़वा नातिन के मूल पूजनोपरांत आज कर्म भूमि का दर्शन होगा। बहुत कुछ संजोकर गया था जिसे लुटाकर वापस तो होना ही था। मित्र-



मेरी पहचान... मेरा झंडा....

लोकतंत्र में अक्सर लोग इस भ्रम में रहते है कि, अपनी सरकार बेकार नहीं है और हाँ, इस बात को भली प्रकार से समझ भी लेना ... यहाँ पर बेकार का मतलब मलबे का ढेर (आलतू-फालतू सामान) नहीं बल्कि बेरोजगार लोगो से है या दूसरे अर्थ में कहें तो फालतू बैठे लोगो से है इसलिए इन लोगो को भ्रम होता है कि, बेचारी सरकार क



पहचान : उपन्यास अंश

यहकोतमा और उस जैसे नगर-कस्बों में यह प्रथा जाने कब से चली आ रही है कि जैसे ही किसी लड़के के पर उगे नहीं कि वह नगर के गली-कूचों को ‘टा-टा’ कहके ‘परदेस’ उड़ जाता है।कहते हैं कि ‘परदेस’ मे सैकड़ों ऐसे ठिकाने हैं जहां नौजवानों की बेहद ज़रूरत है। जहां हिन्दुस्तान के सभी प्रान्त के युवक काम की तलाश में आते है



मित्र कैसे होते है

मित्र हमारे इतने अच्छे होते है की समय के साथ अपना रुख बदल लेते है अक़सर आप सभी ने देखा होगा की जब हमारे पास पैसे , ज्ञान और पहचान की बात आती है तो मित्र हमारे साथ रहते है यही जब हम उन्हें देते है तो कुछ दिनों बाद हमें भूल जाते है और यदि हम उनके सामने होते है तो भी पहच



अनजानी सी ...

कुछ खोई खोई अपने सपनों मेंअपनी मुश्कान मेंअपने ही ख्यालों में अनजानी सी ....आवाज में वह नमी हैऔर पहचान भर बातेंदूर से छूती है दिल कोऔर लहराते बालो कोसँभालते गुजर जाती है अपनी एक अंजान पहचान छोड़करकोई नाम नहींकोई अनाम भी नहींकुछ सुहाने लम्हों को छोड़जाती है वह .....



ग़ज़ल (जिंदगी का ये सफ़र ) - Sahityapedia

ग़ज़ल (जिंदगी का ये सफ़र )कल तलक लगता था हमको शहर ये जाना हुआइक शक्श अब दीखता नहीं तो शहर ये बीरान हैबीती उम्र कुछ इस तरह की खुद से हम न मिल सकेजिंदगी का ये सफ़र क्यों इस कदर अनजान हैगर कहोगें दिन को दिन तो लोग जानेगें गुनाहअब आज के इस दौर में दीखते नहीं इन्सान हैइक दर्द का





1
आसान हिन्दी  [?]
तीव्र हिंदी  [?]
ऑनस्क्रीन कीबोर्ड  [?]
हिन्दी टाइपिंग  [?]
डिफ़ॉल्ट कीबोर्ड  [?]

(फोन के लिए विकल्प)
X
1 2 3 र्4 ज्ञ5 त्र6 क्ष7 श्र8 (9 )0 --   =
q w e r t y u i o p [   ]
a s d िfि g h  j k l ; '  \
  z x c  v  b n m ,, .. ?/ एंटर
शिफ्ट                                                         शिफ्ट बैकस्पेस
x