भारत में नारी समस्याएं एवम सह -शिक्षा

भारत जैसे देश में जहाँ नारी को देवी जैसा पद दिया गया हैं, वहाँ पर नारी का बहुत सी समस्याओं से गुजरना इसके सांस्कृतिक मूल्यों और यथार्थ के बीच के अंतर को स्पष्ट करता है। आज के परिवेश में जहाँ पर नारी और गरीब लोगों की सामाजिक सुरक्षा दाव पे लगी है और वहाँ के तथाकथित नेता अपने घोटालों और सुखभोग में



31 जनवरी 2015

भारत की संस्कृति

अपनी संस्कृति



सकारात्मक दर्शन में आपका स्वागत है...

“सकारात्मक दर्शन” भारत में दार्शनिक चिन्तन को जमीन से जोड़ने का प्रयास है. दर्शन वही सार्थक है जिसमे सामाजिक संवेदना हो. व्यक्तिगत चिन्तन के साथ साथ सामाजिक समानता, भाईचारे की शिक्षा हो. हमनें यह प्रयास 2008 में शुरू किया था और आज इसका विस्तार 15 से ज्यादा वेबसाइट, दो शोध-पत्रिकाओं, एक ऑनलाइन संस्था,



भारत की आजादी ?

कितना कौतूहल होता है यह सुनकर कि "भारत तो एक स्वतंत्र देश है, और हम उस देश के वाशी हैं"। परंतु शाश्वत सत्य तो यह है कि हम अभी भी गुलाम है, अंतर तो मात्र इतना है कि पहले गोरे चमङे वालों के थे अब काले चमङे वालों के। अाखिर कब तक हम भारतीयों को इस मानसिक गुलामी के जंजीरों से अाजादी मिलेगी। आखिर कब



भारत और अमेरिका रिश्ता

भारत और अमेरिका के सुर अतीत में भले ही एक दूसरेसे मेल न खाते रहे हो परंतु आज स्थिति में वांछितबदलाव है। दोनों ही देश के प्रमुख विकास के मुद्दे परआम सहमति रखने वाले है। वैश्विक मंचो परदोनों ही देश गर्मजोशी से मिले है औरविचारधारा में भी आपसी समन्वय है। रिश्तों औरआकांक्षाओं की बात करने से पहले पूर्व मे



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