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इस समय बहुजन (दलित) शोधार्थियों को तटस्थ होकर शोध करने आवश्यकता है ?

शोध करना साहित्य, समाज अथवा उन सभी के लिए के लिए जरूरी है जो कुछ नया दिखना चाहते हैं, अपने इतिहास से प्रेरणा लेते हैं । आज हमारे सामने जितनी भी पुस्तके या रिपोर्ट या ऐसी सामग्री जिससे समाज के सभी वर्गों की वास्तविकता का पता चलता है वह सभी शोध से ही संभव हो पाया है ।



छंद – तमाल” (सम मात्रिक )

शिल्प विधान --चौपाई गुरु लघु (१६ ३=१९) अंत में यतिछंद – तमाल” (सम मात्रिक )गोकुल गलियाँ मोहन खेलें रास। बंसी बाजे मधुवन कोकिल वास॥ दूर नगर बरसाना राधे गाँव।कुंज गली में तुलसी श्यामा छाँव॥-१नाचें गाएं झूमत ग्वाला बाल। दधि-मुख लेपन फोरत हाँडी लाल॥ सखियाँ गागर लेके निकली रा



पचपन का यौवन (हास्य)

पचपन का यौवन दाढ़ी जब से सफ़ेद है मेरी , हुस्नवालों ने आँख है फेरी ....कैसे बतलाऊं इनको, कैसा हूँ ,यारों ! मैं नारियल के जैसा हूँ ...हाथ में ले के मुझको तोड़ो तो !मेरे अन्दर गिरी को फोड़ो तो !कितना समझाया इन हसीनों को ,ठीक करता हूँ मैं मशीनों को ....एक बोइंग सा हाल है मेरा , दिल अभी भी कमाल है मेरा .



अपरिमेय राशि (π) “पाई-दिवस”, [14 मार्च]

सर्चइंजन दिग्गज गूगल नेबुधवार को अपने होम पेज पर एक रंग-बिरंगा डूडल बनाया है । इस गूगल डूडल को “पाईडे” की 30वीं ऐनिवर्सरी कोसेलिब्रेट करने के लिए बनाया है । गूगल ने अपने डूडल में पेस्ट्री, बटर, सेब और संतरे के छिलकों का इस्तेमाल किया है ।



मानव ( मात्रिक छंद ) रे माँ तेरे चरणों में सगरो तीरथ सुरधामा

"मानव " ( मात्रिक छंद ) रे माँ तेरे चरणों में सगरो तीरथ सुरधामा करुणाकारी आँचल में मोहक ममता अभिरामा॥ सुख की सरिता लहराती तेरे नैनों की धारादुख के बादल दूर रहें पानी चाहे हो खारा॥ पीकर उसको जी लेता तेरा लाल निराला है अमृत बूंदे मिल जाती सम्यक स्वाद निवाला है॥ खाकर म



रौद्र रस (चौपाई)

रौद्र रस (चौपाई)नर नारी चित बचन कठोरा, बिना मान कब गुंजन भौंराकड़ी धूप कब लाए भोरा, रौद्र रूप काहुँ चितचोरा।।-१सकल समाज भिरे जग माँहीं, मर्यादा मन मानत नाहींयह विचार कित घाटे जाहीं, सबकर मंशा वाहे वाही।।-२प्राणी विकल विकल जल जाना, बिना मेह की गरजत बानाअगर रगर चौमुखी विधाना, भृगुटी तनी बैर पहचाना।।



“गीत” (बिटिया बैठी है डोली ससुराल की)

“गीत” (बिटिया बैठी है डोली ससुराल की)बिटिया बैठी है डोली ससुराल की आए सज के बाराती खुशहाल की....... कभी बिंदियाँ हँसे कभी मेंहदी खिले कभी नयना झरे कभी सखियाँ मिलेताकी झांकी रे होली सु-गुलाल की बिटिया बैठी है डोली ससुराल की........कहीं मैया खड़ी कहीं भैया खड़े कहीं बाबू ढ़लें



"झिनकू भैया का झुनझुना” (घुनघुना)

"झिनकू भैया का झुनझुना” (घुनघुना) झिनकू भैया को बचपन से ही झुनझुना बहुत पसंद था, जो आज भी किसी न किसी रूप में बज ही उठता है। कभी महँगाई की धुन पर झनझना जाता है तो कभी भ्रष्टाचार, आतंकवाद, बेरोजगारी, भूखमरी, बलात्कार इत्यादि पर आफरीन हो जाता है झिनकू भैया का घुनघुना। बजा



झिनकू के चचा और दुर्गापूजा (लघुकथा)

"झिनकू के चचा और दुर्गापूजा" जी हाँ सर, मुझे आज भी याद है 1978 की वह शाम जब मैंने माँ दुर्गा जी का दर्शन कलकत्ता के आलीशान पंडाल में किया था और आप मेरे बगल में खड़े थे। मुझे बंगाली नहीं आती थी और मैं मन में कुछ प्रश्न भाव लिए हुए किसी हिंदीभाषी को तलाश कर रहा था कि इतने म



दो बहनो का मिलन – वार्ता – (हिंदी अंग्रेजी)

दो बहनो का मिलन – वार्ता – (हिंदी अंग्रेजी) !दरवाजे पर ..दस्तक होती है ….डिंग-डोंग …डिंग-डोंग ..डिंग-डोंग …डिंग-डोंग ..हू इस आउट साइड ऑन द डोर …..(अंदर से आवाज आई)जी …..जी मै….मै हूँ हिंदी …….!आपसे मिलने आई हूँ !ओह….. वेल … !यू आर ……कम इन …!प्रणाम ….अंग्रेजी बहन ………!(हिंदी बोली)वेलकम म



संस्मरण......;नागपंचमी और नवान्न (नेवान)

संस्मरण......"नागपंचमी और नवान्न (नेवान)" गौतम गोत्रीय मिश्र परिवार का पुस्तैनी गाँव भरसी बुजुर्ग आज भी उन तमाम रीतियों, परंपराओं और संस्कारों को उसी रूप संजोए हुए है जिस रूप में पूर्वजों की रहनी करनी शदियों से चलती आई है। अगर कुछ बदला है तो वे हैं मिट्टी के दीवारों वाले



“छुक छुक रेल” (यात्रा वृतांत)

“छुक छुक रेल” (यात्रा वृतांत) फिर वहीँ स्टेशन, वही रेल, वही पतली पट्टी वाली लोहे की डगर। चढ़ते उतरते धक्का मुक्की करती पसीने की कमाई हुई गठरी को सीने से चिपकाए परवरिश के रिश्ते। कोई आर.ए.सी., कोई कनफर्म तो कोई प्रतीक्षारत, अधीर, निराधार टिकट के साथ आशा भरी नजर के साथ सूच



कोहली (Kohali) तेज़ी से भारत के सबसे सफ़ल कप्तान की सीढ़ी चढ़ने में हर घड़ी रिकॉर्ड बदल रहे हैं

चेन्नई टेस्ट के चौथे दिन जश्न के साथ एक शंका भी थी. नौजवान बल्लेबाज़ को मौका देने के चक्कर में विराट कोहली ने पारी घोषित करने में कहीं देर तो नहीं कर दी. लेकिन पांचवें दिन रवींद्र जडेजा की अगुवाई में भारतीय गेंदबाज़ों ने इन सवालों के जवाब में एक पारी और 75 रनों की विशाल ज



मेंहदी कोन से लिखी गई गीतांजलि ( गीतांजलि )

मेंहदी कोन से लिखी गई गीतांजलि ( गीतांजलि )पीयूष ने एक और नया कारनामा कर दिखाया है उन्होंने 1913 के साहित्य के नोबेल पुरस्कार विजेता रविन्द्रनाथ टैगोर की विश्व प्रसिद्ध कृति 'गीतांजलि' को 'मेंहदी के कोन' से लिखा है। उन्होंने 8 जुलाई 2012 को मेंहदी से गीतांजलि लिखनी शुरू क



लोकपाल और लोकायुक्त (संशोधन) विधेयक एचटीटीपी:

प्रश्न-लोकपाल अधिनियम में एक लोक सेवक को अपनी स्वयं पत्नी/पति और बच्चों की परिसंपत्तियों और देनदारियों की घोषणा कार्यभार संभालने के कितने दिनों के भीतर सक्षम प्राधिकारी के समक्ष करप्रश्न-लोकपाल अधिनियम में एक लोक सेवक को अपनी स्वयं पत्नी/पति और बच्चों की परिसंपत्तियों और



ट्रांसजेंडर व्यक्तियों का (अधिकार संरक्षण) विधेयक, 2016

भारत के संविधान के भाग-III में अनुच्छेद 14 के अंतर्गत सभी व्यक्तियों को विधि के समक्ष समता की गारंटी प्रदान की गई है, अनुच्छेद 15 का खंड (1) और खंड (2) तथा अनुच्छेद 16 का खंड (2) अन्य बातों के साथ लिंग के आधार पर विभेद का प्रतिषेध और अनुच्छेद 19 का खंड (1) वाक् स्वातंत्र्य विषयक अधिकारों का संरक्षण



ग़ज़ल गंगा: ( ग़ज़ल ) हर पल याद रहती है निगाहों में बसी सूरत

( ग़ज़ल ) हर पल याद रहती है निगाहों में बसी सूरतसजा  क्या खूब मिलती है किसी   से   दिल  लगाने  की तन्हाई  की  महफ़िल  में  आदत  हो  गयी   गाने  की  हर  पल  याद  रहती  है  निगाहों  में  बसी  सूरत  तमन्ना  अपनी  रहती  है  खुद  को  भूल  जाने  की  उम्मीदों   का  काजल   



मदन मोहन सक्सेना की ग़ज़लें : ग़ज़ल (रिश्तें भी बदल जाते समय जब भी बदलता है )

ग़ज़ल (रिश्तें भी बदल जाते समय जब भी बदलता है )  मुसीबत यार अच्छी है पता तो यार चलता है कैसे कौन कब कितना,  रंग अपना बदलता है किसकी कुर्बानी को किसने याद रक्खा है दुनियाँ  में जलता तेल और बाती है कहते दीपक जलता है मुहब्बत को बयाँ करना किसके यार बश में है उसकी यादों का दिया



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