ब्यथा

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पहले के दास आज के संत-योगी

पहले के दास आज के संत-योगी आज के संतो व योगी मे बहुत फर्क हैं। पहले का दास राजा के अधीन होकर अपनी रचनाओं से उन्हे सब कुछ बता देते थे। इनाम पाकर अपने आप को धन्य समझते थे। आज के योगी संत, राजा बनकर भी कुछ नहीं हासिल कर पाते। भगवान को, वह अपना आईना समझते हैं, और उसमे अपना बंदरो की तरह बार-बार चेहरा द



ग़ज़ल (मौत के साये में जीती चार पल की जिन्दगी)

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