की



वीरों का बसंत

वीरों का कैसा हो बसंत, कभी किसी ने बतलाया था।पर ऐसा भी बसंत क्या कभी सामने आया था?फूली सरसों मुरझाई है, मौन हुआ हिमाचल है।धरा-व्योम सब पूछ रहे, ये कैसी हलचल है?माँ भारती हुई आतंकित, कुत्सित कुटिल प्रहारो से।स्वर्ग भूमि है नर्क बनी अब, विस्फोटों से अंगारों से।।युद्ध भूमि में नहीं थे वे, जब मौत सामने



सोनी टीवी के ये अन अननोन की बात है में शादी से पहले नैना पर गुस्सा करेंगें समीर

शशि सुमीत प्रोडक्शन द्वारा निर्मित सोनी टीवी के बेहद लोकप्रिय शो ये उन दिनों की बात है के वफादार दर्शक, समीर (रणदीप राय) और नैना (आशी सिंह) की शादी के लिए पूरी तरह तैयार हैं।हालांकि, शादी से पहले शो में दर्शकों के लिए बहुत सारा ड्रामा होगा।हमने पहले नैना और समीर दोनों के



गिलोय के बुखार में चमत्कारी प्रभाव व उपयोग

सामान्यता गिलोय का क्वाथ बुखार एवं अनेक रोगों मे किया जाता है। गिलोय को अमृता, अर्थात कभी ना सूखने वाली बेल कहते है । अंग्रेजी मे इसे tinospora कहते है। गिलोय को अलग अलग भाषा मे गडूची, अमृवल्ली, गूलवेल, मधुपर्णी, कुन्डलिनी आदि नमो से जाना जाता है। गिलोय की बेल जिस पेड़ पर चढ़ती है उस पेड़ के गुण अपन



लौटा माटी का लाल

गूंजी मातमी धुन लुटा यौवन तन सजा तिरंगा लौटा माटी का लाल माटी में मिल जाने को ! इतराया था एक दिन तन पहन के खाकी चला वतन की राह ना कोई चाह थी बाकी चुकाने दूध का कर्ज़ पिताका मान बढाने को ! लौटा माटी का लाल माटी में मिल जाने को !!रचा चक्रव्यूह शिखंडी शत्रु ने छुपके घात लगाई कु



चालीस शहीद

जदों चाली जवानां दी अर्थी उठा के चलनगेमोदी राहुल केजरीवाल सब हुमहुमा के चलनगेचलनगे नाल नाल दोस्त दुशमन सारे वखरी ऐ गल कि अंदरो अंदरी गुर्राकेचलनगेरहीयां होन भावें परिवार दे तन तेंलीरां जख्मी बैडां ते ही मुआवजा चैक थमाके चलनगेकुछ फसली बटेरे इमरान हाफिज दे पोस्टर जलाके चलनगेविशेषज्ञ चैनल



'दादी' के आते ही घर-आंगन से रूठा वसंत लौट आया ...

हम चार मंजिला बिल्डिंग के सबसे निचले वाले माले में रहते हैं। यूँ तो सरकारी मकानों में सबसे निचले वाले घर की स्थिति ऊपरी मंजिलों में रहने वाले लागों के जब-तब घर-भर का कूड़ा-करकट फेंकते रहने की आदत के चलते कूड़ेदान सी बनी रहती है, फिर भी यहाँ एक सुकून वाली बात जरूर है कि बागवानी के लिए पर्याप्त जगह न



मैं तेरे साथ जी न सका ,अकेला मर तो सकता हूँ

मैं तेरे साथ जी नहीं सका, अकेलामर तो सकता हूँ डॉ शोभा भारद्वाज रिसेटेलमेंट कालोनी के छोटेप्लाट में बने चार मंजिला घर में हा –हाकार मचा था उस घर के जवान बेटे ने फांसीलगा ली थी घर का कमाऊ बेटा तीन भाई पाँच बहनों का भाई अंधे पिता ,बीमार माँ कासहारा जिसने भी सुना हैरान रह गया फांसी के बाद लम्बी गर्दन



11 फरवरी 2019

केवल OnePlus और Google द्वारा निर्मित सभी स्मार्टफोन Android OS के नवीनतम संस्करण के साथ भेजा गया, रिपोर्ट

एक नई रिपोर्ट के अनुसार केवल दो ब्रांड Google और OnePlus, Android OS के नवीनतम संस्करण के साथ अपने सभी Smartphone मॉडल को बाजार में उपलब्ध कराया। TechARC द्वारा किये गए बाजार अनुसंधान के अनुसार पिछले साल विभिन्न original equipment manufacturers द्वारा स्मार्टफोन के 32 मॉ



तीर्थ राज प्रयाग राज में महापर्व अर्द्ध कुम्भ स्नान

तीर्थ राज प्रयाग राज में महा पर्व अर्द्ध कुम्भ स्नान डॉ शोभा भारद्वाज पुराणों में वर्णित पोराणिक कथाओं के अनुसार देवताओं एवं दानवों ने मिल के समुद्र मंथन किया था तय था समुद्र मंथन से जो रत्न निकलेंगे दोनों पक्ष मिल कर बाँट लेंगे मन्दराचल पर्वत को मथनी बनाया भगवान विष्णु ने कच्छप अवतार धारण कर समुद्र



मन का भंवर

मन का भंवर अकस्मात मीनू के जीवन में कैसी दुविधा आन पड़ी????जीवन में अजीव सा सन्नाटा छा गया.मीनू ने जेठ-जिठानी के कहने पर ही उनकी झोली में खुशिया डालने के लिए कदम उठाया था.लेकिन .....पहले से इस तरह का अंदेशा भी होता तो शायद .......चंद दिनों पूर्व जिन खावों में डूबी हुई थी,वो आज दिवास्वप्न सा ल



वकील, लॉयर, बैरिस्टर, एटॉर्नी जनरल, सॉलिसिटर जनरल में जानिए क्या है मुख्य अन्तर ?

हम समाचारों के माध्यम से कई बार सुनते और पढते हैं कि अमुख आरोपी के वकील ने कोर्ट में दी दलील या फिर राज्य सरकार बनाम अमुख कंपनी के लिए लोक अभियोजक ने रखा पक्ष या एटॉर्नी जनरल कोर्ट में हुए पेश तो ये लोग आखिर कौन हैं? और इनकी क्या क्या योग्यताएं हैं ? हम अपने पाठकों के लिए आज ऐसे ही शब्दावलियों को ले



सपने की हकीकत

कल रात को मैंने एक सपना देखा भीड़ भरे बाज़ार में नहीं कोई अपना देखा मैंने देखा एक घर की छत के नीचे कितनी अशांति कितना दुख और कितनी सोच मैंने देखा चेहरे पे चेहरा लगाते हैं लोग ऊपर से हँसते पर अंदर से रोते हैं लोग भूख, लाचारी, बीमारी, बेकारी यही विषय है बात का आँख खुली तो देखा यह सत्य है सपना नहीं रात



दास्तां हकीकत की

बयाँ मैं ये हकीकत कर रहा हूँ मैं धीरे धीरे हर पल मर रहा हूँ तुझे कमियाँ नज़र आतीं हैं मुझमें मुझे लगता है मैं बेहतर रहा हूँ ख़ुदा जाने मिलेंगी मंजिलें कब मैं ख़ुद में हौसला तो भर रहा हूँ नहीं अब ज़िन्दगी से कोई निस्बत मैं आती मौत से भी डर रहा हूँ ये बुत अब भी गवाही दे रहे हैं मैं अपने वक़्त का आ



अभिनेता नसीरूद्दीन शाह अपने देश में डरे हुये हैं

अभिनेता नसीरुद्दीन शाह अपने देश में डरे हुए हैं ?डॉ शोभा भारद्वाज वह आज के भारत में अपने बच्चों को लेकर बहुत डरे हुए हैं. ''मुझे इस बात का डर लगता है कि कहीं मेरेबच्चों को भीड़ ने घेर लिया और उनसे पूछा कि तुम हिंदू हो या मुसलमान? मेरे बच्चों के पास इसका कोई जवाब नहीं होगा. क्योंकि मैंने मेरेअनुसार अ



"गीतिका" अभी है आँधियों की ऋतु रुको बाहार हो जाना घुमाओ मत हवाओं को अजी किरदार हो जाना

मापनी-1222 1222 1222 1222, समान्त- आर का स्वर, पदांत- हो जाना"गीतिका"अभी है आँधियों की ऋतु रुको बाहार हो जानाघुमाओ मत हवाओं को अजी किरदार हो जानावहाँ देखों गिरे हैं ढ़ेर पर ले पर कई पंछीउठाओ तो तनिक उनको सनम खुद्दार हो जाना।।कवायत से बने है जो महल अब जा उन्हें देखोभिगाकर कौन रह पाया नजर इकरार हो जाना



"गज़ल" जिंदगी के दिन बहुत आए हँसा चलते बने थे नैन सूखे कब रहे की तुम रुला चलते बने थे

बह्र- 2122 2122 2122 2122 रदीफ़- चलते बने थे, काफ़िया- आ स्वर"गज़ल" जिंदगी के दिन बहुत आए हँसा चलते बने थेनैन सूखे कब रहे की तुम रुला चलते बने थेदिन-रात की परछाइयाँ थी घूरती घर को पलटकरदिन उगा कब रात में किस्सा सुना चलते बने थे।।मौन रहना ठीक था तो बोलने की जिद किये क्योंकाठ न था आदमी फिर क्यों बना चलते



सविता भाग दो

2013 savita doosara bhag होली के रंग जीवन के संग। सर में पड़ा सूखारंग, नहाते वक्त ही बताता है कि मै कितना चटकीला हूँ। पानी की धार के साथ शरीरके हर अंग मे अपनी दस्तक की खबर के तार को बिछाता। उस समय यह अनुमान लगाना मुश्किलहो जाता है कि यह किसका रंग हैं? फाल्गुन का महिना आधा होचला था। चटकीले रंग फीके हो



सविता

सविता अपने बचपन की सारी खुशीयों को अपने माँबाप के साथ नही बाँट पाई। गाँव को समझ नही पाई, चाँद तारों की छाव में उनकीठंडक को भाँप नही पाई, चन्द सवाल ही पूछ पाती कि चंदा मामा कितनीदूर है? गोरी कलाइयों में बंधे दूधिया तागे कमजोर पड़ गए थे| पैरो में पड़ी पाज़ेब की खनक छनक से अपने नानी नाना के दिल को मोहने ल



न दैन्यं न पलायनम्

ओजस्वी औरसंवेदनशील कवि, महान राजनीतिज्ञ श्री अटल बिहारी वाजपेयी जी के जन्मदिवस परउभिन की दो रचनाओं के साथ समर्पित हैं श्रद्धा सुमन – इस महान युग पुरुष को… न दैन्यं न पलायनम्कर्तव्य के पुनीत पथ को हमने स्वेद से सींचा है, कभी-कभी अपने अश्रु और प्राणों का अर्ध्य भी दिया है |किंतु, अपनी ध्येय-यात्रा में



धुप

दौड़ भागकर सारा दिन थकी उचक्की धुपआँगन में आ पसर गई कच्ची पक्की धुप सारा दिन ना काम किया रही बजती झांझ लेने दिन भर का हिसाब आती होगी साँझ याद दिलाया तो रह गई हक्की-बक्की धुपआँगन में आ, पसर गई कच्ची पक्की धुप अम्मा ले के आ गई पापड़, बड़ी, अचार ले ना आये खिचड़ी, समझ के



आसान हिन्दी  [?]
तीव्र हिंदी  [?]
ऑनस्क्रीन कीबोर्ड  [?]
हिन्दी टाइपिंग  [?]
डिफ़ॉल्ट कीबोर्ड  [?]

(फोन के लिए विकल्प)
X
1 2 3 र्4 ज्ञ5 त्र6 क्ष7 श्र8 (9 )0 --   =
q w e r t y u i o p [   ]
a s d िfि g h  j k l ; '  \
  z x c  v  b n m ,, .. ?/ एंटर
शिफ्ट                                                         शिफ्ट बैकस्पेस
x