खुलासा: कुमकुम भाग्य अभिनेत्री श्रीति झा के रात 4 बजे वाले दोस्त | आई डब्लयू एम बज

प्रतिभाशाली अभिनेत्री श्रीति झा, जो ज़ी टीवी की कुमकुम भाग्य में प्रज्ञा के अपने चरित्र के साथ प्रसिद्धि पाई, ने अपनी एलेगेंस और सुंदरता से दर्शकों के दिलों को पिघला दिया। ज़ी टीवी शो में उनकी प्रमुख भूमिका के बाद से वह एक व्यापक रूप से जानी जाने वाली संस्कारी बहू बन गईं।



ऑन-स्क्रीन दुश्मन ऑफ-स्क्रीन दोस्त: रिया और प्राची का अनोखा बंधन | आई डब्लयू एम बज

भारतीय टेलीविज़न का सबसे पसंदीदा शो कुमकुम भाग्य ने सिर्फ एक छलांग लगाई और जुड़वा बहनें रिया और प्राची ने एक बहुत ही अनोखा बंधन साझा किया। बहनें एक दूसरे के पूरी तरह से विपरीत हैं और साथ ही साथ बहुत दृढ़ता से राय रखती हैं। रिया और प्राची, कुमकुम भाग्य से अभि और प्रज्ञा की



अभी तो सूरज उगा है

अभी तो सूरज उगा है डॉ शोभा भारद्वाज ‘न्यूज नेशन चैनल’ के लिये दीपक चौरसिया जीनें मोदी जी का 10 मई को इंटरव्यू लिया पांचवें चरण के चुनाव हो चुके थे केवलदो चरण बाकी थे |इंटरव्यू में विभिन्नविषयों पर मोदी जी से प्रश्न पूछे गये उन्होंने अपने द्वारा लिखित कविता की कुछपंक्तियाँ भी सुनाई विषय ‘अभी तो सू



"गीतिका" अभी है आँधियों की ऋतु रुको बाहार हो जाना घुमाओ मत हवाओं को अजी किरदार हो जाना

मापनी-1222 1222 1222 1222, समान्त- आर का स्वर, पदांत- हो जाना"गीतिका"अभी है आँधियों की ऋतु रुको बाहार हो जानाघुमाओ मत हवाओं को अजी किरदार हो जानावहाँ देखों गिरे हैं ढ़ेर पर ले पर कई पंछीउठाओ तो तनिक उनको सनम खुद्दार हो जाना।।कवायत से बने है जो महल अब जा उन्हें देखोभिगाकर कौन रह पाया नजर इकरार हो जाना



खबर उत्तरप्रदेश लड़कियां दो

12:50 HRS IST 18 लड़कियां अभी भी लापता, आश्रयगृह सील: देवरिया पुलिस अधीक्षक ।



“गज़ल” अभी सावन वहाँ आया नहीं था

“गज़ल” खड़ा गुलमुहर की छाया नहीं था अभी सावन वहाँ आया नहीं था हवा पूर्बी सरसराने लगी थी मगर ऋतु बर्खा ने गाया नहीं था॥ गली में शोर था झूला पड़ा हैं किसी ने मगर झुलवाया नहीं था॥ घिरी वो बदरिया लागे सुहानी झुके थे नैन भर्भराया नहीं था॥ सखी की टोलकी बहुते सयानी नचाय



तेरा रंग अभी तक बाकी है

अश्क तो हैं तेरी यादों के, मेरे लिए काफ़ी हैं !कुछ गुज़रे दिन इनके सहारे, गुजर जाएँगे जो बाकी हैं !!तेरी तस्वीर थी जो आँखों में, इसमे अब पानी का रंग शामिल है !ये धुंधली सी हो गयी है, बस अब थोडा सा रंग बाकी है !!म



अभी न होगा मेरा अंत

सुधी साथियो, सूर्यकान्त त्रिपाठी 'निराला' हिन्दी कविता के छायावादी युग के चार प्रमुख स्तंभों में से एक माने जाते हैं। अपने समकालीन अन्य कवियों से अलग उन्होंने कविता में कल्पना का सहारा बहुत कम लिया है और यथार्थ को प्रमुखता से चित्रित किया है। निराला जी के प्रमुख काव्यसंग्रह हैं-अनामिका, परिमल, गीति



.........है अभी !

नवीन करने की उमंग रखो, स्वप्नो को पुरा करते रहो।। भुत के भ्रम को देखो नही, भविष्य को भी समझो अभी।।१।। जो हो गया वह फिर नही, आने वाला कल है अभी।।२।। देश भुत मे जा सकता नही,





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