बदला

लड़कियों में 16 वर्ष की उम्र में होने वाले अहम बदलाव

जैसा कि हम सभी जानते है कि बदलते समय के साथ ही सभी लोगों में शारीरिक परिवर्तन देखने को मिलते है जब कोई लड़का या लड़की 16 साल के उम्र के पड़ाव को पार कर लेते है तो उनके शरीर और सोच में काफी सारे बदलाव होने लगते है। बात जब लड़कियों की होती है तो उनमें इस सिलसिले की शुरुआत 14 वर्ष की उम्र के साथ ही नजर



जी करदा - बदलापुर

बदलापुर के जी कार्डा गीत (2015): यह वरुण धवन, हुमा कुरेशी, यामी गौतम और नवाजुद्दीन सिद्दीकी अभिनीत बदलापुर से एक अद्भुत गीत है। यह दिव्य कुमार द्वारा गाया जाता है और इसका संगीत सचिन जिगर द्वारा रचित है।बदलापुर (Badlapur )छलनि करदे सीना मेरा क्ष (३)दाग दे सारी गोलियां नई आज मेरा जी करदामरजानियाँ नी आ



जीना जीना - बदलापुर

फिल्म बदलाल 2015 से जीना जीना गीत के साथ पढ़ें और गाएं जो आतिफ असलम द्वारा गाया जाता है। आप बदलापुर से अन्य गाने और गीत भी प्राप्त कर सकते हैं।बदलापुर (Badlapur )दहलीज पे मेरे दिल कीजो रखे हैं तूने क़दमतेरे नाम पे मेरी ज़िन्दगीलिख दी मेरे हमदमहा सीखा मैंने जीना जीना कैसे जीनाहा सीखा मैंने जीना मेरे हम



बदलापुर (Badlapur )

"Badlapur" is a 2015 hindi film which has Varun Dhawan, Huma Qureshi, Yaami Gautam, Nawazuddin Siddiqui, Vinay Pathak, Divya Dutta, Radhika Apte, Kumud Mishra and Pratima Kazmi in lead roles. We have 2 songs lyrics and 2 video songs of Badlapur. Sachin Jigar has composed its music. Atif Aslam and D



“मुक्तक” बदला हुआ मौसम बहक बरसात हो जाए।

“मुक्तक” बदला हुआ मौसम बहक बरसात हो जाए। उड़ता हुआ बादल ठहर कुछ बात हो जाए। क्यों जा रहे चंदा गगन पर किस लिए बोलो- कर दो खबर सबको पहर दिन रात हो जाए॥-१ अच्छी नहीं दूरी डगर यदि प्रात हो जाए। नैना लगाए बिन गर मुलाक़ात हो जाए। ले हवा चिलमन उडी कुछ तो शरम करो-सूखी जमी बौंछार



कॉन्सर्ट में बेडज़ेड ब्रा पहनने वाले 6 सितारे: ब्रिटनी स्पीयर्स और अधिक

ब्रिटनी स्पीयर्स ने हाल ही में वाशिंगटन डीसी में अपने पीस ऑफ मी टूर प्रदर्शन को मार डाला। हमेशा सबसे कामुक पोशाक पहने हुए, ब्रिटनी एक चमकदार ब्राजील ब्रा पहनते समय चकित हो गया। लेकिन वह एकमात्र सेलेब नहीं है जिसने इस प्रवृत्ति में हिस्सा लिया है! उपरोक्त हमारी गैलरी में उनके प्रदर्शन के लिए सबसे काम



डिजिटल इंडिया की वजह से छात्रों को कैसे लाभ मिलेगा | TutStu

Digital India - is a “Social Change” which involvestransforming the mind-set of its Citizen. After observing modernisation in all aspects of ordinarylife, we can still sense th



सबकुछ को बदलने की ज़िद में गैंती से खोदकर मनुष्यता की खदान से निकाली गई कविताएँ

-----------------शहंशाह आलम मैं बेहतर ढंग से रच सकता था प्रेम-प्रसंग तुम्हारे लिए ज़्यादा फ़ायदा था इसमें और ज़्यादा मज़ा भी लेकिन मैंने तैयार किया अपने-आपको अपने ही गान का गला घोंट देने के लिए… # मायकोव्स्की मायकोव्स्की को ऐसा अतिशय भावुकता में अथवा अपने विचारों को अतिशयीक



दृश्य नहीं.... दृष्टि बदलो

भागदौड़ भरे जीवन मे अनेक बार ऐसे अवसर अवश्य आते है, जब व्यक्ति स्वयं के व्यक्तित्त्व को न बदलकर, विश्व को बदलने की नाकाम कोशिश करता है । इस विचारधारा वाला छोटा-बड़ा, अमीर-गरीब या अच्छा-बुरा कोई भी व्यक्ति हो सकता है । यहाँ तक कि, अनेक बार दृढ़-निश्चयी और अच्छा व्यक्ति भी अपने व्यक्तित्त्व को नहीं बदल प



सभी यांत्रिक और अवैध बूचड़खाना बंद होंगे।

सभी पाठको का हार्दिक अभिनंदन,बीते दिनों कुछ राजनैतिक बदलाव हुए। एक मुद्दा बहुत चर्चा ने है "सभी यांत्रिक और अवैध बूचड़खाना बंद होंगे।" सुनने में अच्छा लगता है कुछ नहीं से तो कुछ सही। मेरे मन में एक सवाल है :



भावी आथित्य संस्कारो की झलकियां

भावी आथित्य संस्कारो की झलकियां ………………परिवर्तन के इस दौर मेंभविष्य का चित्र कुछ ऐसे उभर कर आयेगा !नैतिक मूल्यों के संग संगसंस्कारो का समस्त स्वरुप ही बदल जाएगा !सर्वप्रथम आथित्य सत्कार में,जो आगंतुक को विधिवत लुभायेगा !वही सुधि जन सर्वगुण संपन्न,सस्कारी जमात का गुरु कहलायेगा !!प्रथम काज अतिथि प्रणाम



कौन बिगाड़ रहा है समाज ?

शायद ही ऐसा कोई दिन हो जब अखबार और न्यूज़ चैनलों में दुष्कर्म या छेड़खानी की कोई घटना न हो !आखिर ऐसा क्यूँ हो रहा है ? दिल्ली के उस आंदोलन के बाद भी ये घटनाये रुक क्यूँ नही रही है? आखिर समाज कहाँ जा रहा है?कहीं ये वो तथाकथित विनाश की शुरुआत तो नहीं है जिसका जिक्र माया सभ्यता में क



गजल- आशा

सोख लूंगा धूप को ,मैं छाँव देकर जाऊंगा ,ज़ुल्म के सीने पे गहरा,घाव देकर जाऊंगा ।रास्ते कदमों में होंगे ,ठोकरों में मंजिलें ,हौसलों के पंख मन को पाँव देकर जाऊंगा ।शर्तीयां उस ज़ख्म की, नासूरीयत को रोक दूंगा, काबिले मरहम ,इलाज-ए -दाव ,देकर जाऊंगा ।जो धुआं और धुंध में ,गम हो गए वो आशियाने ,गुमशुदा उन ब



27 जनवरी 2015

कौन बिगाड़ रहा है समाज ?

शायद ही ऐसा कोई दिन हो जब अखबार और न्यूज़ चैनलों में दुष्कर्म या छेड़खानी की कोई घटना न हो !आखिर ऐसा क्यूँ हो रहा है ? दिल्ली के उस आंदोलन के बाद भी ये घटनाये रुक क्यूँ नही रही है? आखिर समाज कहाँ जा रहा है?कहीं ये वो तथाकथित विनाश की शुरुआत तो नहीं है जिसका जिक्र माया सभ्यता में क





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