की



ग़ज़ल

ज़िंदगी ने इस क़दर रूलाया है सारे ख्वाबों को हमने जलाया है ऐसा था हमारी बेबसी का आलम पतझड़ में भी शाख़ों को हिलाया है देखो सुक़ून से सोया है वो बच्चा लगता है उसकी मां ने सुलाया है ना जाने क्यों रो रही है ये बुढ़िया मैंने जबसे इसे खाना खिलाया है मुसलमान महफूज़ नहीं यहां गद्दार ने यह भ्रम फैलाया है उसका ही स



ग़ज़ल

हर दिन होली और हर रात दिवाली है जब बिहारी की महबूबा होती नेपाली है ग़र यकीं ना आये तो इश्क़ करके देखो फिर समझ जाओगे क्या होती कंगाली है जिसकी खातिर लड़ता रहा वो ज़माने से आज उसी ने कह दिया उसे तू मवाली है जरूर इज्ज़त करता होगा वो उसकी जो ज़ली



ग़ज़ल

वो जो कहते थे कि तुम ना मिले तो ज़हर मुझे पीना होगा खुश हैं वो कहीं और अब तो उनके बगैर ही जीना होगा चोट नहीं लगी है दिल पे चीरा लग गया है मेरे दोस्त सह लूंगा दर्द मगर इस दिल को उनको ही सीना होगा इश्क़ बहुत था उनको हमसे लेकिन मजबूर थे वो लगता है शादियों के संग ही बेवफ़ाई का महीना होगा संभाल कर रखा था हम



ग़ज़ल

तुम मुझे लगती बहुत ही प्यारी हो सच-सच बताओ क्या तुम बिहारी हो अब तो होने लगा है प्यार भी तुमसे लगता है फ़नां होने की बारी हमारी हो जो भी आया खुरच कर घायल कर गया जैसे हमारा दिल इमारत सरकारी होभर जाते पेट नेताओं के भाषण से ही जब महंगाई के साथ बेरोजगारी हो लिखेंगे ग़ज़ल हम अपनी मर्ज़ी से ही दुश्मन तुम या स



ग़ज़ल

तन्हाई किसी की मुस्तकबिल न होखुशियां इतनी भी मुश्किल न होऔर पाने की आशा होअंतिम लक्ष्य हासिल न होप्यार तो सच्चा होलेकिन उसकी मंजिल न होप्रेम में डूबा होस्नेह-सरिता का साहिल न होमन में समर्पण होमहबूबा संगदिल न होज्ञान का भंडार होपर मानव जाहिल न होउससे भी प्यार होजो उसके काबिल न हो .................



ग़ज़ल

शेरनी भी पीछे हट गयीबछड़े की मां जब डट गयीहमारी कलम वो खरीद न सकेलेकिन स्याही उनसे पट गयीहमारे मुंह खोलने से पहलेदांतों से जीभ ही कट गयीसच बोलने लगा है अब वोसमझो उमर उसकी घट गयीगौर से देखो मेरे माथे कोबदनसीबी कैसे सट गयीकमीज तो सिला ली हमनेलेकिन अब पतलून फट गयीउसने गले से लगाया ही थाकमबख़्त नींद ही उच



ग़ज़ल

बहुत हुई आवारगी अब तो संभल जाने दो निभाना है मुझे राष्ट्रधर्म मत रोको जाने दो अंधेरा बहुत गहरा है एक चिराग़ जलाने दो खोल दो पिंजरें सारे परिंदों को उड़ जाने दो वे कोई ग़ैर नहीं हैं औलादें हैं मेरी मां की मत रोको उन्हें मेरे गले से लग जाने दो सुना है बहुत शिकायतें हैं उन्हें मेरी ग़ज़ल से करेंगे वो भी



ग़ज़ल

तक़दीर में केवल खुशियां कब आती हैं सच्चे प्यार में परेशानियां सब आती हैं छुपा ना रहे जब राज़ कोई दरमियांमोहब्बत में गहराइयां तब आती हैं सोचा भूल गया तुझसे बिछड़के लेकिन तेरे संग गुजारी शामें याद अब आती हैं फैल जाती है खुशबू सारी फ़िज़ाओं में तेरे तन को छूकर हवायें जब आती हैं ...................



ग़ज़ल

हर राम का जटिल जीवन पथ होगा जब पिता भार्या भक्त दशरथ होगा करके ज़ुल्म करता है वो इबादत कहो फिर कैसे पूर्ण मनोरथ होगा नींद आयेगी तुझे भी सुकून भरी जब तू भी पसीने से लथपथ होगा कृष्ण का भी रथ बढ़ रहा नहीं आगे सुदामा के रक्त से सना राजपथ होगा आज भी दुःशासन कर रहा विचरण कानून खरीदने में वो महारथ होगा



ग़ज़ल

आज लौटकर मिलने मुझसे मेरा यार आया हैशायद फिर से जीवन में उसके अंध्यार आया हैबचकर रहना अबकी बार चुनाव के मौसम मेंमीठी बातों से लुभाने तुम्हें रंगासियार आया हैबहुत प्यार करता है मुझसे मेरा पड़ोसीमुझे यह समझाने लेकर वो हथियार आया हैगले मिलकर गले पड़ना चाहता है दुश्मनलगता है अबकी बार बनके होशियार आया हैमे



यादें

;knsaHkkX;lkglh O;fDr dk lkFk nsrk gSviusckck dk ykMyk eSa cpiu ls gh jgkA tc os eq>s Ldwy NksMus tkrs rks jkLrs esamudk dksbZ f'k{kkizndgkuh lqukuk eq>s cgqr vPNk yxrk FkkA fQj NqV~Vh esa Ldwy ds ckgj igys ls ghbUrtkj esa [kMs ckck eu



ग़ज़ल

जुबां से कहूं तभी समझोगे तुम इतने भी नादां तो नहीं होगे तुम अपना दिल देना चाहते हो मुझे मतलब मेरी जान ले जाओगे तुम भड़क उठी जो चिंगारी मोहब्बत की फिर वो आग ना बुझा पाओगे तुम इश्क में सुकूं तभी मिलेगा जब जिस्म से रूह में समाओगे तुम प्यार करना कोई वादा न करना वरना बेवफा कहलाओगे तुम अब तो कहते हैं दुश्म



ग़ज़ल

किसी की मोहब्बत में खुद को मिटाकर कभी हम भी देखेंगे अपना आशियां अपने हाथों से जलाकर कभी हम भी देखेंगे ना रांझा ना मजनूं ना महिवाल बनेंगे इश्क में किसी के महबूब बिन होती है ज़िंदगी कैसी कभी हम भी देखेंगे मधुशाला में करेंगे इबादत ज़ाम पियेंगे मस्ज़िद में क्या सच में हो जायेगा ख़ुदा नाराज़ कभी हम भी देखेंगे



प्रेम दिवस

चक्षुओं में मदिरा सी मदहोशीमुख पर कुसुम सी कोमलतातरूणाई जैसे उफनती तरंगिणीउर में मिलन की व्याकुलताजवां जिस्म की भीनी खुशबूकमरे का एकांत वातावरणप्रेम-पुलक होने लगा अंगों मेंजब हुआ परस्पर प्रेमालिंगनडूब गया तन प्रेम-पयोधि मेंतीव्र हो उठा हृदय स्पंदनअंकित है स्मृति पटल परप्रेम दिवस पर प्रथम मिलन



कवि हो तुम

गौर से देखा उसने मुझे और कहालगता है कवि हो तुम नश्तर सी चुभती हैं तुम्हारी बातें लेकिन सही हो तुम कहते हो कि सुकून है मुझे पर रुह लगती तुम्हारी प्यासी है तेरी मुस्कुराहटों में भी छिपी हुई एक गहरी उदासी है तुम्हारी खामोशी में भी सुनाई देता है एक अंजाना शोर एक तलाश दिखत



कविता

*कुछ ऐसा करो इस नूतन वर्ष* शिक्षा से रहे ना कोई वंचित संग सभी के व्यवहार उचित रहे ना किसी से कोई कर्ष कुछ ऐसा करो इस नूतन वर्ष भले भरत को दिलवा दो सिंहासन किंतु राम भी वन ना जायें सीता संग सबको समान समझो सहर्ष कुछ ऐसा करो इस नूतन वर्ष मिलें पुत्रियों को उनके अधिकार पर न



कोस कोस पर बदले पानी

वर्ष 2020 की हार्दिक शुभकामनाएँ कोस कोस परबदले पानी, चार कोस पर बानी भारत मेंविभिन्न प्रान्तों व समुदायों के नववर्षआज 2019 का अन्तिम दिन है – दिसम्बर माह का अन्तिम दिवस... और कल वर्ष 2020का प्रथम दिवस - पहली जनवरी – जिसे लगभग हर जगह नव वर्ष के रूप मेंमनाया जाता है | सबसे पहले तो सभी को कलसे आरम्भ हो



माँ की वेदना

आज एक गर्भवती महिला मेरे क्लीनिक में आई और गर्भ परीक्षण के लिए मुझ पर दबाव बनाई , मैंने बोला गर्भ परीक्षण कानूनन जुर्म है अगर तुम्हें लड़की होगी तो शायद तुम गिरा दोगी बेटा ही घर का नाम रोशन करें यह जरूरी तो नहीं बेटियां भी घर का नाम रोशन करती हैंतो वह बिफर गयी और चिल्लाते हुए बोली हे अंधे इंसाफ और ब



नागरिकता संशोधन अधिनियम का विरोध कोरी रजनीति

नागरिकता संशोधन अधिनियम का विरोध कोरी राजनीतिडॉ शोभा भारद्वाज‘अनेक बुद्धिजीवी जिनमें मुस्लिम भी शामिल हैं ’नें मुस्लिन समाज को समझाने की कोशिश की है नागरिकता संशोधन विधेयक का किसी भी भारतीय की नागरिकता से कोई सम्बन्ध नहीं है फिर भी विरोध प्रदर्शन के बहाने तोड़फोड़ हिंसा क्यों ?मुस्लिम समाज कई राजनीतिक



गुनगुनाह ट

कविता गुनगुनाहट क्या तुम्हारी रगों में अपने भारत की मिट्टी से सुगंधित रक्त नहीं बहता ,क्या यहां के खेतों में उगा सोना तुम्हारे सौंदर्य में व्रद्धि नहीं करता ,क्या यहां की नदियां , झरने और दूर - दूर तक फैले हरे - भरे मैदान तुम्हारे अन्दर के संगीत का कारण नहीं बनते ,क्या उंचे - उंचे पेड़ों से सज्जित ह



आसान हिन्दी  [?]
तीव्र हिंदी  [?]
ऑनस्क्रीन कीबोर्ड  [?]
हिन्दी टाइपिंग  [?]
डिफ़ॉल्ट कीबोर्ड  [?]

(फोन के लिए विकल्प)
X
1 2 3 र्4 ज्ञ5 त्र6 क्ष7 श्र8 (9 )0 --   =
q w e r t y u i o p [   ]
a s d िfि g h  j k l ; '  \
  z x c  v  b n m ,, .. ?/ एंटर
शिफ्ट                                                         शिफ्ट बैकस्पेस
x