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कैसे रुके वायु प्रदूषण :--- आचार्य अर्जुन तिवारी

*पंचतत्त्वों से बने मनुष्य को इस धरा धाम पर जीवन जीने के लिए मनुष्य को पंचतत्वों की आवश्यकता होती है | रहने के लिए धरती , ताप के लिए अग्नि , पीने के लिए पानी , सर ढकने के लिए आसमान , एवं जीवित रहने के लिए वायु की आवश्यकता होती है | मनुष्य प्रत्येक श्वांस में वायु ग्रहण करता है | श्वांस लेने के लिए



पर्यावरण संरक्षण गौ वंश का सही प्रोयग

मृत्यु अंतिम सत्य तो अन्त्येष्टि जीवन का आखिरी संस्कार है। इसके लिए लकड़ी की चिता पर अंतिम संस्कार की मान्यता अब पर्यावरण के लिए नुकसानदेह साबित होने लगी है और हजारों की संख्या में पेड़ कटने से जीवन के लिए खतरा दिन-ओ-दिन बढ़ता जा रहा है। हालांकि विद्युत शव दाह गृह का विकल्प दिया गया लेकिन यह विकल्प



क्या-क्या नहीं करता है पेड़ दिनभर...

दिनकर की धूप पाकर भोजन बनाता है पेड़ दिनभर,लक्ष्यहीन अतरंगित असम्पृक्त को भटकन से उबारता है पेड़ दिनभर। चतुर्दिक फैली ज़हरीली हवा निगलता है पेड़ दिनभर, मुफ़्त मयस्सर प्राणवायु उगलता है पेड़ दिनभर। नीले शून्य में बादलों को दिलभर रिझाता है पेड़ दिनभर, आते-जाते थके-हारे परि



पेड़-पौधे प्रकृति की आत्मा और प्राकृतिक सुंदरता के घर होते हैं

हमारा घर चार मंजिला इमारत के भूतल पर स्थित है। प्रायः भूतल पर स्थित सरकारी मकानों की स्थिति ऊपरी मंजिलों में रहने वालों के जब-तब घर भर का कूड़ा-करकट फेंकते रहने की आदत के चलते किसी कूड़ेदान से कम नहीं रहती है, फिर भी एक अच्छी बात यह रहती है कि यहां थोड़ी-बहुत मेहनत मशक्कत कर पेड़-पौधे लगाने के लिए जगह न



होम कपोस्टिंग

प्रत्येक गृहस्थी में रोज सब्जियों व फलों के छिलके फेंके जाते हैं जोकचरे के साथ पर्यावरण में गन्दगी फैलाते हैं; गैस पैदा करते हैं और सड़ कर नष्ट होजाते है. थोड़े से ही ध्यान और कष्ट से इन छिलकों को घर में ही compost में बदलसकते हैं. यह कम्पोट आपके घरेलु बाग़ में ही काम आ



पर्यावरण अधिकारी

प्रकृति की, स्तब्धकारी ख़ामोशी की, गहन व्याख्या करते-करते, पुरखा-पुरखिन भी निढाल हो गये, सागर, नदियाँ, झरने, पर्वत-पहाड़, पोखर-ताल, जीवधारी, हरियाली, झाड़-झँखाड़,क्या मानव के मातहत निहाल हो गये?नहीं!... कदापि नहीं!!औद्योगिक क्राँति, पूँजी का ध्रुवीकरण, बेचारा सहमा सकुचाया मा



विश्व पर्यावरण दिवस

विश्व पर्यावरण दिवसमनुष्य ही नहीं समस्तप्राणीमात्र – सृष्टि के समस्त जीव - इस स्वयंभू शाश्वत और विहंगम प्रकृति का अंगहै | इसी से समस्त जीवों की उत्पत्ति हुई है | प्रकृति के विकास के साथ ही हम सबकाभी विकास होता है यानी विकास यात्रा में हम प्रकृति के सहचर हैं – सहगामी हैं |प्रदूषित पर्यावरण के द्वारा



पेड़ हैं तो जीवन है है

अंतरराष्ट्रीय वन दिवस शिक्षा पर केंद्रित है। वनों को आंदोलन के रूप में खड़ा करने के लिए शिक्षा के रास्ते तलाशने होंगे। इस शिक्षा की जरूरत हर स्तर पर है, जो घर-गांवों से लेकर शहरों से जुड़नी चाहिए, क्योंकि वनों के प्रति हमारी बेरुखी ने इन्हें हमसे दूर कर दिया है। फैशन के तौर हर पर्व से लेकर उद्घाटनों त



'दादी' के आते ही घर-आंगन से रूठा वसंत लौट आया ...

हम चार मंजिला बिल्डिंग के सबसे निचले वाले माले में रहते हैं। यूँ तो सरकारी मकानों में सबसे निचले वाले घर की स्थिति ऊपरी मंजिलों में रहने वाले लागों के जब-तब घर-भर का कूड़ा-करकट फेंकते रहने की आदत के चलते कूड़ेदान सी बनी रहती है, फिर भी यहाँ एक सुकून वाली बात जरूर है कि बागवानी के लिए पर्याप्त जगह न



प्रकृति और हम ( बच्चों केलिए )

कविता को हमेशा इंसान को जीना चाहिए और उनसे कुछ ना कुछ सीखना चाहिए। यहां पर मैंने जो कविता लिखी है वो उनके लिए है जो दिल और दिमाग से पूरे बच्चे हैं।, जिन्होंने स्वयं के अंदर स्वयं का बचपन जीवित रखा है। अपने आपको इन कविता से जोड़कर देखिए



हमारे त्यौहार और हमारी मानसिकता

रहम करे अपनी प्रकृति और अपने बच्चो पर , आप से बिनम्र निवेदन है ना मनाया ऐसी दिवाली गैस चैंबर बन चुकी दिल्ली को क्या कोई सरकार ,कानून या धर्म बताएगा कि " हमे पटाखे जलाने चाहिए या नहीं?" क्या हमारी बुद्धि और विवेक बिलकु



“विश्व पर्यटन दिवस‌” (27 सितम्बर)

आजकल के समय में हर व्यक्ति किसी नाकिसी परेशानी से घिरा हुआ है, पैसे और चकाचौंध के बीच ऐसा लगता है मानोखुशी तो कहीं गुम हो गई है । इन सबके बावजूद हर व्यक्ति को अपने जीवन में कुछ समयऐसा जरूर निकालना चाहिए जिससे वो दूसरे देश या जगह का पर्यटन करे और खुशियों को फिर से गले



अमृतसर के Golden Temple के रसोई घर में लगाया जाएगा बायोगैस प्लांट, रोज बनता है 1 लाख लोगों का खाना

शिरोमणि गुरूद्वारा प्रबंधक समिति (एसजीपीसी) ने यहां स्वर्ण मंदिर की सामुदायिक रसोई में कार्बन उत्सर्जन कम करने के लिए बायोगैस संयंत्र लगाने का फैसला किया है. स्वर्ण मंदिर के रोजाना मामलों से निपटने वाली संस्था एसजीपीसी ने आज कहा कि इस धार्मिक स्थल को पर्यावरण अनुकूल बनाने



सावित्रीबाई फुले पुणे विश्वविद्यालय ने पर्यावरण विज्ञान में स्नातक डिग्री कोर्स शुरू किया

सावित्रीबाई फुले पुणे विश्वविद्यालय (एसपीपीयू), मेलबर्न विश्वविद्यालय (यूओएम) और भारतीय विज्ञान संस्थान और अनुसंधान संस्थान (आईआईएसईआर) के सहयोग से अकादमिक वर्ष 2018- 2019 के लिए बीएससी में र्यावरण विज्ञान पाठ्यक्रम शुरू करने जा रहे है



शादी से पहले लड़की ने रखी ऐसी शर्त, सुनकर सन्न रह गए ससुरालवाले |

मध्य प्रदेश की प्रियंका भदोरिया ने शादी से पहले ससुराल वालों के सामने एक ऐसी डिमांड रख दी जिसे सुनकर सबके कान खड़े हो गए.प्रियंका ने अपने ससुराल वालों से साफ कह दिया कि जब तक वे 10 हजार पौधे नहीं लगाएंगे, वो शादी नहीं करेंगी. ससुराल वालों को ये सुनना थोड़ा अजीब जरूर लगा ल



World Environment Day विश्व पर्यावरण दिवस जागरूकता Vedic Astrologer

World Environment Dayविश्व पर्यावरण दिवस आज “विश्व पर्यावरण दिवस” मनाया जा रहा है और सुबह से ही पर्यावरण की सुरक्षा तथा वृक्षारोपण के सम्बन्ध में Forwarded Messages विभिन्न सोशल नेटवर्किंग साईट्स पर घूम रहे हैं | पर्यावरण की रक्षा के लिए कई



‘विश्व पर्यावरण दिवस’ ( World Environment Day) 5 जून

हर साल 5 जून को ’विश्व पर्यावरण दिवस’ ( World Environment Day) मनाया जाता है । यह दिन पर्यावरण के ज्वलंत मुद्दों के बारे में आम लोगों को जागरूक करने और इस दिशा में उचित कदम उठाने के लिए प्रोत्साहित करने के लिए संयुक्त राष्ट्र (United Nations) का प्रमुख साधन है ।इतिहास



प्रकृति एक भविष्य

प्रकृति एक भविष्य आशमाँ की छोर में, फैले जैसे आंधी,तूफान मचती जाये, जैसे दीप को बुझाती, पल दो पल में हो रही है ,काफी बर्बादी ,चारो ओर अँधेरा घोर ,फैला ये आबादी,ये मानवो की देन है ,और मानवो का अंत ,भविष्य की तू चिंता कर, क्या लेगा कोई



अंतर्राष्ट्रीय पृथ्वी दिवस (22 अप्रेल)

‘ पृथ्वी दिवस '>अंतर्राष्ट्रीय पृथ्वी दिवस (22 अप्रेल)’ का जन्म एक एनवायरमेंटल टीच-इन (Teach-in) के रूप में हुआ था । इसका मुख्य कारण 1969 सांता बारबरा तेल रिसाव (1969 Santa Barbara oil spill) की रोंगटे खड़े कर देने वाली त्रासदी रही है । टीच-इन में जनहित के ज्वलंत



दहशत ही जीने का पर्याय है

किसे धिक्कार रहे ?क्या यह पहला हादसा है ?गन्दी-विकृत फिल्मों को कौन बढ़ावा देता है ?कभी सोचा है इसे बनाना और देखना एक विकृति है विकृति के सिवा कुछ भी नहीं … जब बादल जमा होते हैं तो बारिश होती है जब दर्द जमा होता है तो आँसू और जब विकृति जमा होती है तो हादसे !गौर से देखिये ये सारे मानसिक रोगी हमारे आस-



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