आचरण

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आरम्भ है यह अंत का

आरम्भ है यह अंत का -अंत की घड़ी है अब ना तुम्हारी ना ही हमारी सब की अंतिम कड़ी है अबजीने के ही नहीं ,मारने के भी अलग अलग ढंग है अब अंत की कड़ी है अब जीवन मरण की अंतिम कड़ी है अब आत्म दान का समय है यही है उचित ,सृष्टि चक्र थमने का समय यही सही यही उचित महा प्रस्थान का



चरित्र का चीरहरण

झूठा सम्मान पाने के लिए ,मैंने कभी चरित्र की इमारत नहीं खड़ी की; लोगों को दिखाने के लिए, मैंने कभी चरित्र की खांट नहीं बुनी;धन कमाने के लिए,मैंने



सुविचार

*आचरण-आभूषण**विप्राणां भूषणं विद्या पृथिव्या भूषणं नृपः* ।*नभसो भूषणं चन्द्रः शीलं सर्वस्य भूषणम्* ॥जिस प्रकार एक *विप्र का आभूषण विद्या है, पृथ्वी का आभूषण राजा है, आकाश का आभूषण चन्द्र है उसी प्रकार इस समस्त चराचर जगत का आभूषण सदाचार* है ।जिस प्रकार *प्रकृति का स्पष्ट नियम है दान देना , उसके बद





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