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Hindi poetry on childhood life - अजूबी  बचपन ; अर्चना की रचना

बचपन की यादों आधारित हिंदी कविता अजूबी बचपन आज दिल फिर बच्चा होना चाहता है बचपन की अजूबी कहानियों में खोना चाहता है जीनी जो अलादिन की हर ख्वाहिश मिनटों में पूरी कर देता था,उसे फिर क्या हुक्म मेरे आका कहते देखना चाहता है आज दिल फिर बच्चा होना चाहता हैमोगली जो जंगल में बघ



Hindi Inspirational poetry on life - मृत  टहनियाँ ; अर्चना की रचना

जीवन पर प्रेरक हिंदी कविता मृत टहनियाँवो टहनियाँ जो हरे भरे पेड़ोंसे लगे हो कर भीसूखी रह जाती है जिनपे न बौर आती है न पात आती है आज उन मृत टहनियों को उस पेड़ सेअलग कर दिया मैंने… हरे पेड़ से लिपटे हो कर भी वो सूखे जा रही थी और इसी कुंठा में उस पेड़ को ही कीट बन खाए जा रही



Hindi poetry on women empowerment - आज की नारी ; अर्चना की रचना

महिला सशक्तिकरण पर हिंदी कविता आज की नारी मैं आज की नारी हूँ न अबला न बेचारी हूँ कोई विशिष्ठ स्थानन मिले चलता है फिर भी आत्म सम्मान बना रहा ये कामना दिल रखता है न ही खेला कभी women कार्ड मुश्किलें आयी हो चाहे हज़ार फिर भी कोई मेरी आवाज़ में आवाज़ मिलाये तो अच्छा लगता है



Hindi poetry on patriotism and love - शूरवीर ; अर्चना की रचना

देशभक्ति प्रेम पर हिंदी कविता शूरवीर आज फिर गूँज उठा कश्मीर सुन कर ये खबरदिल सहम गया और घबरा कर हाथ रिमोट पर गया खबर ऐसी थी की दिल गया चीर हैडलाइन थी आज फिर गूँज उठा कश्मीर फ़ोन उठा कर देखा तो उनको भेजा आखिरी मेसेज अब तक unread था न ही पहले के मेसेज पर blue tick था ऑनला



Hindi poetry on love - तुमको लिखा करूंगी ; अर्चना की रचना

Hindi poetry on love - तुमको लिखा करूंगी > अर्चना की रचना अब से मैं प्यार लिखूंगी तो तुमको लिखा करूंगी वो शामें मेरी ,जो तुम पर उधार हैं , उन पर ख्वाब लिखूंगी तो तुमको लिखा करूंगी वो गलियाँ जिन पर तेरेवापस आने क



Hindi poetry on love and betrayal - मलाल ; अर्चना की रचना

प्रेम और विश्वासघात पर हिंदी कविता मलाल मुझे ताउम्र ये मलाल रहेगा तुम क्यों आये थे मेरी ज़िन्दगी में ये सवाल रहेगा जो सबक सिखा गए तुम वो बहुत गहरा है चलो प्यार गहरा न सही पर उसका हासिल सुनहरा है गैरों की नज़र से नहींखुद अपनी नज़र से परखा था तुम्हें मुझे लगा तेरे मेरा संग कमा



Inspirational Hindi Poetry on life - मेरे दर्द > अर्चना की रचना

प्रेरक हिंदी कविता मेरे दर्द मेरे दर्द सिर्फ मेरे हैं इन्हें अपनी आँखों का पता क्यों दूँतरसे और बरसेइन्हें अपने दर्दों से वो लगाव क्यों दूँमेरा अंधापन मेरी आँखों को चुभता है पर अपने लिए फैसलों पर इसे रोने क्यों दूँमेरे दर्द सिर्फ मेरे हैं इन्हें अपनी आँखों का पता क्यों द



Hindi poetry on holy festival Ramadan - एक ऐसी ईद ; अर्चना की रचना

रमज़ान के मौके पर हिंदी कविता एक ऐसी ईद ( कोरोना में त्यौहार )एक ऐसी ईद भी आई एक ऐसी नवरात गई जब न मंदिरों में घंटे बजे न मस्जिदों में चहल कदमी हुईबाँध रखा था हमने जिनको अपने सोच की चार दीवारों में अब समझा तो जाना हर तरफ उसके ही नूर से दुनिय



रुख़्सत

ये जो लोग मेरी मौत पर आजचर्चा फरमा रहे हैंऊपर से अफ़सोस जदा हैंपर अन्दर से सिर्फ एक रस्मनिभा रहे हैंमैं क्यों मरा कैसे मराक्या रहा कारन मरने कापूछ पूछ के बेवजह की फिक्रजता रहे हैंमैं अभी जिंदा हो जाऊँतो कितने मेरे साथ बैठेंगेवो जो मेरे र



ताज महल

नाकाम मोहब्बत की निशानीताज महल ज़रूरी हैजो लोगो को ये बतलाये केमोहब्बत का कीमती होना नहींबल्कि दिलों का वाबस्ता होना ज़रूरी हैदे कर संगमरमर की कब्रगाहकोई दुनिया को ये जतला गयाके मरने के बाद भीमोहब्बत का सांस लेते रहना ज़रूरी हैवो लोग और थे शायद, जोतैरना न आता हो तो भीदरि



प्रेम

प्रेम, जिसमें मैं ही मैं होहम न होडूब गए हो इतने केउबरने का साहस न होवो प्रेम नहीं एक आदत हैउसकीजो एक दिन छूट जाएगीफिर से जीने की कोई वजहतो मिल जाएगीजब तू उस घेरे के बाहरनिहारेगातब ही तेरा आत्म सम्मानतुझे फिर से पुकारेगातू झलांग लगा पकड़ लेनाउसकी कलाई कोउसकी आदत के चलतेतूने नहीं सोचा खुद कीभलाई कोतब



आख़िरी इच्छा

कभी कभी सोचती हूँअगर इस पल मेरी साँसें थम जायेऔर इश्वर मुझसे ये कहने आयेमांगो जो माँगना होकोई एक अधूरी इच्छा जोअभी इस पल पूरी हो जायेमैं सोच में पड़ जाती हूँके ऐसा अगर सच हुआ तोतो क्या माँगू जोइसी पल मुझे तृप्त कर जायेबहुत कुछ पीछे छूट गयाक्या वहाँ जा के कोई गलतीसुधार ली जायेया कोई खुशनुमा लम्हाफिर स



हाय रे चीन (कोरोना और चाइना )

हिंदी कविता व्यंग्यशीर्षक-: हाय रे चीन (कोरोना और चाइना )हाय रे चीनचैन लिया तूनेसबका छीनकुछ भी न बचातुझसे ऐसाजो न खायातूने बीन बीनहाय तू कैसा शौक़ीनसारी दुनिया कोदे के Covid 19कर दिया तूनेशक्तिहीनजब वो रो रहीबिलख रहीतब तू बन ने चलामहा महीमहाय रे चीनतुझ पर Biological Weaponबनाने का आरोप लगाफिर भी तू ह



Inspirational Hindi poetry on life - ख्वाहिशें - अर्चना की रचना

जीवन पर आधारित प्रेरक हिंदी कविता ख्वाहिशें ख्वाहिशें सुख गई हैं ऐसे मौसम के बदलते मिजाज़ से फसलें जैसे क्या बोया और क्या पाया सपनों और हक़ीकत में कोई वास्ता न हो जैसे ख्वाहिशें सुख गई हैं ऐसे कल तक जो हरी भरीमुस्कुरा रही थी आज खुद अपनी नज़रलग गई हो जैसे ख्वाहिशें सुख गई है



कोई मिल गया

कोई मिल गया इस हसीन शाम में , उमर की ढलान में हाथ थामे चलने को कोई मिल गया है हाँ मुझे कोई मिल गया है कल क्या हो नहीं जानती , पर इस मंजिल तक आते आते जो थकान थी उस से थोडा आराम मिल गया है हाँ मुझे कोई मिल गया है दिल खोल के रख दिया उसके सामने मैं बस आज में जीती हूँ , वो छ



Inspirational Hindi poetry on life - भरोसा  ; अर्चना की रचना

आज की सच्ची घटना पर आधारित हिंदी कविता सारांश -: दोस्तों ये घटना आज सुबह की है , जो कि मेरी दैनिक दिनचर्या है कि मैं रोज़ सुबह उठते ही परिंदों को दाना डालती हूँ तब अपने दिन की शुरुआत करती हूँ , पर आज इस घटना ने मुझे एक कविता की सोच दी जो मैं आप लोगों से साँझा कर रही हू



Motivational Hindi poetry on life - हाँ ; अर्चना की रचना

जीवन पर आधारित विचारणीय कविता आज की कविता शायद कुछ लोगो को भावुक करेया कुछ लोगों को सोचने पर मजबूर करेमेरा काम है आप लोगों तक एक सोच पहुँचाना किसी ने अपनाई तो शुक्रिया वख्त ज़ाया किया तो माफ़ करे……शीर्षक – : हाँतुम उस दिन जो हाँ कर देते तो किसी को नया जीवन देते पर तुम्हारी



Hindi poetry on Relationships - थोड़ी सी नमी ; अर्चना की रचना

बनते बिगड़ते रिश्तों पर आधारित कविता थोड़ी सी नमी तूफानों को आने दो मज़बूत दरख्तों की औकात पता चल जाती है पेड़ जितना बड़ा और पुराना हो उसके गिरने की आवाज़ दूर तलक़ आती है सींचा हो जिन्हें प्यार से उन्हें यूं बेजान देख करएक आह सी निकलती हैपर उसे जिंदा रखने की ललक सब में कहा होती



Hindi love poetry on sentiments - इस बार ; अर्चना की रचना

प्रेम में भावनाओं पर हिंदी कविता इस बार सोचती हूँ, क्या इस बार तुम्हारे आने परपहले सा आलिंगन कर पाऊँगी या तुम्हें इतने दिनों बाद देख ख़ुशी से झूम जाउंगी चेहरे पे मुस्कान तो होगी पर क्या वो सामान्य होगी तुम्हें चाय का प्याला दे क्या एक मेज़बान की तरह मिल पाऊँगी तुम सोफे पर



Hindi poetry on life - मैं कुछ भूलता नहीं ; अर्चना की रचना

जीवन पर आधारित हिंदी कविता मैं कुछ भूलता नहीं मैं कुछ भूलता नहीं ,मुझे सब याद रहता है अजी, अपनों से मिला गम, कहाँ भरता हैसुना है, वख्त हर ज़ख़्म का इलाज है पर कभी-२ कम्बख्त वख्त भी कहाँ गुज़रता है मैं अब बेख़ौफ़ गैरों पे भरोसा कर लेता हूँ जिसने सहा हो अपनों का वार सीने पे , वो



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