जिंदा है जो इज्ज़त से , वो इज्ज़त से मरेगा

सुबह सड़कों पर एक जीवन संघर्ष दिखता है, इबादत, समर्पण और कर्मयोग दिखता है -------------------------------------------------------------------- " दुनियाँ में हम आये हैं तो जीना ही पड़ेगा जीवन हैं अगर जहर तो पीना ही पड़ेगा गिर गिर के मुसीबत में संभलते ही रहेंगे जल जाये मगर आग प़े चलते ही रहेंगे...."



साथी हाथ बढ़ाना ...

साथी हाथ बढ़ाना ... एक अकेला थक जाएगा , मिलकर बोझ उठाना ********************************************** पत्रकारिता में अपनों द्वारा उपेक्षा दर्द देती है, लेकिन गैरों से मिला स्नेह तब मरहम बन जाता है ********************************************* "आज हम अपनी दुआओं का असर देखेंगे तीर-ए-नज़र देखेंगे ज़ख़



बाधाएं आती हैं आएं, कदम मिला कर चलना है

बाधाएं आती हैं आएं, कदम मिलाकर चलना है **************** अटल जी ऐसे राजनेता रहें , जिनका कर्मपथ अनुकरणीय है। उनके सम्वाद में कभी भी उन्माद की झलक नहीं दिखी *************************** राजनीति की यह दुनिया जहां मित्र कम शत्रु अधिक हैं । उसमें ऐसा भी एक मानव जन्म लेगा, जिसके निधन पर हर कोई नतमस



यादों के झरोखे में तुझको बैठा कर रखूंगा अपने पास

यादों के झरोखे में तुझकों बैठा रखूंगा अपने पास नाग पंचमी पर याद आया अपना भी बचपन ------------------------------------------------------------------ सुबह जैसे ही मुसाफिरखाने से बाहर निकला , "ले नाग ले लावा " बच्चों की यह हांक चहुंओर सुनाई पड़ी। मीरजापुर में इसी तरह की तेज आवाज लगाते गरीब बच



ऐ मेरे प्यारे वतन, तुझ पे दिल कुर्बान

ऐ मेरे प्यारे वतन, तुझ पे दिल कुर्बान ------ सवाल यह है कि तिरंगे की आन बान और शान की सुरक्षा के लिये हमने क्या किया ------ एक बार बिदाई दे माँ घुरे आशी। आमी हाँसी- हाँसी पोरबो फाँसी, देखबे भारतवासी । ------- अमर क्रांति दूत खुदीराम बोस की शहादत से जुड़ा यह गीत, मैंने राष्ट्रीय पर्व पर कोलकाता



जहां में ऐसा कौन है कि जिसको ग़म मिला नहीं

दुख और सुख के रास्ते, बने हैं सब के वास्ते जो ग़म से हार जाओगे, तो किस तरह निभाओगे खुशी मिले हमें के ग़म, खुशी मिले हमे के ग़म जो होगा बाँट लेंगे हम जहाँ में ऐसा कौन है कि जिसको ग़म मिला नहीं इ



ना घर तेरा ना घर मेरा , चिड़िया रैन बसेरा

" माटी चुन चुन महल बनाया, लोग कहें घर मेरा । ना घर तेरा, ना घर मेरा , चिड़िया रैन बसेरा । " बनारस में घर के बाहर गली में वर्षों पहले यूं कहे कि कोई चार दशक पहले फकीर बाबा की यह बुलंद आवाज ना जाने कहां से मेरी स्मृति में हुबहू उसी तरह से पिछले दिनों फिर से गूंजने लगी। कैसे भागे चला जाता थ



सभी को देखो नहीं होता है नसीबा रौशन सितारों जैसा

सभी को देखो नहीं होता है नसीबा रौशन सितारों जैसा सच भले ही सूली हो और जुगाड़ तंत्र सिंहासन, फिर भी.. ------------------ शशि/ अपनी बात --------------- " एक बंजारा गाए, जीवन के गीत सुनाए हम सब जीने वालों को जीने की राह बताए ज़माने वालो किताब-ए-ग़म में खुशी का कोई फ़साना ढूँढो हो ओ ओ ओ ... आँखों में



एक कश्ती सौ तूफां, जाएं तो जाएं कहां

"समझेगा, कौन यहाँ दर्द भरे, दिल की ज़ुबां रुह में ग़म, दिल में धुआँ जाएँ तो जाएँ कहाँ... एक कश्ती, सौ तूफां " अपनों से जब वियोग हो जाता है, शरीर जब साथ छोड़ने लगता है, प्रेम जब धोखा देता है, कर्म जुगाड़ तंत्र में उपहास बन जाता है, लक्ष्मी जब रूठ जाती है, पथिक जब राह भटक जाता है, जब आत्मविश्



उपदेशक बनने से पहले बनें कर्मयोगी

“विचार और व्यवहार में सामंजस्य न होना ही धूर्तता है, मक्कारी है।" मुंशी प्रेमचंद की जयंती पर उनका यह उद्घोष मुझे फिर से याद हो आया। सो, मैंने अपने ब्लॉग पर एक बार दृष्टि डाली। अंतरात्मा से सवाल पूछा कि संघर्ष के प्रतीक, जीवन एवं अपनी रचना दोनों से ही और हम जैसों की लेखन शक्ति के ऊर्जा स्रोत के कथन



अगर आपका बच्चा बिस्तर पर पेशाब करता है, तो करें ये इलाज

बच्चो का बिस्तर पर पेशाब करने का इलाज इन हिंदी : अक्सर छोटे बच्चे रात में सोते समय बिस्तर गीला कर देते है जो की एक सामान्य समस्या है और यह समस्या समय के साथ ठीक भी हो जाती है लेकिन बड़ी उम्र के बच्चे अनजाने में बिस्तर गीला करते है तो यह एक बीमारी हो सकती है। वयस्क पुरु



कहाँ तक यह मन को अँधेरे छलेंगे - बातों बातों में

Kahan Tak Yeh Man Ko Andhere Chhalenge Lyrics from Baton Baton Mein: This is a very well sung song by Kishore Kumar with nicely composed music by Rajesh Roshan. Lyrics of Kahan Tak Yeh Man Ko Andhere Chhalenge are beautifully penned by Yogesh.बातों बातों में (Baton Baton Mein )कहाँ तक यह मन को अँधेर



सुनिये कहिये - बातों बातों में

अमोल पालेकर, टीना मुनीम, डेविड और असरानी सुनीय कहीय गीत में बटू बैटन मीन अभिनीत सुनी कहीय गीत अमित खन्ना द्वारा लिखे गए हैं, जबकि यह ट्रैक आशा भोसले और किशोर कुमार द्वारा गाया जाता है।बातों बातों में (Baton Baton Mein )सुनिये कहिये की लिरिक्स (Lyrics Of Suniye Kahiye )सुनिये कहियेसुनिये कहियेयह प



न बोले तुम ना मैंने कुछ कहा - बातों बातों में

Na Bole Tum Na Maine Kuchh Kaha Lyrics of Baton Baton Mein (1979): This is a lovely song from Baton Baton Mein starring Amol Palekar, Tina Munim, David and Asrani. It is sung by Asha Bhosle and Amit Kumar and composed by Rajesh Roshan.बातों बातों में (Baton Baton Mein )न बोले तुम ना मैंने कुछ कहा



उठे सबके कदम - बातों बातों में

उठे सबके कदम गीत अमू पालेकर, टीना मुनीम, डेविड और असरानी अभिनीत बसु चटर्जी की फिल्म बैटन बैटन मीन से संबंधित हैं। उठे सबके कदम गीत अमित खन्ना द्वारा लिखे गए हैं, जबकि यह ट्रैक लता मंगेशकर, अमित कुमार और पर्ल पदमसी द्वारा गाया जाता है।बातों बातों में (Baton Baton Mein )उठे सबके कदम की लिरिक्स (Lyri



बातों बातों में (Baton Baton Mein )

'बैटन बैटन मीन' 1 9 7 9 की हिंदी फिल्म है जिसमें आमोल पालेकर, टीना मुनीम, डेविड, असरानी, ​​पर्ल पदमसी, शोभनी सिंह, ट्यून ट्यून, लीला मिश्रा, रणजीत चौधरी, अरविंद देशपांडे और पिलू वाडिया शामिल हैं। हमारे पास बैटन बैटन मीन के 4 गाने गीत और 2 वीडियो गाने हैं। राजेश रोशन ने अपना संगीत बना लिया है। किशोर



न तुम हमें जानो - बात एक रात की

बाट एक रात की से ना तुम हमन जानो गीत: हेमंत कुमार और सुमन कल्याणपुर द्वारा यह एक बहुत अच्छा गीत है जो हेमंत कुमार द्वारा अच्छी तरह से तैयार संगीत के साथ है। ना तुम हमन जानो के गीत महारू सुल्तानपुरी द्वारा खूबसूरती से लिखा गया है।बात एक रात की (Baat Ek Raat Ki )न तुम हमें जनोयह मौसम ये रात चुप हैयह ह



बात एक रात की (Baat Ek Raat Ki )

'बाट एक रात की' एक 1 9 62 की हिंदी फिल्म है जिसमें देव आनंद, वहीदा रहमान और जॉनी वाकर प्रमुख भूमिका निभाते हैं। हमारे पास बाट एक रात की एक गीत है और एक गीत है। हेमंत कुमार ने अपना संगीत बना लिया है। हेमंत कुमार और सुमन कल्याणपुर ने इन गीतों को गाया है, जबकि मजरुह सुल्तानपुरी ने अपने गीत लिखे हैं।इस



अंधेरे में जो बैठे हैं,नज़र उन पर भी कुछ डालो

जिन्हें नाज़ है हिन्द पर वो कहाँ हैं ये पुरपेच गलियाँ, ये बदनाम बाज़ार ये ग़ुमनाम राही, ये सिक्कों की झन्कार ये इस्मत के सौदे, ये सौदों पे तकरार जिन्हें नाज़ है हिन्द पर वो कहाँ हैं दशकों पूर्व एक फ



कबीर की वाणी में है हमारा आत्मबल

महान समाज सुधारक संत कबीर को लेकर मेरा अपना चिंतन है। कबीर की वाणी में मुझे बचपन से ही आकर्षण रहा है । जब छोटा था, तो विषम आर्थिक परिस्थितियों में पापा (पिता जी) अकसर ही कहा करते थें - " रुखा सुखा खाई के ठंडा पानी पी। देख पराई चुपड़ी मत ललचाओ जी।।" जिसे सुन हम सभी अपनी सारी तकलीफों और श



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