है|

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शिव सूत्र

महेश्वर सूत्र माहेश्वर सूत्रों की उत्पत्ति भगवान नटराज (शिव) के द्वारा किये गये ताण्डव नृत्य से मानी गयी है|नृत्तावसाने नटराजराजो ननाद ढक्कां नवपञ्चवारम्|उद्धर्त्तुकामो सनकादिसिद्धादिनेतद्विमर्शे शिवसूत्रजालम्||अर्थात:- नृत्य (ताण्डव) के अवसान (समाप्ति) पर नटराज (शिव) ने सनकादि ऋषियों की सिद्धि और क



एक सपना

जिंदगी तू बता दे, ये सपने तो है पर रास्ता कहाजब गले मौत के लगने ही है , तो दर्द से मुलाकात न करा जख्म तो बहुत है पर , मरहम लागू कौन सा ये लहू की लाली को भी मिट जाना, फिर क्यों सुरमे से है, सजना सवारना इस मुकद्दर ने भी



गणपति बप्पा मोरया

गणपति बप्पा मोरया डॉ शोभा भारद्वाज श्रीगणेश की पौराणिक जन्म कथा के अनुसार पार्वती जी स्नान करने जा रहीं थीं उन्होंने अपने बदन से उतरे उबटन से गणेश जी कीमूर्ति बनाई उनकी प्राण प्रतिष्ठा कर उन्हें आदेश दिया जब तक वह स्नान कर रहीं है किसीको अंदर आने न दिया जाये| समय से पूर्व शिव जी



सब अपना अपना कहते हैं

सब अपना अपना कहते हैं ,कहते हैं गैरों में क्या रखा है|जब दिल से दिल मिलते नहीं,फिर पैरों में क्या रखा है||





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