सफाइसैनिक

1


सफाई कर्मचारियों के हक और अधिकारों की दास्तां को बयां करती हुई नरेंद्र वाल्मीकि की कविता 'आखिर कब तक'

आखिर कब तकआखिर कब तककरते रहोगे अमानवीय कामढोते रहोगे मलमूत्रमरते रहोगे सीवरों मेंनिकालते रहोगे गंदी नालियाँढोते रहोगे लाशेंआखिर कब तकसहोगे ये जुल्मकब तक रहोगेखामोश ?सुनो सफाईकर्मियों !अब बजा दोबिगुलइन गंद



युवा कवि नरेन्द्र वाल्मीकि की समाज को प्रेरित करने वाली कविता "उजाले की ओर"

उजाले की ओर हमारे पूर्वजहमारा अभिमान है,हमारे पूर्वज इसदेश की मूल संतान हैं,हमारे पूर्वज कभीशासक हुआ करते थेइस देश के।हमारे पूर्वजों कोगुलाम बनाकरकराये गये घृणित कार्यअब समय आ गया हैइन कार्यों को छोड़ने काअपने पूर्वजों के गौरव कोआगे बढ़ान





1
आसान हिन्दी  [?]
तीव्र हिंदी  [?]
ऑनस्क्रीन कीबोर्ड  [?]
हिन्दी टाइपिंग  [?]
डिफ़ॉल्ट कीबोर्ड  [?]

(फोन के लिए विकल्प)
X
1 2 3 र्4 ज्ञ5 त्र6 क्ष7 श्र8 (9 )0 --   =
q w e r t y u i o p [   ]
a s d िfि g h  j k l ; '  \
  z x c  v  b n m ,, .. ?/ एंटर
शिफ्ट                                                         शिफ्ट बैकस्पेस
x