समाजिकता

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एक वृक्ष सौ पुत्र समान :--- आचार्य अर्जुन तिवारी

*आदिकाल से ही मनुष्य एवं प्रकृति का अटूट सम्बन्ध रहा है | सृष्टि के प्रारम्भ से ही मनुष्य प्रकृति की गोद में फलता - फूलती रहा है | प्रकृति ईश्वर की शक्ति का क्षेत्र है | इस धरती का आभूषण कही जाने वाली प्रकृति की महत्ता समझते हुए हमारे महापुरुषों ने इसके संरक्षण के लिए सनातन धर्म के लगभग सभी ग्रंथों



होलिकादहन :--- आचार्य अर्जुन तिवारी

*भारतीय संस्कृति में समय-समय पर त्यौहार एवं पर्वों का आगमन होता रहता है | यह त्यौहार भारतीय संस्कृति की दिव्यता तो दर्शाते ही हैं साथ ही सामाजिकता एवं वैज्ञानिकता को भी अपने आप में समेटे हुए हैं | विभिन्न त्यौहारों में होली का अपना एक अलग एवं महत्त्वपूर्ण स्थान है | होली मनाने के एक दिन पूर्व "होलि



आस्तिक व नास्तिक :--- आचार्य अर्जुन तिवारी

*सृष्टि के आदिकाल से इस धरा धाम पर मानव जाति दो खंडों में विभाजित मिलती है | पहला खंड है आस्तिक जो ईश्वर को मानता है और दूसरे खंड को नास्तिक कहा जाता है जो परमसत्ता को मानने से इंकार कर देता है | नास्तिक कौन है ? किसे नास्तिक कहा जा सकता है ? यह प्रश्न बहुत ही जटिल है | क्योंकि आज तक वास्तविक नास्त





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