बुराई

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विप्र धेनु सुर संत हित लीन मनुज अवतार

विप्र धेनु सुर संत हित लीन्ह मनुज अवतार डॉ शोभा भारद्वाज रावण के भय से सम्पूर्ण ब्रह्मांड थर्राने लगा दस सिर बीस भुजाओं एवं ब्रह्मा जी से अमरत्वका वरदान प्राप्त राक्षस राज रावण निर्भय निशंक विचर रहा था हरेक को युद्ध मेंललकारता |रावण का पुत्र मेघनाथमहत्वकांक्षी ,रावण के समान बलशाली पिताको समर्पित



कुछ तो लोग कहेंगे

जब किसी को अपने में कोई खूबी नज़र नहीं आती तब वो दुसरो में बुराई खोजता है. ऐसे लोगो की जिंदगी दुसरो में बुराई ढूंढ़ने और बुराई करने में ही गुज़र जाती है, और एक रोज़ जब वो दुनिया छोड़ देते है तो लोग भी उसको याद करना छोड़ देते है. रहीम ने कहा है " बुर



क्यों ना हम पहले आपने अन्दर के रावण को मारें

क्यों ना हम पहले आपने अन्दर के रावण को मारें “रावण को हराने के लिए पहले खुद राम बनना पड़ता है ।“ विजयादशमी यानी अश्विन मास के शुक्ल पक्ष की दसवीं तिथि जो कि विजय का प्रतीक है। वो विजय जो श्रीराम ने पाई थी रावण पर, वो रावण जो प्रतीक है बुराई का, अधर्म का ,अहम् का, अहंका



कैसे इतनी हिम्मत हो जाती है किसी महिला को छेड़ने की. ?

अभी कुछ दिन पहले ही बैंगलूरू की छेडछाड वाली घटना देखी। दो लडके स्कूटर पर एक लडकी का पीछा करते हुये उसके पास आये और उनमें से एक ने स्कूटर से उतर कर उस लडकी को छेडना शुरू कर दिया। जब उस लडकी के सामने उसकी पेश न ग



बुराई तू न गई मेरे मन से

बुराई का प्रतीक रावण, जो अपनी नाभि में अमृत होने के कारण अमर है. श्रीराम भी रावण के शरीर को ही खत्म कर पाए थे, परन्तु उसकी आत्मा को नहीं मिटा सके, क्योंकि आत्मा तो अजर-अमर है. वहीं आत्मा समाज में विचरण कर है, और अपने मन माफिक शरीर को देखते ही उसको आशिया बनाकर घिनौने कृत्





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