ऐप्पल ने तलाशा भारत में नया बाजार, ज्योतिष, क्रिकेट और फिल्मों का करेंगे व्यापार

पिछले हफ्ते भारत दर्शन के लिए पहुंचे ऐप्पल के सीईओ टिम कुक ने मोबाइल और लैपटॉप से इतर उससे भी कहीं बड़ा बाजार तलाश लिया है। उम्मीद है कि बहुत जल्द वह इस बाजार पर भी वर्चस्व बनाने की योजना तैयार कर नए प्रतिस्पर्धी बनाएंगे। यह बाजार है ज्योतिष, क्रिकेट और बॉलीवुड फिल्मों का।नई दिल्ली : पिछले हफ्ते भारत



टॉप 5 भारतीय महिला हॉकी खिलाड़ी

1980 में जब मास्को में हुए ओलंपिक में पहली बार महिला हॉकी को शामिल किया गया तो भारत की महिला हॉकी टीम भी पहली बार इतने बड़े स्पर्धा में भाग लेने गई थी। भारतीय महिला हॉकी टीम के लिए पहली बार कप्तानी का जिम्मा रूपा सानी ने निभाई थी। भारतीय महिला टीम ने मास्को के ओलंपिक में चौथा स्थान प्राप्त किया था।



कोहिनूर हीरे पर सरकार का यूटर्न

हाल ही में सर्वोच्चन्यायालय में कोहिनूर हीरे से संबंधित एक मामले में जवाब देते हुए भारत सरकार ने यहपक्ष रखा है कि कोहिनूर हीरा यूके सरकार से वापस नहीं माँगा जा सकता क्योंकि ऐसाकरने पर दूसरे देश भी भारत के संग्रालयों में पड़ी बहुमूल्य वस्तुओं पर दावा करसकते हैं(हालांकि चहुतर्फा आलोचना के पश्चात सरकार



यदि मोदी विदेश यात्रा नहीं करेंगे तो क्या भारत बदनाम हो जायेगा ।…

ये सत्य है की पुरे विश्व  मैं मोदी जी ने यात्राये करके भारत का नाम रोशन   कर दिया...  पर  सत्यता यह भी   है की भारत  मैं एक  आम  आदमी अभी  भी जैसा पहले था वैसा  ही अभी  भी  है बल्कि महंगाई  बढ़ने  के कारण ओर  ज्यादा परेशान ….  राष्ट्र धर्म संस्कृति विरोध  ,, दंगो के कारण असुरक्षित ।...  हमको दूसरे  ल



कीमत

अपनी कीमत उतनी रखिए, जो अदा हो सके ! अगर अनमोल हो गए तो, तन्हा हो जायेगें..!



ऐ खाकनशीनों उठ बैठो....

दरबारे वतन में जब इक दिन सब जाने वाले जायेंगे...कुछ अपनी सजा को पहुंचेंगे, कुछ अपनी जजा ले जायेंगे...ऐ खाकनशीनों उठ बैठो, वो वक़्त करीब आ पहुंचा है...जब तख़्त गिराए जायेंगे, जब ताज उछाले जायेंगे....अब टूट गिरेंगी जंजीरें अब ज़िन्दानों की ख़ैर नहीं...जो दरया झूम के उठे हैं, तिनकों से न टाले जायेंगे..



महाभारत के वीर

महाभारत की कथा जितनी बड़ी है, उतनी ही रोचक भी है। शास्त्रों में महाभारत को पांचवां वेद भी कहा गया है। इसके रचयिता महर्षि कृष्णद्वैपायन वेदव्यास हैं। महर्षि वेदव्यास ने इस ग्रंथ के बारे में स्वयं कहा है- यन्नेहास्ति न कुत्रचित्। अर्थात जिस विषय की चर्चा इस ग्रंथ में नहीं है, उसकी चर्चा कहीं भी उपलब्ध



भारतीय पञ्चाङ्ग

भरतीय इतिहास तथा सहित्य के ज्ञान के लिये पञ्चाङ्ग की परम्परा जानना आवश्यक है। अतः गत ३२ हजार वर्षों की पञ्चाङ्ग परम्परा दी जाती है। काल के ४ प्रकार, सृष्टि के ९ सर्गों के अनुसर ९ काल-मान, ७ युग तथा उसके अनुसार गत ६२ हजार वर्षों का युग-चक्र है(१) स्वायम्भुव मनु काल-स्वायम्भुव मनु काल में सम्भवतः आज क



खेचरी मुद्रा द्वारा अमृत पान

खेचरी मुद्रा एक सरल किन्तु अत्यंत महत्वपूर्ण विधि है ।जब बच्चा माँ के गर्भ में रहता है तो इसी अवस्था में रहता है। इसमें जिह्वा को मोडकर तालू के ऊपरी हिस्से से सटाना होता है । निरंतर अभ्यास करते रहने से जिह्वा जब लम्बी हो जाती है । तब उसे नासिका रंध्रों में प्रवेश कराया जा सकता है । तब कपाल मार्ग एवं



भारत की छद्म स्वतन्त्रता

स्वतन्त्रता दिवस या दासों की नई कहानी।15 अगस्त को प्रत्येक वर्ष मूर्ख हिंदू और मुसलमान उसी मानवता के संहार का जश्न मनाते हैं, दोनों को लज्जा भी नहीं आती ।युद्ध भूमि में भारत कभी नहीं हारा, लेकिन अपने ही जयचंदों से हारा है, समझौतों से हारा है । अपनी मूर्खता से हारा है, उन्हीं समझौतों में सत्ता के हस्



देश प्रेम



69वें भारतीय स्वतन्त्रता दिवस-2015 की हार्दिक शुभकामनायें

Yesterday’s Reflection:स्वतन्त्रता दिवस हम सभी के मन में उमंग और जोश भर देता है। साल के कुछ चुनिंदा दिनों को छोड़ कर हम देशभक्ति या देशप्रेम को एक तरफ रख देते हैं। भारतीयता की भावना सभी में बराबर होती है लेकिन हममे से कुछ एक ऐसे भी हैं जो मानवधिकार या अम्बेडकरवाद की बात करते हैं उनको देश द्रोही या सम



एक मुक्तक, मुक्तता के पर्व के नाम...

कौन कहता हैआज का दिन ड्रायभीगा है तिरंगालहू शहीद है बहायमेरी रूहमेरी जिंदजय हिंद!!! जय ६९वाँ स्वतंत्रता पर्व, ६८ की हुई आज़ादी



जय-हिन्द



भारत की सोंधी-मिट्टी

भारत की सोंधी-मिट्टी, हम सब का श्रृंगार है,हम सब देशवासियों का यह सुन्दर संसार है I नहीं चाहिए हीरे-मोती, और ना ही चांदी-सोना,नहीं विदेशी शैया पर हमें अपनी नींदें खोना,देश हमारा सिंधु स्वर्ण का, यही सम्पदा अपार है I देश की खातिर जीना हैदेश की खातिर मरना है क्या खोया क्या पाया छोडो,हमें वतन से प्यार



नवगीत: संसद की दीवार पर

संजीव *संसद की दीवार पर दलबन्दी की धूल राजनीति की पौध पर अहंकार के शूल *राष्ट्रीय सरकार की है सचमुच दरकार स्वार्थ नदी में लोभ की नाव बिना पतवारहिचकोले कहती विवश नाव दूर है कूल लोकतंत्र की हिलाते हाय! पहरुए चूल *गोली खा, सिर कटाकर तोड़े थे कानून क्या सोचा था लोक का तंत्र करेगा खून?जनप्रतिनिधि करते रहे



जय हिन्द की सेना

हम भारत माँ के वीर सिपाही,हमसे बनी जय हिन्द की सेना !आतिथ्य में गर सर झुका दे,कमजोरी उसको समझ न लेना !!दीन दुखी हो या कोई लाचारीकाम अपना सबको सहारा देना !देश सेवा में करे अर्पण जीवनवक़्त पे अपनी जान गंवाँ देना !!हम भारत माँ के वीर सिपाही,हमसे बनी जय हिन्द की सेना !!जब संकट में हो देश की जनताबस एक आवा



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