की



लड़की

वह ठसाठस भरी बस में तिल-तिल बढ़ता हुआ आखिर उस सीट तक पहुँच ही गया जिसके किनारे की साइड में एक पन्द्रह वर्षीय खूबसूरत लड़की बैठी थी। चंद पल वह स्थिर खड़ा रहा फिर आहिस्ता से अपना दाहिना हाथ सीट की पुश्त पर रख कर लड़की के बाएं कंधे को उंगलियों से स्पर्श किया। लड़की



ये उन दीनों की बात है: समीर ने नैना को मामा के फाइनेंशियल दिक्कत ये बारे में खबर दी | आई डब्लयू एम बज

सोनी टीवी के लोकप्रिय शो ये उन दिनो की बात है, शशि सुमीत प्रोडक्शन ने दर्शकों को लुभावने नाटक से प्रभावित करने की कोशिश की है। कथानक के अनुसार, तन्वी आदित्य के साथ भाग जाती है और अदालत में उससे शादी कर लेती है। समीर और नैना ने तन्वी और आदित



हूं मैं एक अबूझ पहेली

भीड़ से घिरी लेकिनबिल्कुल अकेली हूं मैंहां, एक अबूझ पहेली हूं मैंकहने को सब अपने मेरेरहे सदा मुझको हैं घेरेपर समझे कोई न मन मेराखामोशियो ने मुझको घेराढूंढूं मैं अपना स्थान...जिसका नहीं किसी को ज्ञानक्या अस्तित्व है घर में मेरा?क्या है अपनी मेरी पहचान?अपने दर्द में बिल्कुल अकेलीहूं मैं एक अबूझ पहेली



बूढ़ी औरत

वो बूढ़ी औरत बड़ी देर से व्याकुल सी स्टेशन पर किसी को ढूंढ रही थी। मालती बड़ी देर से उसे देख रही थी ,उसकी ट्रेन एक घंटा लेट थी । उसने महसूस किया कि वृद्धा का मानसिक संतुलन भी ठीक नहीं था ।दुबली-पतली, झुर्रियों से भरा चेहरा,उलझे हुए से बाल ,अजीब सी चोगे जैसी पोशाक पहने ,हाथ में एक पोटली थामे जमीन पर



साध्वी प्रज्ञा ठाकुर ने आखिर गलत क्या कहाँ ?

भोपाल की सांसद साध्वी प्रज्ञा ठाकुर जो पूर्व में भी अपने कई बयानों के कारण मीडिया व देश की राजनीति में न केवल चर्चित रही, बल्कि उनके बयानों के कारण भाजपा को शर्मिदंगी भी उठानी पड़ी है, व पार्टी की किरकिरी भी हुई है। प्रधानमंत्री तक को पार्टी की छवि बचाने के लिये यह कहना पड़ा कि गोड़से को देशभक्त बता



विफलता?

मेरे प्यारे दोस्तों, या यूँ कहूं कि मेरे दसवीं , बारहवीं और प्रतियोगी परीक्षा के अचयनित दोस्तों। ये लेख विर्निदिष्टतः आपके सब के लिए ही लिख रहा हूँ जो किसी परीक्षा में विफल हो जाने पर आत्महत्या जैसे बेतुके विचारो को अपने मष्तिष्क द्वारा आमंत्रित करते है। और क



ये उन दिनों की बात है: समीर और नैना ने अपनी नई उपलब्धि के लिए जश्न मनाया | आई डब्लयू एम बज

सोनी टीवी के पॉपुलर शो ये उन दिनों की बात है में शशि सुमीत प्रोडक्शन ने अपने हालिया एपिसोड में ड्रामा और सस्पेंस का सही मिश्रण पेश किया है। कथानक के अनुसार, समीर और नैना ने अद्भुत अभिनेत्री अरुणा ईरानी से मुलाकात की, जिन्होंने उन्हें प्रोत्साहित दिया और उन्हें खुद की स्क्



हँसना अच्छा है .

आलिम यूँ तो हँसना अच्छा है, हँसाना अच्छा है,गैरों पे नहीं खुद पे हँसना- हँसाना अच्छा है.(आलिम ) दूसरों को ना सिखाओ उन्हें क्या करना है, ख़ुद भी कुछ करके दिखाओ तो अच्छा है. (आलिम) महज़ मुल्कपरस्ती की बातो से मुल्क चलते नहीं, मुल्क की



"याद आते हैं वो बचपन के दिन "

बचपन के दिन - कल याद आ गया मुझको भी अपना बचपनखुश हुई बहुत पर आँख तनिक सी भर आयी गांवों की पगडण्डी पर दिन भर दौड़ा करती कुछ बच्चों की दीदी थी। दादी की थी राजदुलारी रोज़ सुनती छत पर दादाजी से परियो की कहानी झलते रहते वो पंखा पर थक कर मैंसो जाती घर कच्चे थे चाची लीपा



ये उन दिनों की बात है: नैना समीर के साथ अहमदाबाद वापस लौटने का फैसला करती है | आई डब्लयू एम बज

सोनी टीवी के लोकप्रिय शो ” ये उन दिनों की बात है ” प्रोडक्शन शशि सुमीत ने हाल ही के एपिसोड में ड्रामा और सस्पेंस का सही मिश्रण पेश किया है।कथानक के अनुसार, समीर और नैना ने अद्भुत अभिनेत्री अरुणा ईरानी से मुलाकात की, जिन्होंने उन्हें प्रोत्साहित किया और उन्हें खुद की स्क्र



ये उन दिनों की बात है: तन्वी और आदित्य चुपके शादी करेंगे | आई डब्लयू एम बज

सोनी टीवी का प्रसिद्ध शो ये उन दिनों की बात है शशि सुमीत प्रोडक्शन द्वारा प्रोड्यूस में पिछले कुछ हफ्तों से काफी ड्रामा नजर आ रहा है। शो दर्शकों कल अपने रोमांचक ट्वीट्स और टर्न्स से मनोरंजित करने में कभी पीछे नहीं रहता है।कहानी के मुताबिक, समीर और नैना एक्ट्रेस अरुणा ईरान



देश की जनता के रुपयों पर कब तक 'ऐश' होता रहेगा?

हमारे देश के प्रधानमन्त्री कहते हैं : मैं 'जनता का सेवक' हूँ; मैं आप सबका 'प्रधान चौकीदार' हूँ; परन्तु विडम्बना देखिए, उनका काम 'चौकीदारी' का और मीडिया की सुर्ख़ियों में बने रहते हैं। यदि वे सचमुच, जनसेवक हैं तो संवैधानिक रूप में 'प्रधानमन्त्री' के स्थान पर 'प्रधान जनसेवक' कहलाने के लिए क्यों नहीं प्



लड़की

खेलती- हँसती मुस्कुराती हुई लड़की, बचपन खुशी से हाँ जीती हुई लड़की, घर में ही रहने की हिदायत मिली है, आने जाने की टोक सहती हुई लड़की। हर कदम पर ताना सुनती हुई लड़की,



सोनी टीवी का शो ये उन दीनों की बात है ऑफ एयर होगा | आई डब्लयू एम बज

ये उन दिनों की बात है के प्रशंसकों के लिए बुरी खबर है। हमने सुना है कि यह शो अपने तार्किक अंत को पूरा करने के लिए तैयार है। सोनी टीवी का लोकप्रिय शो ये उन दिनों की बात है 90 के दशक का रोमांस ड्रामा की अपनी बेहतरीन कहानी और पात्रों के शानदार अभिनय के साथ भारतीय टेलीविजन पर



आशी सिंह हुई भावुक : कहा ये उन दिनों की बात है के अंत से दुखी हूं | आई डब्लयू एम बज

इस वीकेंड में ये उन दिनों की बात है के अंत की खबर एक दिल दहला देने वाली खबर रही है और यहाँ हम आशी सिंह के बारे में बात कर रहे हैं !! यह शो सोनी टीवी पर प्रसारित होता है और शशि सुमीत प्रोडक्शंस द्वारा निर्मित है।आई डब्ल्यू एम बज.कॉम ने विशेष रूप से समीर और नैना की टीम के त



ये उन दीनों की बात है: अरुणा ईरानी से मुलाकात के बाद समीर नैना का सेलेब्रेशन का समय | आई डब्लयू एम बज

सोनी टीवी के पॉपुलर शो ये उन दिनों की बात है के प्रोड्यूस शशि सुमीत प्रोडक्शन लगातार अप्रत्याशित ट्विस्ट के साथ आ रहे हैं और दर्शकों को चल रहे एपिसोड से रूबरू कराते हैं। हमने पहले सूचना दी थी, नैना (आशी सिंह), जो एक नौकरी की तलाश कर रही थी, आखिरकार उसे पहली नौकरी मिलती है



सरताज गिल ने & टीवी की गुडिया की शादी में मुख्य भूमिका में | आई डब्लयू एम बज

गुडिय़ा की शादी आगामी & टीवी शो जो एस्सेल विजन द्वारा निर्मित किया गया है, पिछले कुछ समय से काफी चर्चा में है। बुंदेलखंड की पृष्ठभूमि में & TV पर यह एक कॉमेडी ड्रामा श्रृंखला है। शो में अभिनय करने वाले कलाकार भूमिकाओं के संबंध में अपनी बारीकियों को पाने के लिए एक व्यापक क



टिकटोक स्टार आवेज़ दरबार फ़ैसु के समर्थन में आए | आई डब्लयू एम बज

आवेज दरवार भारत के सबसे लोकप्रिय पुरुष टिक टोक सितारों और यू ट्यूब व्यक्तित्वों में से एक है।उन्होंने कॉलेज के त्योहारों में एक डांसर के रूप में अपनी यात्रा शुरू की। उनके अनुसार, कॉलेज के त्योहारों में कोरियोग्राफ़िंग ने उनकी रचनात्मकता का विस्तार करने और मंच पर उनकी प्रत



ये उन दिनों की बात है Spoiler Alert: अरुणा ईरानी समीर और नैना को एक टास्क देंगी | आई डब्लयू एम बज

सोनी टीवी का प्रसिद्ध शो ये उन दिनों की बात है शशि सुमीत प्रोडक्शन द्वारा प्रोड्यूस में पिछले कई सप्ताह से बहुत ड्रामा देखा जा रहा है। शो अपने ट्विस्ट और टर्न से दशकों का मनोरंजन करने में कभी पीछे नहीं होता है।कहानी के अनुसार, नैना (अशी सिंह) जो नौकरी की तलाश कर रही थी और



चटकांगनाएँ

सज सवंरके आती हैं जब वो सखियों के संग में लजाती लुभाती स्वयं में सकुचाती हर क़दम हर आहट पे रखती हैं ध्यान कहीं कोई अनजाना रस्ता न रोक ले कोई छू न ले उन अनछुई कोमल कलियों को



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