की



भारत की सोंधी-मिट्टी

भारत की सोंधी-मिट्टी, हम सब का श्रृंगार है,हम सब देशवासियों का यह सुन्दर संसार है I नहीं चाहिए हीरे-मोती, और ना ही चांदी-सोना,नहीं विदेशी शैया पर हमें अपनी नींदें खोना,देश हमारा सिंधु स्वर्ण का, यही सम्पदा अपार है I देश की खातिर जीना हैदेश की खातिर मरना है क्या खोया क्या पाया छोडो,हमें वतन से प्यार



मन की शांति

मन की शांति पथ है सृजन का, निर्माण का; और इसी के विपरीत अशांति द्वार है विनाश का, विध्वंश का I कुछ छोटे लेकिन कारगर उपायों पर अमल करके मन की शांति प्राप्त की जा सकती है। जीवन की बहुत सी चुनौतियों के मध्य, उलझनों और भटकावों से जूझते हुए मन अशांत रहने लगता है।मन की शांति पाने के लिए प्रयास इसलिए भी आव



बिहार और हिमाचल प्रदेश में राज्यपालों की नियुक्ति | Free Current Affairs PDF Download, Free Current Affairs

प्रश्न-08 अगस्त, 2015 को किसे बिहार राज्य का राज्यपाल नियुक्त किया गया है?(a) राजनाथ कोविंद(b) आचार्य देवव्रत(c) राम नारायण पाल(d) साध्वी त्रिकाल भवन्ताउत्तर-(a)संबंधित तथ्य



साइकिल की कहानी

साइकिल का अविष्कार किसने और  कब  किया , इस पर हमारे  इतिहासकार एकमत नहीं है| पर फिर भी हमको तो  इतिहास के कुछ पन्नों को टटोलना ही था, तो हमें ये जानकारियां मिलती हैं जैसे--"लियोनार्डो दे विन्ची "की पैन्टिन्ग मैं मिली थी साइकिल की पहली डिज़ाइन, यह पैन्टिन्ग बनायीं थी सन १४९२ मैं यानि तक़रीबन ५२० साल



जीने की रस्म

जीने की रस्म कुछ इस तरह, लम्हा-लम्हा निभाई, टुकड़े-टुकड़े बटोरी ज़िन्दगी, तिनका-तिनका सजाई। गोल-गुलाबी-नाज़ुक शीशा, किरच-किरच यूं टूटा, तार-तार की खिसकन हमने, पलकों-पलक उठाई। थककर मीलों-कोसों पीछे,... छूट गई थी बोझिल, पाँव-पाँव वो चलकर मंज़िल, खुद पीछे-पीछे आई। क्या खोया क्या पाया सोचूँ,... मैं आँखें म



12 मई 2015

लडकी क्या है???

लडकी वह है जो किसी शादी मेँ जाने से पहले फेश वॉश फेश स्टिक कॉन्सलर आई शैडो मस्कारा लिपस्टिक लिप ग्लोज लिप पेन्सिल आई लाईनर फेश क्रीम फेश पाउडर काजल ब्लश ऑन नेल पॉलिश बॉडी स्प्रे परफ्यूम और साथ मेँ हील और एक अच्छा सा ड्रेस पहनने के बाद अपनी फ्रेँड से कहे "यार जल्दी जल्दी मेँ मैँने तो कुछ किया ही नहीँ



मेरे शीर्षक की कहानी

मित्रो , मैं आज ही शब्दनगरी से जुड़ जहा थोडा प्रफुलित हूँ वही थोडा ससंकित भी हो गया हूँ क्यों की यहाँ मैंने अपने शीर्षक को नाम दिया "कुछ कुछ मेरे मन की" , मित्रो जब में यह शीर्षक सोचा था तोह कुछ अपने मन की करने को पर जब मैंने शब्दनगरी की सारी ओपचारिक्ताये पूर्ण कर ली तोह ध्यान से देखने पर शीर्षक कु



राजनीति बनाम आम मानसिकता - Arvind kejriwal is not a politician afterall

अरविन्द केजरीवाल और उनकी तथाकथित नैतिकता के ऊपर खूब लिखा-पढ़ा जा रहा है, लेकिन मेरी तरह और भी कई लोगों का स्पष्ट मानना है कि अब वह राजनीति में हैं और उन्हें येन केन प्रकारेण अपनी सत्ता कायम रखनी ही होगी. किन्तु, जब उनके क्रियाकलापों को राजनीति के पैमाने पर तोलने बैठते हैं, तो वह बड़े मजबूर और असफल नजर



देश-गौरव की खातिर खुशियाँ लुटाउँगा - Poem before world cup semi final India Australia, Hindi Kavita

लिखना तो बहुत चाहता हूँ, पर आज नहीं! आज भारत की जीत की दुआ करूँगा फ़रियाद करूँगा यूं तो रहता हूँ दूर हर 'टोटके' से पर आज नहीं! आज रात भर टूटते तारे को देखूँगा आँखें बंद करके बुद-बुदाऊँगा नापसंद करता हूँ इन कमाऊं क्रिकेटरों को पर आज नहीं! आज इन्हें असली 'सैनिक' सोचूंगा बल्ले से बार



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