निदाफ़ाज़ली

निदा फ़ाज़ली -दिल में ना हो ज़ुर्रत तो मोहब्बत नहीं मिलती In Hindi

Hindi poem -Nida Fazliदिल में ना हो ज़ुर्रत तो मोहब्बत नहीं मिलतीदिल में ना हो ज़ुर्रत तो मोहब्बत नहीं मिलतीख़ैरात में इतनी बड़ी दौलत नहीं मिलतीकुछ लोग यूँ ही शहर में हमसे भी ख़फा हैंहर एक से अपनी भी तबीयत नहीं मिलतीदेखा था जिसे मैंने कोई और था शायदवो कौन है जिससे तेरी सूरत नहीं मिलतीहँसते हुए चेहरो



निदा फ़ाज़ली -नयी-नयी आँखें In Hindi

Hindi poem -Nida Fazliनयी-नयी आँखें नयी-नयी आँखें हों तो हर मंज़र अच्छा लगता हैकुछ दिन शहर में घूमे लेकिन, अब घर अच्छा लगता है ।मिलने-जुलनेवालों में तो सारे अपने जैसे हैंजिससे अब तक मिले नहीं वो अक्सर अच्छा लगता है ।मेरे आँगन में आये या तेरे सर पर चोट लगेसन्नाटों में बोलनेवाला पत्थर अच्छा लगता है ।च



निदा फ़ाज़ली -कभी बादल, कभी कश्ती, कभी गर्दाब लगे In Hindi

Hindi poem -Nida Fazliकभी बादल, कभी कश्ती, कभी गर्दाब लगेकभी बादल, कभी कश्ती, कभी गर्दाब लगेवो बदन जब भी सजे कोई नया ख्वाब लगेएक चुप चाप सी लड़की, न कहानी न ग़ज़लयाद जो आये





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