आस्था



जैसी श्रद्धा वैसा फल

एक बार की बात है, हर जीवधारी में भगवान का रूप देखने वाले एकनाथ ने एक प्यासे साधारण से गधे के अंदर भगवान का रूप देखकर उसको गंगाजल पिला दिया। तो साथ चल रहे लोगों ने विरोध करना शुरू किया और आश्चर्य से कहने लगे, ‘महाराज! भगवान शंकर को जो जल चढ़ाना था, वह आप किसको पिला रहे



आस्था

धार्मिक होने का मतलब आस्तिक होना नहीं, नास्तिक होने का मतलब धार्मिक होना नहीं. एक नास्तिक धार्मिक हो सकता है और एक आस्तिक ज़रूरी नहीं की धार्मिक ही हो. धर्म और आस्था दो अलग विषय है. आस्था ईश्वर में होती है , धार्मिक गुरुओं में नहीं.



भस्मासुर

लघुकथाभस्मासुर - अलख निरंजन!- आ जाइए बाबा पेड़ की छाह में। बाबा के आते ही वह हाथ जोड़कर खड़ा हो गया- आज्ञा महाराज। बाबा ने खटिया पर आसन जमाया। बोले- बच्चा, तेरा चेहरा मुरझाया हुआ है। दुःखी लगते हो। दुख का करण बता, बेटा। चुटकी में दूर कर दूंगा। - एक दुख हो तो बताऊं। दुख का बोझ उठाते-उठाते मैं हं



क्या वास्तु दोष के कारण होते हैं महिलाओं एवं पुरुषों के रोग..????

वास्तु शास्त्र के प्रसिद्ध ग्रंथ: समरांगण सूत्रधार, मानसार, विश्वकर्मा प्रकाश, नारद संहिता, बृहतसंहिता, वास्तु रत्नावली, भारतीय वास्तु शास्त्र, मुहूत्र्त मार्तंड आदि वास्तुज्ञान के भंडार हैं। अमरकोष हलायुध कोष के अनुसार वास्तुगृह निर्माण की वह कला है, जो ईशान आदि कोण से आरंभ होती है और घर को विघ्नों



नवदुर्गा और शारदीय नवरात्रि 2019, आपकी राशि अनुसार कौनसी देवी का पूजन, कोनसा भोग लगाएं ?

मां दुर्गा का प्रत्येक स्वरूप मंगलकारी है और एक-एक स्वरूप एक-एक ग्रह से संबंधित है। इसलिए नवरात्रि में देवी के नौ स्वरूप की पूजा प्रत्येक ग्रहों की पीड़ा को शांत करती है।देवी माँ या निर्मल चेतना स्वयं को सभी रूपों में प्रत्यक्ष करती है,और सभी नाम ग्रहण करती है। माँ दुर्गा के नौ रूप और हर नाम में एक



कब और कैसे करें महालय (कनागत या श्राद्ध)वर्ष 2019 में..

भाद्रपद (भादों मास) की पूर्णिमा से प्रारंभ होकर आश्विन मास की अमावस्या तक कुल सोलह तिथियां श्राद्ध पक्ष की होती है। इस पक्ष में सूर्य कन्या राशि में होता है। इसीलिए इस पक्ष को कन्यागत अथवा कनागत भी कहा जाात है। श्राद्ध का ज्योतिषीय महत्त्व की अपेक्षा धार्मिक महत्व अधिक है क्योंकि यह हमारी धार्मिक आस



क्या करें मृत आत्मा की शांति के लिए--

पितृ सदा रहते हैं आपके आस-पास। मृत्यु के पश्चात हमारा और मृत आत्मा का संबंध-विच्छेद केवल दैहिक स्तर पर होता है, आत्मिक स्तर पर नहीं। जिनकी अकाल मृत्यु होती है उनकी आत्मा अपनी निर्धारित आयु तक भटकती रहती है। हमारे पूर्वजों को, पितरों को जब मृत्यु उपरांत भी शांति नहीं मिलती और वे इसी लोक में भटकते रह



क्या पंचकों में अस्थि संचयन हो सकती है ???

अंत‌िम संस्कार का शास्‍त्रों में बहुत वर्णन द‌िया गया है क्योंक‌ि इसी से व्यक्त‌ि को परलोक में उत्तम स्थान और अगले जन्म में उत्तम कुल पर‌िवार में जन्म और सुख प्राप्त होता है। गरुड़ पुराण में बताया गया है क‌ि ज‌िस व्यक्त‌ि का अंत‌िम संस्कार नहीं होता है उनकी आत्मा मृत्‍यु के बाद प्रेत बनकर भटकती है औ



पितृ पक्ष में पूर्वज क्यों आते हैं धरती पर? जानिए इसके बारे में 15 अहम जानकारियां

13 सितंबर से पूरा देश पितृपक्ष मना रहा है और ये पूरे 15 दिनों तक चलेगा इसमें जो हमारे घर के पितर लोग मर जाते हैं तो उनके श्राद्ध का काम चलता है। इस दौरान लोग ब्राह्मण को भोजन कराकर दक्षणा देते हैं और उनसे आशीर्वाद लेते हैं कि उनके पितर लोग जहां भी हैं चैन और खुशी के साथ रहें। शास्त्रों के अनुसार पि



गणेश चतुर्थी विशेष: इन 15 बातों को जानते हैं तभी मनाइए गणपति बप्पा का ये पर्व

2 सिंतबर से देश में गणेश चतुर्थी का पर्व आ रहा है और इस दिन सभी गणेश जी की प्रतिमा स्थापित करते हुए उनकी पूजा करते हैं। ये प्रतिमा लोग अपने गली, मोहल्ले या घर में रखते हैं और 3 दिन, 5 दिन या फिर पूरे 10 दिनों तक इनकी पूजा करने के बाद गंगाजी में प्रवाहित करा दिया जाता है। गणपति बप्पा मोरिया के जयकार



दुर्गा चालीसा : देवी मां की अराधना से दूर होगी सारी बाधाएं || Durga Chalisa

हिंदू धर्म में करोड़ों देवी-देवता हैं लेकिन कुछ को सर्वोच्च माना जाता है। जैसे देवों में देव महादेव शंकर भगवान होते हैं वैसे ही सभी देवियों में दुर्गा मां को उच्च स्थान दिया गया है। सीता, पार्वती, लक्ष्मी, काली सभी इन्ही के अवतार हैं और इन्हें हिंदू धर्म में सर्वोच्च भगवान माना जाता है जिनके आगे ईश्



अचानक पेड़ पर साईं बाबा की ऊभरी आकृति, देखने के लिए लगी भीड़, फिर सामने आया सच

भारत में धर्म व आस्था के प्रति हिन्दुओं की संवेदनशीलता:- हमारे भारत देश के लोगों की भावनाएं भक्ति व धर्म के प्रति काफी संवेदनशील होती हैं। विशेष करके जब कभी धर्म की बात आती है तो भगवान के प्रति आस्था को लेकर काफी संवेदनशीलता देखने को मिलती है। अक्सर आप भक्ति, धर्म और भगवान से संबंधित किसी प्रकार के



आस्था

हे ईश्वर , यदि तुम हो,तो कहो कौनसा अपराध ऐसा हुआ? जिसका दंड ऐसा मिला ?तुमने ही कहा था, पत्ता भी न हिलेगा बिन इच्छा के तुम्हारे, अर्थात किया तो ये तुमने ही है, तनिक भी मन विचलित न हुआ तुम्हारा? कहते हो हम सब तुम्हारे बच्चे हैं, फिर किस तरह तुम इतने निर्दयी हुए? हेईश्व



देव दीपावली :--- आचार्य अर्जुन तिवारी

*सनातन धर्म की विशेषता रही है कि अपने पर्व / त्यौहारों के माध्यम से मानवमात्र को एक दूसरे के समीप लाता रहा है | यहाँ प्रत्येक महीने में दिव्य त्यौंहारों की एक लम्बी सूची है , परंतु कार्तिक मास इसमें विशेष है | स्वयं में अनेक दिव्य त्योहारों को समेटे हुए कार्तिक मास का आज समापन हो रहा है | जाते हुए द



पंचकोसी परिक्रमा :---- आचार्य अर्जुन तिवारी

*सनातन धर्म के प्रत्येक क्रिया - कलाप धार्मिकता के साथ वैज्ञानिकता भी लिये हुए होते हैं | जिस प्रकार प्रत्येक कार्य का कोई न कोई महत्वपूर्ण कारण होता उसी प्रकार परिक्रमा का भी बड़ा महत्त्व है | परिक्रमा से अभिप्राय है कि सामान्य स्थान या किसी व्यक्ति के चारों ओर उसकी दाहिनी तरफ से घूमना | इसको 'प्रद



परिक्रमा :---- आचार्य अर्जुन तिवारी

*कार्तिक मास में अनेकों त्यौहार मनाए जाते हैं | इसी क्रम में कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की नवमी को वर्ष भर का सर्वोत्तम दिन माना जाता है , और इसे "अक्षय नवमी" का नाम दिया गया है | अक्षय का अर्थ होता है जिसका कभी क्षय (विनाश) न हो | वर्ष पर्यन्त जो धर्मकार्य/व्रत किये जाते हैं उसकी अपेक्षा "अक्षय नवमी



नरकचतुर्दशी एवं हनुमान जयंती :---- आचार्य अर्जुन तिवारी

*कार्तिक महीने की कृष्ण पक्ष में मनाए जाने वाली पंच पर्व का दूसरा दिन अर्थात कार्तिक कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को "नरक चतुर्दशी" के नाम से जाना जाता है | आज के दिन भगवान श्याम सुंदर कन्हैया ने नरकासुर दैत्य का वध करके उसके कारागार से सोलह हजार कन्या , युवती एवं नारियों को मुक्त कराकर एक नया जीवन प्रदा



महिलाओं के लिए ये कैसी लड़ाई जिसे महिलाओं का ही समर्थन नहीं

महिलाओं के लिए ये कैसी लड़ाई जिसे महिलाओं का हीसमर्थन नहीं मनुष्य की आस्था ही वो शक्ति होती है जो उसे विषम से विषम परिस्थितियों से लड़कर विजयश्री हासिल करने की शक्ति देती है। जब उस आस्था पर ही प्रहार करने के प्रयास किए जाते हैं, तो प्रयास्कर्ता स्वयं आग से खेल रहा होता है।क्योंकि वह यह भूल जाता है कि



अहोई अष्टमी :----- आचार्य अर्जुन तिवारी

*कार्तिक मास त्यौहारों एवं पर्वों का महीना है | पूरे महीने नये नये व्रत एवं पर्व इसकी पहचान हैं | अभी चार दिन पहले महिलाओं ने अपने पतियों के दीर्घायु होने के लिए दिन भर निर्जल रहकर "करवा चौथ" का कठिन व्रत किया था | आज फिर अपने परिवार की कुशलता के लिए , विशेषकर अपनी संतान की कुशलता एवं लम्बी आयु के ल



शक्ति के समस्त रूप नारी में ;---- आचार्य अर्जुन तिवारी

*इस धराधाम पर जब-जब ईश्वर ने अवतार लिया है तब-तब उनकी शक्ति, उनकी माया उनके साथ आई है | यह माया नहीं होती तो अध्यात्म कैसे होता | ईश्वर स्वयं शक्ति को मानते हैं क्योंकि बिना शक्ति के ईश्वर का भी अस्तित्व नहीं है | इसी शक्ति में जब वीर गुण होता है तो यह "महादुर्गा" हो जाती हैं | जब रजोगुण होता है तो



आसान हिन्दी  [?]
तीव्र हिंदी  [?]
ऑनस्क्रीन कीबोर्ड  [?]
हिन्दी टाइपिंग  [?]
डिफ़ॉल्ट कीबोर्ड  [?]

(फोन के लिए विकल्प)
X
1 2 3 र्4 ज्ञ5 त्र6 क्ष7 श्र8 (9 )0 --   =
q w e r t y u i o p [   ]
a s d िfि g h  j k l ; '  \
  z x c  v  b n m ,, .. ?/ एंटर
शिफ्ट                                                         शिफ्ट बैकस्पेस
x