वन्दन

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वाणी वन्दन

माँ वर देसरस्वत्यै नमो नित्यं भद्रंकाल्यै नमो नमः वेदवेदान्तवेदांगविद्यास्थानेभ्यः एव च |सरस्वती महाभागे विद्ये कमललोचने विद्यारूपे विशालाक्षि विद्यां देहि नमोSस्तु ते ||माँ सरस्वती विद्या की – ज्ञान और विज्ञान की –समस्त कलाओं की अधिष्ठात्री देवी हैं | और जब व्यक्ति को ज्ञान प्राप्त होता है तब वहअज्



शारदे वन्दना

*सादर समीक्षार्थ*पंचामर छन्द121 212 12, 121 212 12सुमातु ज्ञान दीजिये, दयालु देवि शारदे।मिटाय अंधकार को, प्रकाश को उबार दे।जला सुदीप ज्ञान का, सुकंठ हँसवाहिनी।स्वभाव में मधुर्यता, रहे सदा सुवासिनी।सुमार्ग पे चलूँ सदा, विहंग सी उड़ान दो।सुसभ्यता सदा रहे, हमें नवीन ज्ञान दो।पुनीत भाव दो हमें, दयालु देव



गुरूपूर्णिमा विशेष

*श्रीमते रामानुजाय नमः**श्री यतिराजाय नमः*💐💐💐💐💐💐💐💐 *गुरुपूर्णिमा विशेष*--- *द्वितीय भाग*🛕🛕🛕🛕🛕🛕🛕🛕🛕 गुरुदेव की असीम कृपा उनकी दया प्रेम वात्सल्य उसी के फलस्वरूप हमें परम आराध्य श्री लक्ष्मीनारायण जी के चरणों का आश्रय मिलता है और परमात्मा से मिलाने का पावन कार्य सिर्फ और सिर्फ श्



माँ भारती की आरती

माँ भारती की आरती, हम यूँ सदा गाते रहे।चरणों में अपनी माँ के, हम शीश झुकाते रहे।।है मन में इक आस, कि बढ़ता रहे विश्वासप्रेम की धारा दिलों में, हम सदा बहाते रहे।माँ भारती की आरती, हम यूँ सदा गाते रहे।।खेतों में हो हरियाली, चहुँओर हो खुशहाली फूल खुशियों के हम, सदा ही उगाते रहे।माँ भारती की आरती, हम यूँ



गुरु वन्दना

स्वीकार करो गुरु मम् प्रणाम, मैं शरण आपकी आपकी आया हूँ ।मैं तर जाऊँ भव सागर से, वह युक्ति जानने आया हूँ ।बिन गुरु ज्ञान नहीं जग में, यह वेद पुराण सभी कहते ।गुरु की महिमा के सन्मुख, ईश्वर भी स्वयं झुके रहते ।ज्ञान मिले किस विधि से प्रभु, वह युक्ति जानने आया हूँ । स्वीकार करो गुरु मम् प्रण



माँ सरस्वती वन्दना

वीणा-वादिनी विद्या-वर दो,वीणा-वादिनी विद्या-वर दो, तिमिर ह्रदय का दूर करो माँ; जीवन-पथ तुम जगमग कर दो, वीणा-वादिनी विद्या-वर दो.......... तेरे उपवन की हम कलियाँ फूल बनाकर हमको खिला दो, हम हैं नन्हें-नन्हें दीपक ज्ञान ज्योति माँ इनमें जगा दो, तिमिर ह्रदय का दूर करो माँ, जीवन-पथ तुम जगमग कर दो वीणा-वा



गुरु वन्दना

स्वीकार करो गुरु मम् प्रणाम, मैं शरण आपकी आपकी आया हूँ ।मैं तर जाऊँ भव सागर से, वह युक्ति जानने आया हूँ ।बिन गुरु ज्ञान नहीं जग में, यह वेद पुराण सभी कहते ।गुरु की महिमा के सन्मुख, ईश्वर भी स्वयं झुके रहते ।ज्ञान मिले किस विधि से प्रभु, वह युक्ति जानने आया हूँ । स्वीकार करो गुरु मम् प्रण





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