2019 के चुनाव अभियान में मर्यादाएं तार तार

2019 के इलेक्शन संपन्न हुए-गणतांत्रिक प्रक्रियाका एक मील का पत्थर. सारी गहमा-गहमी, उत्तेजना, भाषण, सभाएं इत्यादि कीअभी के लिए तो इति हुई.परन्तु गणतंत्र में चुनाव तो आम बात है और फिरचुनाव होंगे और होते रहेंगे. सभी (आम नागरिक) इस बात से सहमत होंगे किप्रतिस्पर्धता जो गणतंत्र में एक स्वस्थ घटना होनी चाह



' 2019 का चुनाव ' के अपने अलग तरह के रंग

' 2019 का चुनाव' के अपने अलग तरह के रंग डॉ शोभा भारद्वाज अबकी बार सात चरणों में चुनावहुये और लम्बे खिचे जितना मोदी जी समर्थक मोदी – मोदी के नारे लगते थे उतना हीराहुल गाँधी ने अपने समर्थको से नारा लगवाया चौकीदार उत्तर ‘चोर है’ देश के सबसे बड़े लोकतंत्रके प्रधानमंत्री जिन पर भ्रष्टाचार का एक भी



2019 के आम चुनाव के मुद्दे, क्या ‘‘स्थापित चुनावी मुद्दों से’’ हटकर हैं।

स्वतंत्रता प्राप्ति के पश्चात् वर्ष 2019 में देश का यह 17 वाँ आम चुनाव हो रहा है। प्रारंभ में स्वतंत्रता संग्राम में बढ़ चढ़ कर भाग लेने वाली पार्टी (सत्य से परे) एक मात्र कांग्रेस ही मानी जाती रही। वर्ष



चुनाव जीतने के हथकंडे

चुनाव जीतने के हथकंडे डॉ शोभा भारद्वाज लोकसभा केचुनावो का सीजन चल रहा है पहला चरण समाप्त हो गया अब दूसरे चरण का चुनाव हो रहा है| चुनाव जीतने केतरीके अब पहले जैसे नहीं रहे चुनाव आयोग की कोशिश रही है निष्पक्ष रूप सेचुनाव कराये जा सकें ,चुनावों में धन का अपव्यय न हो योग्य व्यक्तिचुनाव लड़ने



व्यक्ति नहीं विचार चुनिए

जब इलेक्शन हाई लेवल का हो तो कैंडिडेट को कौन पूछता है. व्यक्ति नहीं विचार चुनिए. विश्व की सबसे बड़ी लोकतांत्रिक व्यवस्था में एक अकेला थक जाएगा, इसलिए संगठित रूप से चुनाव लड़ने वाले एक विचारधारा के व्यक्तियों का चुनाव जरूरी है. कहीं की ईंट कहीं का रोड़ा भानुमति ने कुनबा जोड़ा वाली विचारधारा का जीतना



दौर चुनावी युद्धों का

दौर चुनावी युद्धों का✒️जड़वत, सारे प्रश्न खड़े थेउत्तर भाँति-भाँति चिल्लाते,वहशीपन देखा अपनों काप्रत्युत्तर में शोर मचाते।सिर पर चढ़कर बोल रहा थावह दौर चुनावी युद्धों का,आखेटक बनकर घूम रहेजो प्रणतपाल थे, गिद्धों का।बड़े खिलाड़ी थे प्रत्याशीसबकी अपनी ही थाती थी,बातें दूजे की, एक पक्ष कोअंतर्मन तक दहलाती थ



चुनावी मौसम में

चुनावी मौसम में झूठ पर झूठ बोली जाएगी,खाई जाएगी,परोसी जाएगी,झूठ चासनी में डुबायी जाएगी। बड़े प्यार से खिलायी जाएगी। उसकी बन्दिशें हटायी जाएंगी। चुनाव की होली है। कई हफ्तों खेली जायेगी। कीचड़ उछाल खेली जायेगी। झूठ को मौका है अभी जी भर के इतराएगी । आखिर में उसकी असली जगह जनमत द्वारा दिखा दी जायेगी।



सपा-बसपा ने UP में बांटीं लोकसभा सीटें, पढ़ें- कहां कौन किस सीट पर लड़ेगा चुनाव

उत्तर प्रदेश में सपा-बसपा के बीच सीटों को लेकर सहमति बन गई है. सूबे में बसपा को सपा से ज्यादा सीटें मिली हैं. बसपा के खाते में 38 सीटें गई हैं तो सपा को 37 सीटें मिली हैं. दोनों पार्टियां किन-किन सीटों पर चुनावी मैदान में उतरेंगी इसकी घोषणा कर दी गई है.लोकसभा चुनाव 2019 में बीजेपी को मात देने के लिए



‘‘कुंभ’’ ‘‘महाकुंभ’’ और ‘‘अर्धकुंभ’’ में क्या कोई अंतर हैं?

प्रयागराज (इलाहबाद) में मकर संक्र्राति से ‘‘अर्धकुंभ’’ प्रारंभहुआ है। लेकिन इस अर्धकुंभ को केन्द्रीय सरकार से लेकर उत्तर प्रदेश सरकार व समस्तमीडिया चाहे वह प्रिंट हो या इलेक्ट्रानिक इसे कुंभया महा!कुंभ कहकर महिमा-मंडित कर रहे हैं। इस ‘‘कुंभ’’ के जबरदस्तप्रचार-प्रसार के कारण ही मुझे भी यह शक हु



चुनावी समर

इस चुनावी समर का हथियार नया है। खत्म करना था मगर विस्तार किया है। जिन्न आरक्षण का एक दिन जाएगा निगल, फिलहाल इसने सबपे जादू झार दिया है। अब लगा सवर्ण को भी तुष्ट होना चाहिए। न्याय की सद्भावना को पुष्ट होना चाहिए। घूम फिर कर हम वहीं आते हैं बार बार, सँख्यानुसार पदों को संतु



BJP से सांसद चंदेल, कुंवर पुष्पेंद्र सिंह जीवनपरिचय

2019 लोकसभा चुनाव कुंवर पुष्पेन्द्र सिंह चंदेल भारतीय जनता पार्टी के सदस्य हैं और हमीरपुर, उत्तर प्रदेश (लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र) से भारतीय आम चुनाव, 2014 जीत चुके हैं। पुष्पेंद्र सिंह चंदेल का जन्म 8 अक्टूबर 1973 को महोबा (उत्तर प्रदेश) में हुआ था। इनके पिता का नाम राजा हरपाल सिंह चंदेल और माता का



BJP से सांसद संजीव बाल्यान जीवनपरिचय

2019 लोकसभा चुनाव संजीव बाल्यान भारतीय जनता पार्टी के सदस्य हैं। 2014 में लोकसभा में उन्हें मुज़फ्फरनगर निर्वाचन क्षेत्र से भारतीय आम चुनाव के लिए चुना गया था। जिसमें उन्होंने बहुजन समाज पार्टी के कादिर राणा को चार लाख से अधिक मतों के अंतर से हराया। संजीव बाल्यान मई 2



चुनाव चिन्ह जूता।

चुनाव चिन्हजूता।लोकलाज सबत्याग, जूता निशानबनाया।झाड़ू से सफाईकर, बाद मे जूतादीना।पढ़ लिख करमति बौराई, कौन इन्हेसमझाए?लोक सभा चुनावसे पहले जूता निशान बनाए।हरि बैल,खेत-किसान, खत का निशान मिटाया।वीर सपूतोकी फाँसी वाली रस्सी को ठुकराया।उन वीरांगनाओको भूल गए जिसने खट्टे दाँत किये।दिल्ली कोबना के चमचम, पूरे



2019 लोकसभा चुनावी ऐलान से पहले ही मोदी ने फूंका चुनावी बिगुल, विपक्ष अभी भी नींदों में

2019 लोकसभा चुनावों को लेकर सारी पार्टियां अपने जीत की जद्दोज़हद में लग गए हैं। इस बार पूरा विपक्ष एक होता दिख रहा है वहीं मोदी सरकार की मुश्किलें बढ़ती दिखाई दे रही हैं। लेकिन एक कहावत है कि जंगल में एक ही शेर होता है और भाजपा इस वाक्य को सही साबित करने में लगी हुई है। इसी के चलते अभी बाकि पार्टियां



तय हैं 2019 में भाजपा की हार ?

महज कुछ ही घंटे बचे हैं नए साल के आगमन मैं और साल शुरू होने से पहले ही हर एक भारतीय के मन से सबसे बड़ा और पहला प्रश्न यही हैं की ,क्या 2019 में मौजूदा प्रधानमंत्री के निर्देशन वाली भाजपा सरकार दोबारा से सत्ता पर काबिज हो पाएगी या नही । मौजूदा हालात पर गौर करे तो , जिस प्रकार पिछले कुछ महीनों मे



इन 2 वजहों से राहुल गाँधी बने देश के सबसे पसंदीदा नेता, मोदी जी आपको सीखना पड़ेगा…..

कर्नाटक चुनाव प्रचार के बीच कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने 2019 आम चुनाव के लिए बड़ा बयान दिया है। राहुल गांधी ने कहा कि अगर 2019 में कांग्रेस जीतती है तो वे प्रधानमंत्री बन सकते हैं। साथ ही राहुल गांधी ने बहुत ही दावे के साथ कहा कि 2019 में बीजेपी सरकार नहीं बनाएगी और ना ही नरेंद्र मोदी प्रधानमंत्



‘मामा’ से 30 गुणा अमीर हैं मध्य प्रदेश के नए सीएम - 5 साल में संपत्ति बढ़के हुई ......

विधानसभा चुनावों में जीत के बाद अब कांग्रेस बड़ी ही जोर शोर से अपने मुख्यमंत्री पद के दावेदारों को पद की शपथ दिलाने की तैयारी में जुटे हुए हैं। बता दें कि भोपाल में कमलनाथ की ताजपोशी की तैयारियां पूरी हो चुकी हैं। कल सुबह यानी 18 दिसंबर को कमलनाथ जम्बूरी मैदान में मध्य प्रदेश के 18वें मुख्यमंत्री के



शर्मनाक : जश्न में मस्त कांग्रेस कार्यकर्ता ने 'मोदी' बन उठाई चाय की केतली, हुई आलोचना |

देश के पांच राज्यों में 7 दिसंबर को विधानसभा चुनाव संपन्न हुए थे और मंगलवार 11 दिसंबर को इन चुनावों के परिणाम सामने आए थे। परिणाम में पता चला कि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) पांच में से किसी एक राज्य का चुनाव भी जीत न सकी उल्टा कांग्रेस ने भाजपा द्वारा शासित तीन राज्यों में



राहुल गाँधी के फैसले से नाराज़ सचिन पायलट, अब ये होंगे राजस्थान के नए CM

पांच राज्यों में हुए विधानसभा चुनावों में बीजेपी की हालत जहां खस्ता है, वहीं कांग्रेस की चांदी हो गई है। हिंदी बेल्ट के तीन राज्यों छत्तीसगढ़, राजस्थान और मध्य प्रदेश में कांग्रेस ने बीजेपी का कमल नहीं खिलने दिया है। वहीं तेलंगाना में सत्तारूढ़ TRS ने धमाकेदार वापसी की है, तो मिजोरम में मिजो नेशनल फ



केजरीवाल पर फेंकी गई लाल मिर्च की कीमत जानकर हो जायेंगे आप हैरान

भारत में जब भी अगर बात चुनाव की आती है तो यहाँ हर कोई इस चुनावी माहौल को गर्माने में लग जाता है और फिर चाहे वो पार्टियाँ या आमजान।सरकार 'पॉपुलर' घोषणाएं करने लगती है, नेता एक-दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप करने लगते हैं, जिससे सोशल मीडिया पर बहस नए रूप ले लेती है।जो कि चुनावमयी माहौल का ही एक हिस्सा है।



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