समुंदर

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पुरुष समुंदर है,स्त्री समर्पण..

पुरुष का प्रेम समुंदर सा होता है..गहरा, अथाह..पर वेगपूर्ण लहर के समान उतावला। हर बार तट तक आता है, स्त्री को खींचने, स्त्री शांत है मंथन करती है, पहले ख़ुद को बचाती है इस प्रेम के वेग से.. झट से साथ मे नहीं बहती। पर जब देखती है लहर को उसी वेग से बार बार आते तो समर्पित हो जाती है समुंदर में गहराई तक,



लघुकथा ...........स्विच आफ

किसी के प्रति आकर्षण कभी भी सम्मोहन में बदल सकता है ।रुचियां हमेशा हमसफर ढूँढ़ती रहती हैं । प्यार वो समुंदर है जिसमें हर उम्र समा जाती है ।प्यार शक्ति है तो कमजोरी भी यही बनता है ।______________________________________________________लघुकथास्विच आफ " इतने दिन से कहां थीं ? "" होना कहां है ,घर पर ही





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