दिल की दीवारें

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ऐ मेरे दिल की दीवारों

ऐ मेरे दिल की दीवारों, रूप अनूप तुम्हारा करूँ!मेरे रूप की धूप अनेकों, कौन सा रूप तुम्हारा करूँ?क्या श्वेत करूँ, करे शीतल मनवा, उथल पुथल चितचोर बड़ा है,करूँ चाँदनी रजत लेपकर, पूनम का जैसे चाँद खड़ा है।करूँ पीताम्बर नील नगर में, जैसे चढ़ता





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