जीवन की रामकहानी

जीवन की रामकहानी कितने ही दिन मास वर्ष युग कल्प थक गए कहते कहते पर जीवन की रामकहानी कहते कहते अभी शेष है || हर क्षण देखो घटता जाता साँसों का यह कोष मनुज का और उधर बढ़ता जाता है वह देखो व्यापार मरण का ||सागर सरिता सूखे जाते, चाँद सितारे टूटे जाते पर पथराई आँखों में कुछ बहता पानी अभी शेष है ||एक ईं



हिंदी दिवस पर प्रस्तुत गीत

"गीत"हिंदी हिंद की जान है, आन बान और शान हैभारत के हर वासी का, युग-युग से पहचान हैहर बोली में लहजा हिंदी, हर माथे पर सोहे बिंदीघर-घर में इंसान है, आँगन मुख मुस्कान है.......लिखना रुचिकर पढ़ना रुचिकर, रुचिकर है आठो डाँड़ीहिंदी के हर शब्द में बहती, गंगा यमुना की नाड़ीस्वर व्यंजन की आरती, प्रिय प्रतीक माँ



भरी भीड़ में मन बेचारा

पितृपक्ष चल रहा है | सभी हिन्दू धर्मावलम्बी अपने दिवंगत पूर्वजों के प्रति श्रद्धासुमन समर्पित कर रहे हैं | हमने भी प्रतिपदा को माँ का श्राद्ध किया और अब दशमी कोपिताजी का करेंगे | कुछ पंक्तियाँ इस अवसर पर अनायास ही प्रस्फुटित हो गईं... सुधीपाठकों के लिए समर्पित हैं...भरी भीड़ में मन बेचारा खड़ा हुआ कुछ



ईरानी ( पर्शियन ) समाज में हिंदी भाषा का महत्व ( हिंदी दिवस के उपलक्ष में )

ईरानी (पर्शियन )समाज में हिंदी भाषा का महत्व डॉशोभा भारद्वाज मुझेकई वर्ष तक परिवार सहित ईरान में रहने का अनुभव रहा है | ईरान के शाह मोहम्मद रजापहलवी ,पहलवी राजवंश के आखिरी शाह थे उन्होंने शान शौकत के साथ आर्य मिहिर की उपाधिधारण की उनके खिलाफ क्रान्ति का ऐसा म



हिंदी दिवस

अनपढ़ नही हूँ साहब"हिंदी" में लिखना उतना ही अच्छा लगता हैजितना "माँ के हाथों का खाना"हिंदी दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं



हिंदी दिवस कैसे मनाएं ...

https://duniaabhiabhi.com/how-do-we-celebrate-hindi-day/



हिंदी दिवस

हिंदी दिवस कीसभी को हार्दिक शुभकामनाएँआप सब सोचेंगे कि पूर्णिमा को अब स्मरण हुआ “हिंदी” दिवसका... पर व्यस्तता ही कुछ ऐसी थी... माँ के श्राद्ध का तर्पण... भोजन... ऊपर से“अतिथि देवो भव”... तो अब साँझ को इस सबसे अवकाश पाकर मोबाइल ऑन किया तो देखाहिंदी दिवस के उपलक्ष्य में अनगिनती शुभकामना सन्देश मेरी अभ



हम जुबां

हिंदी है हम वतन है। अपनी अभिव्यक्ति कहने का जतन है, अपनी संस्कृति का न हो पतन, बस यही जतन है। हिंदी है हम वतन है। जुबानें बेहिसाब है जहां में, हम वतन के, खुद के आजाद ख्यालात की, जुबान है हिंदी... अपनेपन का अहसास, खुद के शब्दों की परवाज़ है हिंदी, कोयल की जुबान है हिंदी। हिंदी है हम वतन है...



हिंदी दिवस और राष्ट्र भाषा हिंदी

निज भाषा उन्नति अहे,सब उन्नति को मूल महान साहित्यकार भारतेन्दु हरिश्चन्द्र ने अपनी भाषा को सब प्रकार की उन्नति का मूल कारक बताया था।अपनीभाषा अर्थात जिस जगह हम रहते हैं ,उस विस्तृत भूभागमें बोली जाने वाली भाषा।इस प्रकार हिंदी हमारी मातृ-भाषा है,क्योंकि वह विस्तृत भू-भाग में



हिंदी को राष्ट्रभाषा बनाने को भारी समर्थन ...

https://duniaabhiabhi.com/heavy-support-to-make-hindi-the-national-language/



इस जीवन को

आज भगवान् श्री कृष्ण काजन्म महोत्सव है | देश के सभी मन्दिर और भगवान् की मूर्तियों को सजाकर झूले लगाएगए हैं | न जाने क्यों,इस अवसर पर अपनी एक पुरानी रचना यहाँ प्रस्तुत कर रहे हैं, क्योंकि हमारे विचार सेमानव में ही समस्त चराचर का साथी बन जाने की अपार सम्भावनाएँ निहित हैं, और यही युग प्रवर्तक परम पुरुष



Story in Hindi. हिंदी की ५ अलग - अलग सर्वश्रेष्ठ कहानियां

story in hindi इस पोस्ट में ५ हिंदी कहानियां दी जा रही हैं . मुझे उम्मीद है की यह सभी कहानिया आपको अवश्य भी पसंद आएगी . यह कहानियां इस प्रकार हैं. 1- जियो और काम करो . 2- जीना इसी का नाम है. 3- सादा जीवन उच्च विचार 4- पुरानी कहानी 5- सत्ता 1- मेरे पिता एक परिश्रमी व्यक्ति थे जिन्होंने



हिंदी लेखन का विस्तार ?

शब्दनगरी को कैसे और बेहतर व ज़्यादा से ज़्यादा लोगों से जोड़ सकते है ? कैसे एक राष्ट्रीय विख्यात मंच बना सकते है कि जैसे २०१५ में thequint thewire बने और आज देश की प्रमुख website media news में एक हैं वैसे ही हिंदी लेखन में कैसे हम इसे उस स्तर पे ले जा सकते है ?



मातृभाषा एवम विदेशी भाषा

बच्चे की भाषा को माँ औरमाँ की भाषा को बच्चा कब से समझता है ?आपको पता है न ?जन्म से...शायद जन्म से भी पहले से ?..तब से ...जब बच्चा बोल भी नहीं पाता ।किंतु वह समझता है माँ की भाषा माँ समझती है बच्चे की भाषा । वह भाषा कौन सी होती है ?वह भाषा जो भी होती है,बच्चे का माँ से संवाद उसी भाषामें होता है ।



हिंदी भाषा

कई दशको पहले, यदि भारत में कुछ ऐसा घट जाता,जिस से ये देश धन सम्पन्न और विकसित बन जाता, चहुँमुखी विकास के साथ साथ,अन्तराष्ट्रीय व्यापर भी शशक्त हो जाता, और शशक्त हो जाती हिंदी भाषा, भारत में तो चारो और हिंदी बोली जाती ही ,और विदेशी भी हिंदी बोलते हुए आता,लड़खड़ाती हुई हिंदी बोलते हुए जब विदेशी आता,तो म



एक जीवन

गुड़िया रानी गुड़िया रानी क्या हाल है , ये देखो ना माँ ने अभी दूध पिलाया है । गुड़िया रानी गुड़िया रानी क्या हाल है , ये देखो ना कैसे मैंने बैठना सीखा है । गुड़िया रानी गुड़िया रानी क्या हाल है , ये देखो ना कैसे मैंने चलना सीखा है । गुड़िया रानी गुड़िया रानी क्या हाल है , ये देखो



आत्मा

मंज़िल का भान हो न हो / पथ का भी ज्ञान हो न हो आत्मा – हमारी अपनी चेतना / नित नवीन पंख लगाए सदा उड़ती ही जाती है / सतत / निरन्तर / अविरत...क्योंकि मैं “वही” हूँ / मेरे अतिरिक्त और कुछ भी नहीं “अहम् ब्रह्मास्मि” या कह लीजिये “सोSहमस्मि”तभी तो, कभी इस तन, कभी उस तनकभी तेरे तन तो कभी मेरे तन | न इसके पंख



निस्वार्थ प्रेम ही है ध्यान

निस्वार्थप्रेम ही है ध्यानसंसार के समस्त वैभव होते हुए भीकँगाल है मनुष्य, रीते हैं हाथ उसके यदि नहीं है प्रेम का धन उसके पास...किया जा सकता है प्रेम समस्त चराचर से क्योंकि नहीं होता कोई कँगाल दान करने से प्रेमकाजितना देते हैं / बढ़ता है उतना ही...नहीं है कोई परिभाषा इसकी / न ही कोई नाम / न रूपबस है



पाकिस्तान में हिंदी पाठशाला - दुर्लभ और दिलचस्प लेकिन धार्मिक कट्टरता

भारत और पाकिस्तान सांस्कृतिक एवं भाषाई सभ्यताओं से आज भी एक दूसरे से जुड़े हुए हैं. बंटवारे के बाद भारत ने अपनी प्राचीन सभ्यता को बनाए रख कर एक बेहतर लोकशाही बनने की ओर कदम बढाएं वहीँ पाकिस्तान ने हर वो कदम उठाया कि जिससे वह भारत से खुद को अलग बता सके.दुःख की बात है, सैंतालीस के पहले रावलपिंडी, लाहौर



काश



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