Hindipoetryonlife



बैरी चाँद

मोरी अटरिया पे ठहरा ये “बैरी चाँद”देखो कैसे मोहे चिढायेदूर बैठा भी देख सके है मोरे पिया कोमोहे उनकी एक झलक भी न दिखाए .. कभी जो देखूं पूरा चाँद, याद आती है वो रातजब संग देख रहा था ये बैरी, हम दोनों को टकटकी लगाये … बिखरी थी चांदनी पुरे घर में, रति की किरण पड़ रही थी तन मन मेंऔर खोये थे हम दोनो, घर क



इंतज़ार

लहरें होकर अपने सागर से आज़ादतेज़ दौड़ती हुई समुद्र तट को आती हैं ,नहीं देखती जब सागर को पीछे आतातो घबरा कर सागर को लौट जाती हैं ,कुछ ऐसा था मेरा प्यारखुद से ज्यादा था उसपे विश्वास,के मुझसे परे, जहाँ कही भी वो जायेगाफिर लौट कर मुझ तक ही आएगा ,इंतजार कैसा भी हो सिर्फसब्र और आस का दामन थामे ही कट पाता है



बंदिशें

"इस तन पर सजती दो आँखेंबोलो किस से ज्यादा प्रेम करोगे,काटना चाहो अपना एक हाथतो बोलो किस हाथ को चुनोगे "कुछ ऐसा ही होता है बेटी का जीवनसब कहते उसे पराया धनबचपन से ही सीखा दिए जाते हैंबंदिश में रहने के सारे फ़नएक कोख एक कुटुंब में जन्मेंफिर भी क्यों ये बेगानापन ?कुछ ऐसी थी उसकी कहानीजो थी महलों की रानी



ताबीर

शीर्षक :- ताबीरमहज़ ख़्वाब देखने से उसकी ताबीर नहीं होतीज़िन्दगी हादसों की मोहताज़ हुआ करती है ..बहुत कुछ दे कर, एक झटके में छीन लेती हैकभी कभी बड़ी बेरहम हुआ करती है …नहीं चलता है किसी का बस इस परये सिर्फ अपनी धुन में रहा करती है ..न इतराने देगी तुम्हें ये, अपनी शख्सियत



अरमान

अरमान जो सो गए थे , वो फिर सेजाग उठे हैंजैसे अमावस की रात तो है , परतारे जगमगा उठे हैं…बहुत चाहा कि इनसे नज़रें फेर लूँपर उनका क्या करूँ,जो खुद- ब – खुद मेरे दामन में आ सजे हैं ….नामुमकिन तो नहीं पर अपनी किस्मत पेमुझे शुभा सा है,कही ऐसा तो नहीं , किसी और के ख़तमेरे पते पे आने लगे हैं …जी चाहता है फिर



Hindi poetry on childhood life - अजूबी  बचपन ; अर्चना की रचना

बचपन की यादों आधारित हिंदी कविता अजूबी बचपन आज दिल फिर बच्चा होना चाहता है बचपन की अजूबी कहानियों में खोना चाहता है जीनी जो अलादिन की हर ख्वाहिश मिनटों में पूरी कर देता था,उसे फिर क्या हुक्म मेरे आका कहते देखना चाहता है आज दिल फिर बच्चा होना चाहता हैमोगली जो जंगल में बघ



Hindi Inspirational poetry on life - मृत  टहनियाँ ; अर्चना की रचना

जीवन पर प्रेरक हिंदी कविता मृत टहनियाँवो टहनियाँ जो हरे भरे पेड़ोंसे लगे हो कर भीसूखी रह जाती है जिनपे न बौर आती है न पात आती है आज उन मृत टहनियों को उस पेड़ सेअलग कर दिया मैंने… हरे पेड़ से लिपटे हो कर भी वो सूखे जा रही थी और इसी कुंठा में उस पेड़ को ही कीट बन खाए जा रही



प्रेम

प्रेम, जिसमें मैं ही मैं होहम न होडूब गए हो इतने केउबरने का साहस न होवो प्रेम नहीं एक आदत हैउसकीजो एक दिन छूट जाएगीफिर से जीने की कोई वजहतो मिल जाएगीजब तू उस घेरे के बाहरनिहारेगातब ही तेरा आत्म सम्मानतुझे फिर से पुकारेगातू झलांग लगा पकड़ लेनाउसकी कलाई कोउसकी आदत के चलतेतूने नहीं सोचा खुद कीभलाई कोतब



आख़िरी इच्छा

कभी कभी सोचती हूँअगर इस पल मेरी साँसें थम जायेऔर इश्वर मुझसे ये कहने आयेमांगो जो माँगना होकोई एक अधूरी इच्छा जोअभी इस पल पूरी हो जायेमैं सोच में पड़ जाती हूँके ऐसा अगर सच हुआ तोतो क्या माँगू जोइसी पल मुझे तृप्त कर जायेबहुत कुछ पीछे छूट गयाक्या वहाँ जा के कोई गलतीसुधार ली जायेया कोई खुशनुमा लम्हाफिर स



Inspirational Hindi poetry on life - ख्वाहिशें - अर्चना की रचना

जीवन पर आधारित प्रेरक हिंदी कविता ख्वाहिशें ख्वाहिशें सुख गई हैं ऐसे मौसम के बदलते मिजाज़ से फसलें जैसे क्या बोया और क्या पाया सपनों और हक़ीकत में कोई वास्ता न हो जैसे ख्वाहिशें सुख गई हैं ऐसे कल तक जो हरी भरीमुस्कुरा रही थी आज खुद अपनी नज़रलग गई हो जैसे ख्वाहिशें सुख गई है



कोई मिल गया

कोई मिल गया इस हसीन शाम में , उमर की ढलान में हाथ थामे चलने को कोई मिल गया है हाँ मुझे कोई मिल गया है कल क्या हो नहीं जानती , पर इस मंजिल तक आते आते जो थकान थी उस से थोडा आराम मिल गया है हाँ मुझे कोई मिल गया है दिल खोल के रख दिया उसके सामने मैं बस आज में जीती हूँ , वो छ



Inspirational Hindi poetry on life - भरोसा  ; अर्चना की रचना

आज की सच्ची घटना पर आधारित हिंदी कविता सारांश -: दोस्तों ये घटना आज सुबह की है , जो कि मेरी दैनिक दिनचर्या है कि मैं रोज़ सुबह उठते ही परिंदों को दाना डालती हूँ तब अपने दिन की शुरुआत करती हूँ , पर आज इस घटना ने मुझे एक कविता की सोच दी जो मैं आप लोगों से साँझा कर रही हू



Motivational Hindi poetry on life - हाँ ; अर्चना की रचना

जीवन पर आधारित विचारणीय कविता आज की कविता शायद कुछ लोगो को भावुक करेया कुछ लोगों को सोचने पर मजबूर करेमेरा काम है आप लोगों तक एक सोच पहुँचाना किसी ने अपनाई तो शुक्रिया वख्त ज़ाया किया तो माफ़ करे……शीर्षक – : हाँतुम उस दिन जो हाँ कर देते तो किसी को नया जीवन देते पर तुम्हारी



Hindi poetry on Relationships - थोड़ी सी नमी ; अर्चना की रचना

बनते बिगड़ते रिश्तों पर आधारित कविता थोड़ी सी नमी तूफानों को आने दो मज़बूत दरख्तों की औकात पता चल जाती है पेड़ जितना बड़ा और पुराना हो उसके गिरने की आवाज़ दूर तलक़ आती है सींचा हो जिन्हें प्यार से उन्हें यूं बेजान देख करएक आह सी निकलती हैपर उसे जिंदा रखने की ललक सब में कहा होती



Hindi love poetry on sentiments - इस बार ; अर्चना की रचना

प्रेम में भावनाओं पर हिंदी कविता इस बार सोचती हूँ, क्या इस बार तुम्हारे आने परपहले सा आलिंगन कर पाऊँगी या तुम्हें इतने दिनों बाद देख ख़ुशी से झूम जाउंगी चेहरे पे मुस्कान तो होगी पर क्या वो सामान्य होगी तुम्हें चाय का प्याला दे क्या एक मेज़बान की तरह मिल पाऊँगी तुम सोफे पर



Hindi poetry on life - मैं कुछ भूलता नहीं ; अर्चना की रचना

जीवन पर आधारित हिंदी कविता मैं कुछ भूलता नहीं मैं कुछ भूलता नहीं ,मुझे सब याद रहता है अजी, अपनों से मिला गम, कहाँ भरता हैसुना है, वख्त हर ज़ख़्म का इलाज है पर कभी-२ कम्बख्त वख्त भी कहाँ गुज़रता है मैं अब बेख़ौफ़ गैरों पे भरोसा कर लेता हूँ जिसने सहा हो अपनों का वार सीने पे , वो



A Hindi poetry about life -लाज़मी सा सब कुछ ; अर्चना की रचना

जीवन पर आधारित हिंदी कविता लाज़मी सा सब कुछ मुझे वो लाज़मी सा सब कुछ दिलवा दो जो यूं ही सबको मिल जाता है न जाने कौन बांटता है सबका हिस्सा जिसे मेरे हिस्सा नज़र नहीं आता है बहुत कुछ गैर लाज़मी तो मिला अच्छे नसीबो से पर लाज़मीसा सब कुछ मेरे दर से लौट जाता है न छु सकूँ जिसे , बस



A hindi poetry on true love - दरख्वास्त ; अर्चना की रचना

प्रेम पर आधारित हिंदी कविता दरख्वास्तसुनो, मुझे अपना बना लो मन को तो लूभा चुके होअब मुझे खुद में छुपा लो हूँ बिखरी और बहुत झल्ली सी अपनी नज़रों में पगली सी पर तुम्हारी नज़रों से जब खुद को देखा लगने लगी भली भली सी सुनो, इन नज़रों में ता उम्र मुझको बसा लोसुनो, मुझे अपना बना लो



inspirational Hindi poetry on life - सच ; अर्चना की रचना

जीवन पर आधारित प्रेरणात्मक हिंदी कविता सच कितना सरल है, सच को स्वीकार कर जीवन में विलय कर लेनासंकोच ,कुंठा और अवसाद को खुद से दूर कर लेना जिनके लिए तुम अपने होवो हर हाल में तुम्हारे ही रहेंगे,कह दोगे जो हर बात दिल कीतो उनसे रिश्ते और गहरे ही जुड़ेंगे कितना सरल है , औरों की



Hindi poetry based on relationships - कहाँ तक साथ चलोगे ; अर्चना की रचना

रिश्तों पर आधारित हिंदी कविता कहाँ तक साथ चलोगे सबसे जुदा हो कर पा तो लिए तुमको मैंने पर ये तो बोलो कहाँ तक साथ चलोगे ?न हो अगर कोई बंधन रस्मो और रिवाजों का क्या तब भी मेरा ही साथ चुनोगे बोलो कहाँ तक साथ चलोगे ?एक धागे में पिरोई माला तक सिमित रहेगा प्यार तुम्हारा या इस गठ



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