सिंहावलोकनी

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शरद ऋतु

🌹सिंहावलोकनी दोहा मुक्तक🌹"""""""""""""""""""""""शरद ऋतु करे आगमन, मन होए उल्लास ।जूही की खुशबू उड़े, पिया मिलन की आस।।आस किसी की मैं करूँ , जो ना आएं पास ।नित देखू राह उसकी, जाता अब विश्वास ।।🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹व्यंजना आनंद ✍



"सिंहावलोकनी दोहा"

विधान- 13-11 की यति, चौपाई की अर्धाली व दोहा का सम चरण, सम चरण का अंतिम शब्द विषम चरण का पहला शब्द हो, यही इस दोहा की विशेषता है"सिंहावलोकनी दोहा" परम मित्र नाराज है, कहो न मेरा दोष।दोष दाग अच्छे नही, मन में भरते रोष।।-1रोष विनाशक चीज है, भरे कलेश विशेष।विशेष मित्र





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