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"पद" भैया चंद्रयान ले आओ

"पद"भैया चंद्रयान ले आओमैं हूँ चंद्रमा घटता बढ़ता, आकर के मिल जाओउड़नखटोला ज्ञान भारती, ला झंडा फहराओइंतजार है बहुत दिनों से, इसरो दरस दिखाओलेकर आना सीवन साथी, आ परचम लहराओराह तुम्हारी देख रहीं हूँ, मम आँगन इतराओस्वागत करती हूँ भारत का, ऋषिवत ज्ञान खिलाओबड़े जतन से राखूंगी मैं, अपनी चाल बढ़ाओकहती रहती द



दुःख

वर्ष भले ही बीत गया, एकस्मरण उस दिवस का, लेष मात्र भी कम ना हुआ, विषैली यादें, उस कड़वे दिन कीहैं आज भी जीवित मन मश्तिष्क पर, सजल हैं नेत्र, व्यथित हृदय है आजभी। हृदय व मन में, भावनाओं का वेग है, परअभिव्यक्ति के लिए शब्दों का अभाव है। किस से, एवं किस प्रकार, बताएँइसी उहापोह में, दुख के इस सागर



@झिनकू भैया के प्रपंची आँसू"

"झिनकू भैया के प्रपंची आँसू" एक आँख से विनाशक बाढ़ व दूसरी आँख से फसलों को सुखाने वाला हृदय विदारक सूखा देखकर झिनकू भैया की आँखे पसीजने लगी जो चौतरफा दृश्य परिवर्तन के तांडव को देखकर छल-छल बहने की आदी तो हो ही गई है, अब तो उसे जीना और पीना भी है। बड़े ही भावुक और चिंतनशील आदमी हैं झिनकू भैया, जब धारा



लोकसभा सदस्य राजवीर सिंह (राजू भैया) का जीवनपरिचय

राजवीर सिंह भारतीय जनता पार्टी के सदस्य हैं और एटा (लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र) से भारतीय आम चुनाव, 2014 जीत चुके हैं।राजवीर सिंह का जन्म 15 मार्च, 1959 को श्री कल्याण सिंह और श्रीमती रामवती देवी के यहाँ हुआ था। उनका जन्म माधौली नामक गाँव में हुआ था, जो उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ जिले में स्थित है।सिंह की



मिश्र , श्री भैरों प्रसाद - लोकसभा सदस्य

निर्वाचन क्षेत्र -बांदा (उत्तर प्रदेश)दल का नाम -भारतीय जनता पार्टी ( भा.ज.पा.)ईमेल -bhairon[DOT]prasad[AT]sansad[DOT]nic[DOT]inजन्म की तारीख -07/09/1958उच्चतम योग्यता -वरिष्‍ठ माध्‍यमिकशैक्षिक और व्यावसायिक योग्यता -इंटरमीडिएट चित्रकूट इन्‍टर कॉलेज, कुरबी और जमुना क्रिसचन कॉलेज इलाहाबाद,



तुम्हारा जाना

चले गए हो तुम यूँ अचानक और ले गए हो साथ अपने सारी खुशियाँ सारा उत्साह और जीने की चाह | सब कुछ | जिंदगी चल तो रही है तुम बिन पर क्या सच में जिन्दा हैं हम पापा खामोश हैं और मम्मी भी चुप हैं होंठ तो फिर भी बोल पड़ते हैं पर आँ



"झिनकू भैया का झुनझुना” (घुनघुना)

"झिनकू भैया का झुनझुना” (घुनघुना) झिनकू भैया को बचपन से ही झुनझुना बहुत पसंद था, जो आज भी किसी न किसी रूप में बज ही उठता है। कभी महँगाई की धुन पर झनझना जाता है तो कभी भ्रष्टाचार, आतंकवाद, बेरोजगारी, भूखमरी, बलात्कार इत्यादि पर आफरीन हो जाता है झिनकू भैया का घुनघुना। बजा



"देशज गीत, मोरे ननदी के भैया

"देशज गीत" जेठ दुपहरिया छँहाइ ल, मोरे ननदी के भैया...... ननदी के भैया मोरे ननदी के भैया......जेठ दुपहरिया मनाई ल,.....मोरे ननदी के भैया.... ननदी के भैया मोरे सासू के छैया जेठ जेठानी के नटखट बलैया पसिजल पसीना सुखाइ ल,........ मोरे ननदी के भैया........1 दूर हुए मोसे मा



"घंटी बजा दी, झिनकू भैया ने"

"घंटी बजा दी, झिनकू भैया ने" आज सुबह- सुबह मेरे प्रिय झिनकू भैया का गाँव से फ़ोन आया, स्क्रीन पर उनका नाम उभरा और मेरी बांछे खिल गई। बड़े उत्सुकता से बटन दबाया' पर हाय रे चश्में का नंबर और बिना चश्में की आँख, गलत जगह टच हो गया और फोन की घंटी नौजौवना की तरह गुस्सा होकर झनझन





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