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औलाद

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कुपंथी औलादआज के दौर में पुत्र माता पिता को, सदा दे रहे गालियां घात की।वो नहीं जानते नाज से थे पले, मन्नतों से हुए गर्भ से मातु की।ढा रहे वो सितम और करते जुलममारते मातु को और धिक्कारते।डांट फटकार कर एक हैवान बनवृद्ध माँ बाप को घर से निकालते।नौ महीने तुझे गर्भ में माँ रखी, उंगली उसकी पकड़ तू चला हाँथ

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