Dharmendra_rajmangal_books

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घासलेट का घी

बात लावन गाँव की है,जिसमे राजेश्वरी देवी नाम की एक महिला रहती थीं. उनके पति की मृत्यु काफी समय पहले हो चुकी थी. तीनलडके और एक लडकी थी जिसकी शादी कुछ दिनों पहले हो चुकी थी. घरकी आर्थिक स्थिति काफी खराब थी. क्योंकि कमाने वाला घर मेंकोई थ



साध्वी

शहरके दूसरे छोर पर खाली पड़े मैदान की एक अलग पहचान थी. उसमें उगेपेड़ों की छाँव और वहां का शांत वातावरण हर किसी को लुभाता था. यहाँ से गुजरते हुए लोगों को उन पेड़ों की छाँव में नर्म घास पर लेटे,बैठे और खड़े प्रेमी जोड़ों के दर्शन बड़े आराम से हो जाते थे. येवो लोग थे जो घर वाल



कहानी - मिट्टी के मन

बहती नदी को रोकना मुश्किल कामहोता है. बहती हवा को रोकना और भी मुश्किल.जबकि बहते मन को तो रोका ही नही जा सकता. गाँवके बाहर वाले तालाब के किनारे खड़े आमों के बड़े बड़े पेड़ों के नीचे बैठा लड़का मिटटीके बर्तन बनाये जा रहा था. तालाब की तरफ से आने वाली ठंडीहवा जब इस लडके के सावले उघडे बदन से टकराती तो सर से प





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