बिंदकी

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दोआब का पागल

दोआब का पागलमै पागल हूँ दोआब का, कभी इधर गिरा, कभी उधर गिरा।एक तरफ भृगु मुनि का घाट, दूसरी तरफ मौरंग के घाट।एक तरफ मानव की भीड़, दूसरी तरफ ट्रको भीड़।मै हूँ पागल दोआब का।एक तरफ पार हुआ सटासट, दूजी तरफ पीपा पुल यमुना में डोल रहा।एक तरफ कर स्नान पुजारी, पूजा मन्दिर में करता है।दूसरी तरफ हो सवार नाव में





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