“छंद

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“छंद मुक्त काव्य“ (मैं इक किसान हूँ)

“छंद मुक्त काव्य“(मैं इक किसान हूँ) किस बिना पै कह दूँकि मैं इक किसान हूँजोतता हूँ खेत, पलीत करता हूँ मिट्टी छिड़कता हूँ जहरीलेरसायन घास पर जीव-जंतुओं का जीनाहराम करता हूँ गाय का दूध पीताहूँ गोबर से परहेज है गैस को जलाता हूँपर ईधन बचाता हूँ अन्न उपजाता हूँगीत नया गाता हूँ आत्महत्या के लिएहैवान बन जा



“छंद, वाचिक प्रमाणिका” लगा उड़ा लगा उठा पहाड़ का धुआँ उठा

छन्द- वाचिकप्रमाणिका (मापनीयुक्त मात्रिक) वर्णिक मापनी - 12 12 12 12 अथवा - लगा लगा लगालगा, पारंपरिक सूत्र - जभान राजभा लगा (अर्थात जर ल गा) विशेष : प्रमाणिका 'मापनीयुक्त वर्णिक छंद' है,जिसमें वर्णों की संख्यानिश्चित होती है अर्थात किसी गुरु 2 के स्थान पर दो लघु 11 प्रयोग करने की छूटनहीं होती है। ऐस



“छंद चवपैया " (मात्रिक )जय जय शिवशंकर प्रभु अभ्यांकर नमन करूँ गौरीशा।

शिल्प विधान- कुल मात्रा =३० (१० ८ १२) १० और ८ पर अतिरिक्त तुकान्त “छंद चवपैया " (मात्रिक )जय जय शिवशंकर प्रभु अभ्यांकर नमन करूँ गौरीशा। जय जय बर्फानी बाबा दानी मंशा शिव आशीषा॥प्रतिपल चित लाऊँ तोहीं ध्याऊँ मन लागे कैलाशा। ज्योतिर्लिंग





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