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The Best Inspirational Hindi Poetry Blog - अर्चना की रचना : Preview "ज़िन्दगी एक शतरंज"

ज़िन्दगी एक शतरंज की बिसात सी चलती रहीकिसी के शह पे किसी की मात होती रहीबिछा रखे थे एहसासों के मोहरेंएक राजा को बचाने के लिएऔर एक एक कर केउन मोहरों की ज़िन्दगी कुर्बान होती रहीये खेल बहुत अलग सा हैकोई न जानेकिस की चाल में क्या छिपा हैदिमाग वाले तो जीत गए औरदिलजलों की हार हो



"Archana Ki Rachna" Best blog for Hindi poetry based on different shades of life. : Preview "ख्वाब और हक़ीक़त"

जो चाहूँ वो पाऊँतो कैसा हो?ख्वाब और हक़ीक़त अगर एक सा हो?न कोई खौफ हो दिल में तुमसे बिछड़ने का तू हर लम्हा सिर्फ मेरा हो मैं हर शाम करूँ इंतज़ार तेरा बन संवर के मेरे सिवा तेरा कोई और पता न हो बैठ बगीचे में निहारा करे उन दो फूलों को जिन्हे हमने अपने प्यार से सींचा हो तेरी सिगर



"Archana Ki Rachna" A Hindi Poetry Blog based based on life. : Preview "धुंध "

तुझ में उलझा हूँ इस कदर केअब कुछ भी सुलझता नहीं हर तरफ एक धुंध सी हैजो तेरे जातेकदमो से उठी है इसमें जीने की घुटनको मैं बयां कर सकता नहींहर जरिया बंद कर दियातुझ तक पहुंचने कापर एक तेरे ख्यालको कोई दरवाज़ारोक पाता नहींमैं जानता हूँ के तून आएगा अब कभीमेरा हाल भी पूछने क



Archana Ki Rachna: Preview ""पिता ""

लोग कहते हैं , मैं अपने पापा जैसे दिखती हूँ,एक बेटे सा भरोसा था उनको मुझपरमैं खुद को भाग्यशाली समझती हूँ।मैं रूठ जाती थी उनसे, जब वो मेरे गिरने पर उठाने नहीं आते थेपर आज समझती हूँ , वो ऐसा क्यों करते थेआज मैं अपने पैरों पे हूँ , उसी वजय सेदे कर सहारा वो मुझे हमेशा के लि



Archana Ki Rachna: Preview "कुछ कही छूट गया मेरा "

तुम अपना घर ठीक सेढूंढना ,कुछ वहींछूट गया मेराढूंढ़ना उसे , अपने किचन मेंजहाँ हमने साथ चाय बनाई थीतुम चीनी कम लेते होये बात तुमने उसे पीने के बाद बताई थीउस गरम चाय की चुस्की लेकरजब तुमने रखा था दिल मेरातुम अपना किचन ठीक सेढूंढना , कुछ वही छूट गया मेराढूंढना उसे , उस परदे



Archana Ki Rachna: Preview "तेरी याद "

मैंने घर बदला औरवो गलियाँ भी फिर भी तेरी याद अपने संग इस नए घर में ले आया एक मौसम पार कर मैं फिर खड़ी हूँ, उसी मौसम की दस्तक पर, वही गुनगुनाती ठंड और हलकी धुंध,जिसमे कभी तू मुझे आधी रात मिलने आया वो एक पल में मेरा बेख़ौफ़ हो कुछ भी कह जाना ,और फिर तुझे अजनबी जान कसमसा जाना



Archana Ki Rachna: Preview "नियति का खेल "

जब हम बुरे समय सेगुजरते हैं अपने ईश्वर को यादकरते हैं सब जल्दी ठीक हो जाये यही फरियाद करते हैं भूल कर उस ईश्वरका जीवन संघर्ष हम सिर्फ अपनी बातकरते हैंचलो आओ याद दिलातीहूँ एक रोचक बातजो तुम सब को भी है यादजब उस ईश्वर नेअवतार लिया धरती पेतो वो भी दर्द से अछूता न थाकहने को



Archana Ki Rachna: Preview "पुनर्विचार"

क्या कोई अपने जीवन सेकिसी और के कारणरूठ जाता है ? के उसका नियंत्रण खुद अपने जीवनसे झूट जाता है? हां जब रखते हो,तुम उम्मीद किसीऔर से,अपने सपने को साकार करने कीतो वो अक्सर टूट जाता हैजब भरोसा करते हो किसी पेउसे अपना जान कर,खसक जाती हैपैरों तले ज़मीन भीजब वो "अपना"अपनी मत



Archana Ki Rachna: Preview "नव प्रभात "

रात कितनी भी घनी हो सुबह हो ही जाती है चाहे कितने भी बादलघिरे होसूरज की किरणें बिखरही जाती हैंअंत कैसा भी होकभी घबराना नहींक्योंकि सूर्यास्त का मंज़रदेख कर भीलोगो के मुँह सेवाह निकल ही जाती हैरात कितनी भी घनी होसुबह हो ही जाती हैअगर नया अध्याय लिखना होतो थोड़ा कष्ट उठाना ह



Archana Ki Rachna: Preview "बदला हुआ मैं "

जब भी अपने भीतर झांकता हूँ खुद को पहचान नहीं पाता हूँ ये मुझ में नया नया सा क्या है ?जो मैं कल था , आज वो बिलकुल नहींमेरा वख्त बदल गया , या बदलाअपनों ने हीमेरा बीता कल मुझे अब पहचानता, क्या है ? मन में हैं ढेरो सवालशायद जिनके नहीं मिलेंगे अ



Archana Ki Rachna: Preview "कुछ दिल की सुनी जाये "

चलो रस्मों रिवाज़ों को लांघ करकुछ दिल की सुनी जाये कुछ मन की करी जाये एक लिस्ट बनाते हैं अधूरी कुछ आशाओं कीउस लिस्ट की हर ख्वाहिश एक एक कर पूरी की जाये कुछ दिल की सुनी जाये कुछ मन की करी जाये कोई क्या सोचेगा कोई क्या कहेगा इन बंदिशों से परे हो के थोड़ी सांसें आज़ाद हवा मे



Archana Ki Rachna: Preview "उमीदों का खेल"

क्या ज़्यादा बोझिल है जब कोई पास न हो या कोई पास हो के भीपास न हो ?कोई दिल को समझा लेता है क्योंकि,उसका कोई अपनाहै ही नहींपर कोई ये भुलाये कैसेजब उसका कोई अपनासाथ हो के भी साथ न होजहाँ चारो ओर चेहरोंकी भीड़ हो अपनापन ओढ़ेअपनी ज़रूरत पर सब दिखेपर गौर करना, जब तुमने पुकारातो



Archana Ki Rachna: Preview "गाडी के दो पहिए"

मैं स्त्री हूँ , और सबकासम्मान रखना जानती हूँ कहना तो नहीं चाहतीपर फिर भी कहना चाहती हूँ किसी को ठेस लगे इस कविता सेतो पहले ही माफ़ी चाहती हूँ सवाल पूछा है और आपसेजवाब चाहती हूँक्या कोई पुरुष, पुरुष होने का सहीअर्थ समझ पाया हैया वो शारीरिक क्षमता को हीअपनी पुरुषता समझ



Archana Ki Rachna: Preview " वो पुराना इश्क़ "

वो इश्क अब कहाँ मिलता है जो पहले हुआ करता था कोई मिले न मिलेउससे रूह का रिश्ताहुआ करता थाआज तो एक दँजाहीसी सी है,जब तक तू मेरी तब तक मैं तेराशर्तों पे चलने की रिवायतसी है ,मौसम भी करवट लेने से पहलेकुछ इशारा देता हैपर वो यूं बदला जैसे वो कभीहमारा न हुआ करता थामोहब्बत में



Archana Ki Rachna: Preview "तेरा तलबगार "

जाओ अब तुम्हारा इंतज़ार नहीं करूंगीके अब खुद को मायूस बार बार नहीं करूंगीबहुत घुमाया तुमने हमें अपनी मतलबपरस्ती मेंके अब ऐसे खुदगर्ज़ से कोई सरोकार नहीं रखूंगीरोज़ जीते रहे तुम्हारे झूठे वादों कोके अब मर के भी तुम्हारा ऐतबार नहीं करूंगीतरसते रहे तुझसे एक लफ्ज़ " मोहब्बत "



Archana Ki Rachna: Preview "किराये का मकान "

बात उन दिनों की है जब बचपन में घरोंदा बनाते थे उसे खूब प्यार से सजाते थे कही ढेर न हो जायेआंधी और तूफानों में उसके आगे पक्की दीवारबनाते थेवख्त गुज़रा पर खेल वहीअब भी ज़ारी हैबचपन में बनाया घरोंदाआज भी ज़ेहन पे हावी हैघर से निकला हूँकुछ कमाने के लिएथोड़ा जमा कर कुछ ईंटेंउस बचप



Archana Ki Rachna: Preview "रुक्मणि की व्यथा "

श्याम तेरी बन केमैं बड़ा पछताईन मीरा ही कहलाई न राधा सी तुझको भायी श्याम तेरी बन केमैं बड़ा पछताईन रहती कोई कसकमन मेंजो मैं सोचती सिर्फअपनी भलाईश्याम तेरी बन केमैं बड़ा पछताईसहने को और भीगम हैंपर कोई न लेना पीरपरायीश्याम तेरी बन केमैं बड़ा पछताईन कोई खबर न कोईठोर ठिकानाबहुत



Archana Ki Rachna: Preview "सपने "

सपने हमें न जानेक्या क्या दिखा जाते हैं हमें नींदों में न जानेकैसे कैसे अनुभव करा जाते हैंकभी कोई सपना यादरह जाता है अक्सरकभी लगता है ये जोअभी हुआ वो देखा साहै कही परसिर्फ एक धुंधली तस्वीरसे नज़र आते हैंसपने हमें न जानेक्या क्या दिखा जाते हैंकुछ सपने सजीलेऔर विरले भी होते



जिस घर मात पिता खुश रहते,'लावणी छन्द'

प्रतिमाओं का पूजन करने,हम मंदिर में जाते हैं।जिस घर मात-पिता खुश रहते,उस घर ईश्वर आते हैं।असर दुआ में इतना इनकी,बाधाएँ टल जाती है।कदमों में खुशियाँ दुनिया की सारी चलकर आती है।पालन करने स्वयं विधाता घर में ही बस जाते हैं।जिस घर मात-पिता खुश रहते,उस घर ईश्वर आते हैं।।इस जीवन में कर्ज कभी भी चुका नहीं



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