संदेसे आते हैं हमें तड़पाते हैं

संदेसे आते हैं हमें तड़पाते हैं Ke Ghar Kab Aaoge - Sandese Aate Hain LyricsSndese ate hain hamen tadpaate hainJo chitthhi ati hai wo puchhe jaati haiKe ghar kab aoge likho kab aogeKe tum bin ye ghar suna suna haiKisi dilawaali ne, kisi matawaali neHamen khat likha ha



देश भक्ति गीत नीतेश शाक्य अजनबी

एमां मेरी यादों को, दिल में बसा लेना| अब जाता है लड़ने को, ये देश भक्त दीवाना| विजयपाकर के ही आए, बस इतनी दुआ देना| ऐ मां मेरी यादों को दिल में बसा लेना|<!--[if !supportLineBreakNewLine]--><!--[endif]-->हैदिल में मां मेरे, सरहद के बसे छाले| ये जख



आर्यावर्त

👁️👁️👁️👁️👁️👁️👁️👁️शरहद की ओर तकने वालों केसंग 'खून की होली' वीर खेलते।शरहद की ओर तकते वालों केसंग खून की होली बाँकुणे खेलते।।कौन धृष्ट कहता "एल. ओ. सी."की तरफ न भारतीयों तुम देखो!शरहद पार कर हमने खदेड़ापुलवामा को जा जरा देखो!!'सोने की चिड़िया' को अरेबहुतो ने सदियों था नोचा।संभल गये अब हम- ब



सुषमा जी भारत माता की वीर कर्तव्यमयी निष्कामभाव पूर्ण देश पर समर्पित एक महान देवी

शब्दों की कमी भाव को समझ जाइए । जय हिंद आत्मन: शांति भवति: भारत माँ की गोद में ॐ शांति शांति शांति !



भगवान शंकर के इन 12 ज्योतिर्लिंग के दर्शन करने से पूरी होंगी हर मनोकामनाएं

भगवान शंकर को महादेव इसलिए कहते हैं क्योंकि इनसे बड़े कोई देवता नहीं हैं और इन्हें मन से याद करने पर ये आपकी पूजा भी स्वीकार करते हैं। जो मानव हर दिन सुबह ज्योतिर्लिंग के नाम का जाप करता है तो उसके सातों जन्म के पाप नष्ट हो जाते हैं। इस कामना की पूर्ति करने के लिए मानव को हर दिन शिव जी की अराधना करन



श्रावण माह: अंतिम दो सोमवार को करें ये काम, पैसा और भाग्य होंगे आपकी मुट्ठी में

भोलेनाथ को प्रसन्न करने और उनकी पूजा करने के लिए श्रावण मास यानी सावन का महीना सबसे पावन माना जाता है। पूरे देश में 17 जुलाई से सावन का महीना मनाया जा रहा है और सभी भोलेनाथ के प्रति अपनी श्रद्धा भक्ति दिखाई है। 15 अगस्त को सावन का महीना खत्म होने वाला है और इसके पहले



कारगिल युद्ध -- शौर्य की अमर गाथा

कोई भी राष्ट्र कितना भी शांति प्रिय क्यों ना हो , अपनी सीमाओं की हर तरह से सुरक्षा करना उसका परम कर्तव्य है | यदि कोई देश अपनी सुरक्षा में जरा सी भी लापरवाही करता है उसे पराधीन होते देर नहीं लगती | , क्योंकि राष्ट्र की सीमाओं के पार बसे दूसरे राष्ट्र भी



शिव चालीसा : बरसेगी अपार कृपा शिव शक्ति की करें वंदना

साल 2019 में 16 जुलाई से श्रावण मास की शुरुआत हुई और ये 15 अगस्त तक बना रहेगा। इस दौरान लोक शिव वंदना करते हैं और उनकी पूजा करने के दौरान Shiv Chalisa और शिव आरती करने के बाद भी शिवजी की पूजा पूरी की जाती है। शिव जी के माध्यम से भक्त अप



हार्दिक अभिनन्दन !

वीर अभिनन्दन ! हार्दिक अभिनन्दन ! तुम्हारे शौर्य को कोटि वन्दन ! पुलकित , गर्वित माँ भारती - तुम्हारे निर्भीक पराक्रम से , मृत्यु - भय से हुए ना विचलित - ना चूके संयम से ;सिंह पुत्र तुम जननी के सहमा शत्रु नराधम !! श



Shiv ji ki aarti - शिवजी की आरती - In Hindi

Shiv ji ki aarti - शिवजी की आरती - In HindiShiv ji ki aarti - शिवजी की आरतीॐ जय शिव ओंकारा, स्वामी जय शिव ओंकारा।ब्रह्मा, विष्णु, सदाशिव, अर्द्धांगी धारा॥ॐ जय शिव ओंकारा॥ एकानन चतुरानन पञ्चानन राजे।हंसासन गरूड़ासन वृषवाहन साजे॥ॐ जय शिव ओंकारा॥ दो भुज चार चतुर्भुज दसभुज



भक्ति

मैं ना तो हिन्दू हूँ ना ही हिंदुत्व में विश्वास रखता हूँ. मैं सनातनी हूँ और सनातन धर्म का पालन करता हूँ. सनातन धर्म जो सृष्टि के आरम्भ से हैं और सृष्टि के अंत तक रहेगा. गर्व से कहो कि मैं सनातनी हूँ. सनातन में सब कुछ समा जात



क्या आप राष्ट्रगान का सम्मान करते है??

03.12.15देश में असहिष्णुता को लेकर छिड़ी बहस के बीच आज सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हो रहा है जिसमें कुछ लोगों द्वारा एक मुस्लिम परिवार को सिनेमाहाल से बाहर जाने के लिए कहा जा रहा है।बताया जा रहा है कि कुछ लोगों ने सिनेमाहाल में पिक्चर देखने आए एक मुस्लिम परिवार को बाहर निकाल दिया क्योंकि वो परिव



लौटा माटी का लाल

गूंजी मातमी धुन लुटा यौवन तन सजा तिरंगा लौटा माटी का लाल माटी में मिल जाने को ! इतराया था एक दिन तन पहन के खाकी चला वतन की राह ना कोई चाह थी बाकी चुकाने दूध का कर्ज़ पिताका मान बढाने को ! लौटा माटी का लाल माटी में मिल जाने को !!रचा चक्रव्यूह शिखंडी शत्रु ने छुपके घात लगाई कु



क्या सीखें रामायण में वर्णित शबरी प्रसंग से

त्याग, संघर्षपूर्ण जीवन, नि: स्वार्थ सेवा और निष्काम भक्तिरामायण और रामचरित मानस में भगवान श्रीराम की वनयात्रा में माता शबरी का प्रसंग सर्वाधिक भावपूर्ण है। भक्त और भगवान के मिलन की इस कथा को गाते सुनाते बड़े-बड़े पंडित और विद्वान भाव विभोर हो जाते हैं। माता शबरी का त्याग और संघर्षपूर्ण जीवन, नि: स्व



प्रेम के भूखे हैं भगवान

तुलसी दास कहते हैं- 'भाव-अभाव, अनख-आलसहुं, नाम जपत मंगल दिषी होहुं।' भाव से, अभाव से, बेमन से या आलस से, और तो और, यदि भूल से भी भगवान के नाम का स्मरण कर लो तो दसों दिशाओं में मंगल होता है। भगवान स्वयं कहते हैं, भाव का भूखा हूं मैं, और भाव ही इक सार है, भाव बिन सर्वस्व भी दें तो मुझे स्वीकार नहीं! ऐ



देश के खास मंदिर

करणी माता मंदिर इस मंदिर को चूहों वाली माता का मंदिर, चूहों वाला मंदिर और मूषक मंदिर भी कहा जाता है, जो राजस्थान के बीकानेर से 30 किलोमीटर दूर देशनोक शहर में स्थित है। करनी माता इस मंदिर की अधिष्ठात्री देवी हैं, जिनकी छत्रछाया में चूहों का साम्राज्य स्थापित है। इन चूहों में



हे कान्हा....

हे कान्हा...अश्रु तरस रहें, निस दिन आँखों से बरस रहें,कब से आस लगाए बैठे हैं, एक दरश दिखाने आ जाते...बरसों से प्यासी नैनों की, प्यास बुझाने आ जाते...बृंदावन की गलियों मे, फिर रास रचाने आ जाते...राधा को दिल मे रख कर के, गोपियों संग रास रचा जाते...कहे दुखियारी मीरा तोह से,



भक्ति गान - जय महावीर स्वामी

।। भक्ति-गान।। जय महावीर स्वामी जय महावीर स्वामी, जय महावीर स्वामी, जय महावीर स्वामी।।नित तेरे दर्शन पाऊं, और तेरी कृपा पाऊं स्वामी;सामने भी आओ स्वामी, कृपा की वर्षा करो स्वामी;जय महावीर स्वामी, जय महावीर स्वामी।।नित तेरा नाम जपूं, तेरे मार्ग



मैं कट्टर नहीं हूं

मैं कट्टर नहीं हूं स्वयं को भारतीय कहना, मानव कहना कट्टरता नहीं है; अपनी जड़ों से जुड़े रहना; जो समूचे विश्व को एक माने, एक कुटम्ब माने, ऐसी जड़ों से जुड़े रहना कट्टरता नहीं है।



कालिदास और कालीभक्त

इस कथा के दो पात्र है . एक भक्ति रस का उपासक तो दूजा श्रृंगार रस का उपासक है. दोनों के बीच द्वंद्व का होना लाजिमी है. ये कथा भक्ति रस के उपासक और श्रृंगार रस के उपासक मित्रों के बीच विवाद को दिखाते हुए लिखा गया है.ऑफिस से काम निपटा के दो मित्र कार से घर की ओर जा रहे थे



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