चाइल्ड

बाल यौन शोषण: अपनों की दरिंदगी का शिकार होता बचपन - Child Abuse in Hindi

बाल यौन शोषण हमारे समाज की सबसे जटिल समस्याओं में से एक है।भारत में दिन पर दिन बाल यौन शोषण की समस्याएं तेज़ी से बढ़ती जा रहीं है। जिसके चलते न जाने कितने मासूम आज एक सुरक्षित समाज में साँस नहीं ले पा रहे।उनके मन में असुरक्षा का डर भर गया



ज़िंदगी पिंजरे में बंद पंछी की तरह थी “लाइट दे लिट्रेसी” ने हमें उड़ना सिखाया -Light de Literacy NGO IN DELHI

कहा जाता है की बच्चे गीली मिट्टी की तरह होते हैं अगर इन्हें सही समय पर सही आकार न दिया जाये तो ये बिखर जाते हैं। “लाइट दे लिट्रेसी” संगठन ने लाखों बच्चों को एक भविष्य दिया है। बता दें लाइट दे लिट्रेसी- "एक आशा नवनिर्माण की” एक प्रयास है उन बच्चों के लिए जो शिक्षा से



राजधानी में खरीदा जाता है कूड़े के लिए किराये का बचपन -Street children in Delhi

बच्चों का नाम जहाँ आता है वहां बचपने की एक तस्वीर आँखों के सामने आ जाती है, पर बदलते समय के साथ इस बचपन की तस्वीर धुंधली होती जा रही है। रोज़ाना हम सड़कों पर कूड़ा उठाते बच्चों को देखते हैं और उन्हें देखते ही हमारे ज़हन में बाल मजदूरी का ख़्याल आता है, पर मांजरा यहां कुछ औ



बच्चे नहीं, बिगड़ रहे है बड़े

आज का ज्वलंत सवाल 'बच्चे बिगड़ रहे है? जिसने हर किसी को परेशान कर रखा है कि जबकि सच तो यह है कि बच्चे नहीं अभिभावक बिगड़ रहे हैं. क्योंकि हमारी आदत है कि अपनी कमियां न देखकर सीधे दूसरे पर आरोप लगाने की रही है. अभिभावक और टीचर्स के बीच फं



आखिर क्यों हम अपने बच्चों को नहीं बचा पा रहे

आखिर क्यों हम अपने बच्चों को नहीं बचा पा रहे 1 दिसंबर 2017,कोलकाता के जीडी बिरला सेन्टर फाँर एजुकेशन में एक चार साल की बच्ची के साथ उसी के स्कूल के पी टी टीचर द्वारा दुष्कर्म। 31 अक्तूबर को मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल में कोचिंग से लौट रही एक युवती के साथ सामूहिक बलात्कार। इसी साल सितंबर में रेहान



समाज के भेड़िये

घर के बाहर अकेली खेल रही वंशिका को देख कर पड़ौस में रहने वाले सत्या ने मुस्कुरा कर पूछा " आज स्कूल नहीं गयी वंशी? वंशी ने भी चहकते हुए जवाब दिया "नहीं भैया, पता है आज बड़े बच्चे टूर पर गये हैं इसलिये मेरी छुट्टी हो गयी, अौर अब मैं पूरा दिन खेलूंगी "। " अरे वाह फिर त



यौन नहीं, नैतिक शिक्षा की जरूरत

आज बच्‍चों को यौन शिक्षा की नहीं, नैतिक शिक्षा की जरूरत है. बच्‍चों को नैतिक रूप से मजबूत बनाने की आवश्‍यकता है. यह तो ज्‍यादा पढे लिखे समझदार और जिम्‍मेदार लोगों का एक घटिया मजाक है समाज के साथ कि बच्‍चों को यौन शिक्षा दी जाए. क्‍या ज



06 सितम्बर 2015

नन्ही सी अभिलाषा

नन्ही सी अभिलाषादेखकर मुझे क्यों मुँह मोड़ लेते हो,हाथ तेरा थामती हूँ तो क्यों छोड़ देते हो। मेरी कुंठित व्यथा को सुनो, मैं भी एक इंसान हुँ, पापा जी , मैं भी तो आप ही की संतान हुँ।।मैं तो कभी भी नई खिलौने नहीं माँगती, मेला में जाने की जिद भी नहीं बांधती। घर की जुठा खा कर भी झाडू-पोछा कर लेती हूँ, आ





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