भाषाओं का सम्बन्ध और हमारी मानसिकता

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हिंदी को राष्ट्रभाषा बनाने को भारी समर्थन ...

https://duniaabhiabhi.com/heavy-support-to-make-hindi-the-national-language/



हिंदी भाषा

कई दशको पहले, यदि भारत में कुछ ऐसा घट जाता,जिस से ये देश धन सम्पन्न और विकसित बन जाता, चहुँमुखी विकास के साथ साथ,अन्तराष्ट्रीय व्यापर भी शशक्त हो जाता, और शशक्त हो जाती हिंदी भाषा, भारत में तो चारो और हिंदी बोली जाती ही ,और विदेशी भी हिंदी बोलते हुए आता,लड़खड़ाती हुई हिंदी बोलते हुए जब विदेशी आता,तो म



स्मार्ट स्कूल



भाषा

भाषा है हर संवाद के लिए जरूरी, फिर क्यों बनें अंग्रेजी जरूरी? अपनी निज भाषा, क्यों बनें तमाशा? शब्दों के अर्थ में बंधकर, बोले जो भी भाषा, वहीं है अपनी आशा संवाद के लिए जरूरी है जितनी भाषा, खुद को सुनाने के लिए भी, जरूरी है अपनी भाषा। चहुंओर लड़ाई है, कहीं क्षेत्रवादिता, कहीं भाषावादिता, वाद, विवा



कुछ कुछ - किस्त तीसरी ( व्याकरण - भाषा की, जीवन की : मैं और हम )

***** कुछ कुछ - किस्त तीसरी ***** *** व्याकरण - भाषा की, जीवन की *** ** मैं और हम *



निज-भाषा हो निज-भाषा

विशेष : आओ हिंदी भाषा को लेकर कुछ चर्चा करें, हिंदी की सेवा करें।*** निज-भाषा हो निज-भाषा ***(1) - ( प्रस्तावना )मैं हिंदी भाषी हूं, हिंदी प्रेमी हूं; पर हिंदी का विद्वान नहीं। मैं भी हिंदी की सेवा करना चाहता हूं;मैं स्वयं का हिंदी ज्ञान बढ़ाना चाहता हूं; स्वयं की हिंदी सुधारना चाहता हूं;पर किस



निज भाषा

विशेष : आओ हिंदी भाषा को लेकर कुछ चर्चा करें, हिंदी की सेवा करें।** निज भाषा ** (1) - ( प्रस्तावना )मैं हि



प्रेम - परिभाषा

मानसिक अनुभूतियों की एक संज्ञातम्यक व् सर्वमान्य परिभाषाये रचना भौतिक पदार्थो और उसकी क्रियावों की परिभाषों के बनाने जितना सरल नहीं लगता है, क्योकि भौतिक परिभाषाओ के लिए स्थायी परिमंडल निश्चित है और कम भी



प्यार क्या है?

प्यार दो दिलो के बीचका एक गहरा स्नेह है। जो किसी दूसरी चिजो मे ना मिले वो सुखद एहसास है। गंगा की तरह पवित्र, यमुना की तरह सुंदर और हिमालय की तरह विशाल है, जिसे तोड़ना साधारण मानव के बस की बात नही। कुदरत का दिया हुआ वोतोहफा है जिसमे खुदा



मातृभाषा एवम विदेशी भाषा

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“बिना राष्ट्रभाषा के देश गूंगा"

“बिना राष्ट्रभाषा के तो कोई भी देश गूंगा है । राष्ट्र की अस्मिता की पहचान ही राष्ट्रभाषा से होती है । बगैर इसके सम्पूर्ण देश और देशवासियों की उन्नति सम्भव नहीं है ।अंग्रेजी भाषा की बढ़ती मांग और हिन्दी का वजूद बनाए रखने के लिए हर साल देशभर में 14 सितम्बर को हिन्दी दिव



भाषा

सादर नमस्कार , न जाने क्योंमेरे ह्रदय में यह सोचकर पीड़ा होती है कि कि आज कल क्यों हम भारतीय अपनी मात्र भाषा को भूलते जा रहे हैं| क्यों हम केवल और केवल अंग्रेजी पर ध्यान दे रहे हैं हम यह



संस्कृत हिंदी और विज्ञान

संस्कृत, हिंदी और विज्ञान स्वामी विवेकानन्दके अनुसार – दुनियाभर के वैज्ञानिक अपने नूतन परीक्षणों से जो परिणाम प्राप्त कररहे हैं, उनमें से अधिकांशहमारे ग्रंथों मे समाहित हैं। हमारी परम्परायें विकसित विज्ञान का पर्याय हैं ।हमारे ग्रंथ मूलत: संस्कृत भाषा में लिखे गये हैं ।



हिंगलिश

आपने इंग्लिश सुना होगा,हिंदी सुना होगा परन्तु ये हिंगलिश किस चिड़िया का नाम है चलिए ये जानते है.हिंगलिश को इंडियन इंग्लिश भी कहते है ,आज कल की आम भाषा है जिसे हम मैसेज की भाषा,युवा भाषा भी कह सकते है. दरअसल यह भाषा हिंदी और अंग्रेजी दोनों भाषाओ का संगम है



माँ बसुन्धरा

 माँ बसुन्धरा कोनमन करेंदो फूल श्रधा केअर्पण करेंन होने दें क्षरणमाँ कासब मिलकर यह प्रणकरें।कितना सुन्दर धरतीमाँ का आँचलपल रहा इसमें जगसारा,अपने मद के लिएक्यों तू मानवफिरता मारा-मारासंवार नहीं सकतेइस आँचल को तोविध्वंस भी तो नाकरें,माँ बसुन्धरा कोनमन करें।हिमगिरी शृंखलाओंसे निरंतरबहती निर्मल जलधारा



भारत देश में क्यों अंग्रेजी बोलने वालो को पढ़ा लिखा समझने का ट्रेंड है?

मै अपना एक अनुभव बाटना चाहूंगी,एक लिखित परीक्षा में मैंने अच्छा स्थान प्राप्त किया लेकिन साक्षात्कार में सिर्फ इसलिए नहीं लिया गया क्योकि मेरी अंग्रेजी दुसरो से कम अच्छी थी मैंने सवाल किया कि हिंदी से क्या परेशानी हैं तो उत्तर ये मिला कि अंग्रेजी बोलने से एजुकेसन का



भाषा-व्यक्तित्व का आईना

भाषा-व्यक्तित्व का आईना डा. वेद प्रकाश भारद्वाज भाषा एक आईने की तरह होती है। हम जैसी भाषा बोलते हैं या लिखते हैं वैसा ही हमारा व्यक्तित्व होता है जो भाषा के आईने से सबके सामने आ जाता है। इस दृष्टि से यदि हम आज के युवाओं और बच्चों की भाष



हिंदी भाषा चलो हिंदी सीखें

व्याकरण प्राथमिक स्तर पर ही विद्यार्थियों की भाषा को आधार प्रदान करता है किंतु इसके लिए यह अनिवार्य है कि उसका अभ्यास निरंतर बना रहे । षष्ठी स्तर पर विद्यार्थियों को व्याकरण के नियमों का पुनराभ्यास का अवसर मिलता है इस स्तर पर विद्यार्थी भाषा को शुद्ध रूप प्रदान करने में समर्थ हो जाता है । किसी भी भ



भारतीय भाषाओं में इन्टरनेट से बदलता हुआ देसी प्रारूप और युवा

इन्टरनेट कि सेवाओं की भारतीय भाषाओं में उपलब्धता बढने से इसके देश के उन लोगों तक पहुचने में काफी मदद मिलेगी जिन्हें अबतक इसके लाभ से वंचित रखा गया । इससे कई उन लोगों को भी रोजगार मिलेगा जो कि भारतीय भाषाओ



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