26 फरवरी 2015

सुधार किसका होना जरूरी है

एक बार स्वामी विवेकानंद जी से किसी ने जिज्ञासा की और अपना प्रश्न पूछा .."हिन्दुओं में बाल विवाह होता है, ये गलत है, हिन्दू धर्म में सुधार होना चाहिए ! स्वामी जी ने उस से पूछा :-"क्या हिन्दू धर्म ने कभी कहा है कि प्रत्येक व्यक्ति का विवाह होना चाहिए और वह विवाह उसके बाल्यकाल में ही होना चाहिए " प्र



गांधी बनाम गोडसे बनाम लोकतंत्र

आज गांधी जी की पुण्य-तिथि है। अख़बार और नेट पर भी एक दो ही सन्देश देखने को मिले। शायद महापुरुषो की महानता भी हमारी राजनीति की मोहताज है। शायद इस सरकार में गांधी को गोडसे से रेप्लेस कर दिया जाये, क्योंकि हिंदुत्व, हिन्दूदेश का नारा तो यही दे सकते हैं। संविधान के महत्वपूर्ण शब्दों में बदलाव का प्रयास



सनातन वृक्ष

सनातन वृक्ष की एक ही प्रकृति (अयन) है, दो फल हैं-(सुख तथा दुख), तीन मूल हैं (सत, रज, तम), चार रस हैं (धर्म, अर्थ, काम, मोक्ष), पंच विध (पंचेंद्रिय), छ: स्वभाव (उत्पन्न होना, स्थिर होना, बढ़ना, परिवर्तित होना, घटना और नष्ट हो जाना), सात वल्कल (रस, रुधिर, मांस, मेद, अस्थि, मज्जा, वीर्य), आठ शाखा (पंच



गढ़ कुंडार : एक ऐतिहासिक महत्त्व का दुर्ग ही नही बल्कि राष्ट्र धर्म और जुझारू संस्कृति का जनक

जुझारू संस्कृति का जनक गढ़ कुण्डार अशोक सूर्यवेदी नक्षत्रों में सूर्य सी आभा लिए जुझौती (आधुनिक बुंदेलखंड ) का प्राचीनतम और पवित्रतम दुर्ग, गढ़ कुंडार एक ऐतिहासिक महत्त्व का दुर्ग ही नही बल्कि राष्ट्र धर्म और जुझारू संस्कृति का जनक भी है!अपने एक सह्त्राब्दी के जीवन काल में इस गढ़ ने अनेकानेक राजनैति



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