अटल

पूर्व पीएम अटल बिहारी वाजपेयी की हालत नाजुक , लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर रखा गया

राजधानी दिल्ली के अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) में भर्ती पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की तबीयत नाजुक बनी हुई है. पिछले 36 घंटे में उनके स्वास्थ्य में कोई सुधार नहीं हुआ है. इस बीच थोड़ी देर में एम्स की ओर से वाजपेयी का नया हेल्थ बुलेटिन जारी किया जाएग



Video : पन्द्रह अगस्त का दिन कहता - आज़ादी अभी अधूरी है। सपने सच होने बाक़ी हैं, राखी की शपथ न पूरी है॥

पन्द्रह अगस्त का दिन कहता - आज़ादी अभी अधूरी है।सपने सच होने बाक़ी हैं, राखी की शपथ न पूरी है॥जिनकी लाशों पर पग धर कर आजादी भारत में आई।वे अब तक हैं खानाबदोश ग़म की काली बदली छाई॥कलकत्ते के फुटपाथों पर जो आंधी-पानी सहते हैं।उनसे पूछो, पन्द्रह अगस्त के बारे में क्या कहते हैं॥हिन्दू के नाते उनका दुख स



रूस के यूज्नी सितंबर में टेनिस को अलविदा कहा

14:42 HRS IST अटलांटा , 25 जुलाई (एएफपी) रूस के अनुभवी टेनिस खिलाड़ी मिखाइल यूज्नी ने कहा कि वह सितंबर में सेंट पीटर्सबर्ग ओपन टूर्नामेंट के बाद संन्यास ले लेंगे। मास्को के इस 36 वर्षीय खिलाड़ी ने अटलांटा ओपन के पहले दौर में अमेरिका के एमिल रीनबर्ग पर 6-2, 6-0 से जीत के बाद यह घोषणा की। विश्



नरेंद्र मोदी VS अटल बिहारी वाजपेयी :- कौन है बेहतर प्रधानमंत्री ?

आज हम सब जानते है की भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दुनिया में कितने चर्चित है जब वो दूसरे देशो में जाकर भाषण देते है तो सेकड़ो लोगो उनको सुनने के लिए जमा हो जाते है | जब उन्होंने अमेरिका विधानसभा में कांग्रेस को सम्भोधित किया तो उनके भाषण पर 40 से भी ज्यादा बार तालिया एवं 9 बार स्टैंडिंग ओवेशन मि



किसी रात को मेरी नींद चानक उचट जाती है

किसी रात को मेरी नींद चानक उचट जाती है आँख खुल जाती है मैं सोचने लगता हूँ कि जिन वैज्ञानिकों ने अणु अस्त्रों का आविष्कार किया था वे हिरोशिमा-नागासाकी के भीषण नरसंहार के समाचार सुनकर रात को कैसे सोए होंगे? क्या उन्हें एक क्षण के लिए सही ये अनुभूति नहीं हुई कि उनके हाथों जो कुछ हुआ अच्छा नहीं हुआ!  यद



कवि आज सुना वह गान रे, जिससे खुल जाएँ अलस पलक।

कवि आज सुना वह गान रे, जिससे खुल जाएँ अलस पलक। नस–नस में जीवन झंकृत हो, हो अंग–अंग में जोश झलक।  ये - बंधन चिरबंधन टूटें – फूटें प्रासाद गगनचुम्बी हम मिलकर हर्ष मना डालें, हूकें उर की मिट जाएँ सभी।  यह भूख – भूख सत्यानाशी बुझ जाय उदर की जीवन में। हम वर्षों से रोते आए अब परिवर्तन हो जीवन में।  क्रंदन



अपने आदर्शों और विश्वासों के लिए काम करते-करते,

अपने आदर्शों और विश्वासों के लिए काम करते-करते, मृत्यु का वरण करना सदैव ही स्पृहणीय है। किन्तु वे लोग सचमुच धन्य हैं जिन्हें लड़ाई के मैदान में,आत्माहुति देने का अवसर प्राप्त हुआ है। शहीद की मौत मरने का सौभाग्य सब को नहीं मिला करता। जब कोई शासक सत्ता के मद में चूर होकर या, सत्ता हाथ से निकल जाने के



ऊचांई

ऊँचे पहाड़ पर, पेड़ नहीं लगते, पौधे नहीं उगते, न घास ही जमती है। जमती है सिर्फ बर्फ,जो, कफ़न की तरह सफ़ेद और,मौत की तरह ठंडी होती है।खेलती, खिलखिलाती नदी,जिसका रूप धारण कर,अपने भाग्य पर बूंद-बूंद रोती है।ऐसी ऊँचाई, जिसका परस पानी को पत्थर कर दे, ऐसी ऊँचाई जिसका दरस हीन भाव भर दे, अभिनंदन की अधिकारी



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