आलेख



हिंदी अध्यापक संघ मुंबई विभाग द्वारा महात्मा गाँधी जयंती के अवसर पर आयोजित वेब संगोष्ठी

महाराष्ट्र राज्य कनिष्ठ महाविद्यालय हिंदी अध्यापक संघ मुंबई विभाग द्वारामहात्मा गाँधीजी की जयंती के उपलक्ष्य में वेबसंगोष्ठी का आयोजन" महाराष्ट्र राज्य कनिष्ठ महाविद्यालय हिंदी अध्यापक संघ मुंबई विभाग द्वारा 'महात्मा गाँधीजी जयंती व शास्त्री जयंती के अवसर पर वेबसंगोष्ठी का आयोजन दिनांक 2 अक्टूब



असहिष्णुता....

असहिष्णुता….मनुष्य के जीवन में उसके व्यक्तित्व और सोच-विचार पर खान-पान व रहन-सहन का बहुत असर पड़ता है। कहा जाता है जैसा खान-पान, वैसा अचार-विचार। अर्थात सादा जीवन, सादा भोजन - उच्च विचार। जिस तरह से फसल को समय-समय से सींचा जाता है, खाद-पानी दिया जाता है तो उसका समुचित विकास होता है। जिसका उचित देखभाल



विश्व पटलपर हिंदी साहित्य

सुखमंगल सिंहविश्व पटलपर हिंदी साहित्य-सुखमंगल सिंह हिंदी साहित्य के व्यापक इतिहासों में विशेष कर हिंदी साहित्य का इतिहास आचार्य रामचंद्र शुक्ल,हिंदी साहित्य का बृहद इतिहाससोलह भाग,मिश्रबंधु विनोद,हिंदी साहित्य का आलोचनात्मक इतिहास जैसे ग्रंथों में मान्यता प्राप्त कर स



पैसा बहुत कुछ तो है पर सबकुछ नहीं है....

पैसा बहुत कुछ तो है पर सबकुछ नहीं है…..मनुष्य स्वभाव से ही बहुत लालची और महत्त्वाकांक्षी होता है। अर्थ, काम, क्रोध, लोभ और माया के बीच इस तरह फँसता है कि बचकर निकलना मुश्किल हो जाता है। यह उस दलदल के समान है जिसमें से जितना ही बाहर निकलने का प्रयास किया जाता इंसान उस दलदल में और फँसता जाता है। इस सं



"मेरा बचपन"

"मेरा बचपन"सशक्त समाज बनाना उत्प्रेरित विचार लाना।शिक्षा समृद्धि अपनाना नव कौशल है दिखाना।समाज को भी जगानाबचपन बनाना बचाना । बचपन जीवन का आधार सिद्धांत पर आधारित एक शानदार अभिनय की शुरुआत करने की मुहिम का स्वागत स्तंभ में से एक है। बचपन ,जौ - गेहूं की भाँती दुःख - सुख निर्मित जीवन मूल्यों क



भाषा संस्कृत और अशोक का शिलापट्ट

भाषाओं की विचित्र स्थिति समझाने समझाने वाली है। समय के अनुसार भाषा में अभिव्यक्ति की आजादी का स्वागत किया जाता रहा है। भारत में विभिन्न मतावलंबी हुए मत धर्म का प्रचार अभियान चलाया जाता रहा है। अशोक के शिलालेख जो ईसा के पूर्व तीसरी शताब्दी के मिले वे उत्तरी भारत के लिए आवश्यक और महत्व पूर्ण अमूल्य ध



धर्म की आस्था पर हम सभी एक हैं

"धर्म की आस्था पर हम सभी एक हैं"धर्म की आस्था पर हम उड़े तो क्या हुआ ,कबूतरों के पंख इस तरह काटे नहीं जाते |यूं देखा जाय तो यह कटु सती है कि पूरा देश धर्मांधता और दुराग्रह के वातावरण की आंधी मेन फंस कर रह गया है | हाथवादियों और धर्मांध शक्तियों को खुश करने की नीति के क



उत्तरायण उत्सव (मकर संक्रांति)

यह सत्य है कि मनुष्य के जीवन की दिशा और दशा में परिस्थितियों का बहुत बड़ा योगदान होता है। लेकिन खुशियों का संबंध मनुष्य की प्रकृति और उसके दृष्टिकोण से होता है। जीवन प्रतिपल परिवर्तित होता है। प्रत्येक दिन नवीन चीजें घटित होती हैं। नवीनता का बोध होना आवश्यक है। उससे भ



पशुओं से बलात्कार : एक मानसिक विकार

अगर मैं कहूं कि बलात्कार एक मानुषिक प्रवृत्ति है तो शायद आप इसे मनुष्य का अपमान समझेंगे। लेकिन अगर आप इसे पाशविक प्रवृत्ति कहेंगे तो यह पशु का अपमान होगा, क्योंकि कोई पशु बलात्कार नहीं करता।नवजातों से, नाबालिगों से, युवतियों से, वृद्धाओं से, यहां तक कि लाशों से बलात्कार की खबरें आती रही हैं। अभी हाल



दिशाहीन छात्र राजनीति

*दिशाहीन छात्र राजनीति*राष्ट्र के रचनात्मक प्रयासों में किसी भी देश के छात्रों का अत्यन्त महत्वपूर्ण योगदान होता है। समाज के एक प्रमुख अंग और एक वर्ग के रूप में वे राष्ट्र की अनिवार्य शक्ति और आवश्यकता हैं। छात्र अपने राष्ट्र के कर्णधार हैं, उसकी आशाओं के सुमन हैं, उसकी आकांक्



प्राकृतिक आपदाएं : कितनी प्राकृतिक, कितनी मानवीय

प्राकृतिक आपदाएं:- कितनी प्राकृतिक कितनी मानवीय सभी आपदा मनुष्य द्वारा उत्पन्न माने जा सकते हैं। क्योंकि कोई भी खतरा विनाश में परिवर्तित हो, इससे पहले मनुष्य उसे रोक सकता है। सभी आपदाएं मानवीय असफलता के परिणाम हैं। मानवीय कार्य से निर्मित आपदा लापरवाही, भूल या व्यवस्था की असफलता मानव-निर्मित आपदा क



अनुशासन का महत्व:क्या और



अनुशासन का महत्व:क्या और



कौन होगा अगला पीएम

इन चार वर्षो के दौरान कई राज्यों में विभिन्न चुनाव हो गये. कही भाजपा ने बहुमत पाई तो कही बिना बहुमत के ही जोड़तोड़ कर सरकार बनाई. लेकिन सबसे अहम् वर्ष 2019 का लोकसभा चुनाव होगा और सभी की निगाहे अबकी बनने वाली सरकार और प्रधानमंत्री पर टिकी है. शायद इसबार भाजपा की सरकार और मो



अब जनता मांगे हाईकोर्ट बेंच मेरठ

मुंबई हाईकोर्ट की एक खडपीठ कोल्हापुर में बनने का रास्‍ता साफ हो गया है. कोल्‍हापुर खंडपीठ के लिए महाराष्‍ट्र सरकार कैबिनेट ने मंजूरी दे दी है. इसके साथ ही सरकार खंडपीठ के लिए 1120 करोड़ रुपये भी प्रदान करेगी. जिसे खंडपीठ की इमारत निर्माण और विभिन्‍न व्‍यवस्‍थाओं



पारिवारिक निपटान आलेख और मानस जायसवाल

मेरे पूर्व आलेख ' 'मेमोरेंडम ऑफ़ फॅमिली सेटलमेंट-पारिवारिक निपटान के ज्ञापन का महत्व '' को लेकर पाठकों की उत्साहवर्धक टिप्पणी प्राप्त हुई लेकिन इसके साथ ही एक पाठक ''श्री मानस जायसवाल'' जी के तो कई प्रश्न थे जिनके निवारण हेतु मैं एक नयी पोस्ट आप सभी से साझा कर रही हू



हिंदी बलागिंग

हिंदी ब्लॉग्गिंग आज लोकप्रियता के नए नए पायदान चढ़ने में व्यस्त है .विभिन्न समाचार पत्र-पत्रिकाओं की तानाशाही आज टूट रही है क्योंकि उनके द्वारा अपने कुछ चयनित रचनाकारों को ही वरीयता देना अनेकों नवोदित कवियों ,रचनाकारों आदि को हतोत्साहित करना होता था और अनेकों को गुमनामी के अंधेरों में धकेल देत



निस्पृह भाव व अकाम कर्म प्राप्ति की सबसे बड़ी बाधा ही ईश्वर है...!

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हिंदी साहित्य को सैयद गुलाम नबी ‘रसलीन’ का प्रदेय

[1] भारतीय संस्कृति की आत्मा इस देश की विविध भाषाओं के माध्यम से अभिव्यक्ति प्राप्त करती है। भारत की सभी भाषाएँ और उनकी साहित्यिक विरासत सबकी साझी संपदा है और उसे सभी देशवासियों ने समृद्ध किया है, चाहे वे हिंदू हों या मुसलमान या किसी अन्य धर्म-संप्रदाय के अनुयायी। इनमें



क्या नारीशक्ति यथार्थ है

नारी सशक्त हो रही है .इंटर में लड़कियां आगे ,हाईस्कूल में लड़कियों ने लड़कों को पछाड़ा ,आसमान छूती लड़कियां ,झंडे गाडती लड़कियां जैसी अनेक युक्तियाँ ,उपाधियाँ रोज़ हमें सुनने को मिलती हैं .किन्तु क्या इन पर वास्तव में खुश हुआ जा सकता है ?क्या इसे सशक्तिकरण कहा जा सकता है ? नहीं .....................



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