shabd-logo

आलेख

hindi articles, stories and books related to aalek


featured image

युवा शक्ति के प्रेरक और आदर्श स्वामी विवेकानंद (राष्ट्रीय युवा दिवस)स्वामी विवेकानंद भारतीय आध्यात्मिकता और जीवन दर्शन को विश्वपटल पर स्थापित करने वाले नायक हैं। भारत की संस्कृति, भारतीय जीवन मूल्यों और उसके दर्शन को उन्होंने ‘विश्व बंधुत्व व मानवता’ स्थापित करने वाले विचार के रूप में प्रचारित किया।

featured image

'कोरोना का खतरा अभी टला नहीं है'कोरोना का खतरा अभी टला नहीं है। जहाँ एक तरफ दावा किया जा रहा था कि अब कोरोना का खात्मा होने को आया है और सबकुछ खोल दिया गया, भले ही कुछ शर्तें रख दी गई। हमेशा सरकार प्रशासन सूचना जारी करने तक को अपनी जिम्मेदारी मानती है और उसीका निर्वहन करती है। जैसे सिगरेट के पैकेट प

featured image

महाराष्ट्र राज्य कनिष्ठ महाविद्यालय हिंदी अध्यापक संघ मुंबई विभाग द्वारामहात्मा गाँधीजी की जयंती के उपलक्ष्य में वेबसंगोष्ठी का आयोजन" महाराष्ट्र राज्य कनिष्ठ महाविद्यालय हिंदी अध्यापक संघ मुंबई विभाग द्वारा 'महात्मा गाँधीजी जयंती व शास्त्री जयंती के अवसर पर वेबसंगोष्ठी का आयोजन दिनांक 2 अक्टूब

असहिष्णुता….मनुष्य के जीवन में उसके व्यक्तित्व और सोच-विचार पर खान-पान व रहन-सहन का बहुत असर पड़ता है। कहा जाता है जैसा खान-पान, वैसा अचार-विचार। अर्थात सादा जीवन, सादा भोजन - उच्च विचार। जिस तरह से फसल को समय-समय से सींचा जाता है, खाद-पानी दिया जाता है तो उसका समुचित विकास होता है। जिसका उचित देखभाल

featured image

सुखमंगल सिंहविश्व पटलपर हिंदी साहित्य-सुखमंगल सिंह हिंदी साहित्य के व्यापक इतिहासों में विशेष कर हिंदी साहित्य का इतिहास आचार्य रामचंद्र शुक्ल,हिंदी साहित्य का बृहद इतिहाससोलह भाग,मिश्रबंधु विनोद,हिंदी साहित्य का आलोचनात्मक इतिहास जैसे ग्रंथों में मान्यता प्राप्त कर स

पैसा बहुत कुछ तो है पर सबकुछ नहीं है…..मनुष्य स्वभाव से ही बहुत लालची और महत्त्वाकांक्षी होता है। अर्थ, काम, क्रोध, लोभ और माया के बीच इस तरह फँसता है कि बचकर निकलना मुश्किल हो जाता है। यह उस दलदल के समान है जिसमें से जितना ही बाहर निकलने का प्रयास किया जाता इंसान उस दलदल में और फँसता जाता है। इस सं

"मेरा बचपन"सशक्त समाज बनाना उत्प्रेरित विचार लाना।शिक्षा समृद्धि अपनाना नव कौशल है दिखाना।समाज को भी जगानाबचपन बनाना बचाना । बचपन जीवन का आधार सिद्धांत पर आधारित एक शानदार अभिनय की शुरुआत करने की मुहिम का स्वागत स्तंभ में से एक है। बचपन ,जौ - गेहूं की भाँती दुःख - सुख निर्मित जीवन मूल्यों क

भाषाओं की विचित्र स्थिति समझाने समझाने वाली है। समय के अनुसार भाषा में अभिव्यक्ति की आजादी का स्वागत किया जाता रहा है। भारत में विभिन्न मतावलंबी हुए मत धर्म का प्रचार अभियान चलाया जाता रहा है। अशोक के शिलालेख जो ईसा के पूर्व तीसरी शताब्दी के मिले वे उत्तरी भारत के लिए आवश्यक और महत्व पूर्ण अमूल्य ध

featured image

"धर्म की आस्था पर हम सभी एक हैं"धर्म की आस्था पर हम उड़े तो क्या हुआ ,कबूतरों के पंख इस तरह काटे नहीं जाते |यूं देखा जाय तो यह कटु सती है कि पूरा देश धर्मांधता और दुराग्रह के वातावरण की आंधी मेन फंस कर रह गया है | हाथवादियों और धर्मांध शक्तियों को खुश करने की नीति के क

featured image

यह सत्य है कि मनुष्य के जीवन की दिशा और दशा में परिस्थितियों का बहुत बड़ा योगदान होता है। लेकिन खुशियों का संबंध मनुष्य की प्रकृति और उसके दृष्टिकोण से होता है। जीवन प्रतिपल परिवर्तित होता है। प्रत्येक दिन नवीन चीजें घटित होती हैं। नवीनता का बोध होना आवश्यक है। उससे भ

featured image

अगर मैं कहूं कि बलात्कार एक मानुषिक प्रवृत्ति है तो शायद आप इसे मनुष्य का अपमान समझेंगे। लेकिन अगर आप इसे पाशविक प्रवृत्ति कहेंगे तो यह पशु का अपमान होगा, क्योंकि कोई पशु बलात्कार नहीं करता।नवजातों से, नाबालिगों से, युवतियों से, वृद्धाओं से, यहां तक कि लाशों से बलात्कार की खबरें आती रही हैं। अभी हाल

featured image

*दिशाहीन छात्र राजनीति*राष्ट्र के रचनात्मक प्रयासों में किसी भी देश के छात्रों का अत्यन्त महत्वपूर्ण योगदान होता है। समाज के एक प्रमुख अंग और एक वर्ग के रूप में वे राष्ट्र की अनिवार्य शक्ति और आवश्यकता हैं। छात्र अपने राष्ट्र के कर्णधार हैं, उसकी आशाओं के सुमन हैं, उसकी आकांक्

featured image

प्राकृतिक आपदाएं:- कितनी प्राकृतिक कितनी मानवीय सभी आपदा मनुष्य द्वारा उत्पन्न माने जा सकते हैं। क्योंकि कोई भी खतरा विनाश में परिवर्तित हो, इससे पहले मनुष्य उसे रोक सकता है। सभी आपदाएं मानवीय असफलता के परिणाम हैं। मानवीय कार्य से निर्मित आपदा लापरवाही, भूल या व्यवस्था की असफलता मानव-निर्मित आपदा क

इन चार वर्षो के दौरान कई राज्यों में विभिन्न चुनाव हो गये. कही भाजपा ने बहुमत पाई तो कही बिना बहुमत के ही जोड़तोड़ कर सरकार बनाई. लेकिन सबसे अहम् वर्ष 2019 का लोकसभा चुनाव होगा और सभी की निगाहे अबकी बनने वाली सरकार और प्रधानमंत्री पर टिकी है. शायद इसबार भाजपा की सरकार और मो

featured image

हिंदी ब्लॉग्गिंग आज लोकप्रियता के नए नए पायदान चढ़ने में व्यस्त है .विभिन्न समाचार पत्र-पत्रिकाओं की तानाशाही आज टूट रही है क्योंकि उनके द्वारा अपने कुछ चयनित रचनाकारों को ही वरीयता देना अनेकों नवोदित कवियों ,रचनाकारों आदि को हतोत्साहित करना होता था और अनेकों को गुमनामी के अंधेरों में धकेल देत

आजकल टेलीविजन चैनलों पर एक विज्ञापन खूब आ रहा है- एवरेस्ट मसाला का. इसके ब्रांड एम्बेसेडर महानायक अमिताभ बच्चन हैं. कलाकार हैं; अंडर गार्मेंट का विज्ञापन करें या मसाले का, क्या फ़र्क़ पड़ता है. वैसे भी बच्चन साहब के लिए विज्ञापनों की अहमियत फ़िल्मों से थोड़ी अधिक है क्योंकि विज्ञापन की दुनिया ने ही उन्

"कुछ लोगों को मनसब गूंगा बहरा कर देते हैं, रोटी मंहगी करने वाले जहर को सस्ता कर देते हैं." गुलजार देहलवी की ये पंक्तियाँ हमें रूबरू करा रही हैं उन परिस्थितियों से जो हमारे मीडिया द्वारा बनाये गये, अच्छे दिनों की सोच लाये गये नई - नई जैकिट, कुर्ते व सूट से सजाये

किताब पढ़िए

लेख पढ़िए