मंगलाचरण :--- आचार्य अर्जुन तिवारी

*प्राचीन भारतीय संस्कृति में मनुष्य को तो महत्त्व दिया ही है साथ ही उसके आचरण को कहीं अधिक महत्व दिया गया है मनुष्य अपने जीवन में जाने - अनजाने अनेक प्रकार के गलत आचरण किया करता है इसीलिए किसी भी शुभ मंगल कार्य करने से पहले मंगलाचरण करने की व्यवस्था हमारे पूर्वजों ने बनाई थी | इसका प्रारंभ मनुष्य के



सनातन की सहिष्णुता :-- आचार्य अर्जुन तिवारी

*आदिकाल में जब सृष्टि का विस्तार हुआ तब इस धरती पर सनातन धर्म के अतिरिक्त और कोई धर्म नहीं था | सनातन धर्म ने मानव मात्र को अपना मानते हुए वसुधैव कुटुंबकम की घोषणा की जिसका अर्थ होता है संपूर्ण पृथ्वी अपना घर एवं उस पर रहने वाले मनुष्य एक ही परिवार के हैं | सनातन धर्म की जो भी परंपरा प्रतिपादित की



भक्ति क्या है ?? :-- आचार्य अर्जुन तिवारी

*आदिकाल से ही इस धरती पर अनेकों भक्त हुए हैं जिन्होंने भगवान की भक्ति करके उनको प्राप्त करने का अनुभव किया है | अनेकों भक्तों तो ऐसे भी हुए जिन्होंने साक्षात भगवान का दर्शन भी किया है | भक्ति की महत्ता का विस्तृत वर्णन हमारे शास्त्र एवं पुराणों में देखने को मिलता है | भक्ति क्या होती है ? इसको बता



स्वंयवर

सीता स्वंयवर पर .....कैसे मैं पहचानू उन्हें.कैसे मैं जानूं के वो बनें हैै वो मेरे लिए.होगी सैकड़ों की भीड़ वहां.तेजस्वी और वैभवशाली तो होंगेवहां कई और भी.लेकिन सुना है मैंनें शिव का धनुषउठा सकेंगे कुछ ऐसे प्र



भविष्य की आवाज।

भविष्य की आवाज।जुबा चुप ही सही सत्य बोलताहैं, गरीब ही अमीरी को जानता हैं।लम्हे कितने भी दुख भरे होजीवन की राह मे, चलते रहो मंजिल की तरफ। जिसे मजदूर अपनी जरूरत समझताहैं, अमीर उसे अपना सौक समझता हैं।मोटा दाना खाने वाले को दिमागसे मोटा कहते हैं,चना खाकर घोड़ा दौड़ता हैं।मक



जोगी बनना कहां आसान है ?

आसान नहीं है ज़िंदगीजीने का तरीका सीखलाना.आसान नहीं किसी कोसही राह दिखाना.आसान नहीं है खुद को भी बदलना, कुछ ख़्वाहिशोंको छोड़ना, कुछ सुविधाओं को त्यागना.त्याग की अग्नी में तपना औरउम्मीद के दीपक जलाना.धूप, बारिश, और ठंडको सहना.होंठो पर शिकायत कम और समाधाननिकालना.हां सचम



सत्यनारायण व्रत कथा :--- आचार्य अर्जुन तिवारी

*सृष्टि के आदिकाल से ही इस धरा धाम पर मनुष्य विचरण कर रहा है | मनुष्य ने अपने जीवन को सुचारू ढंग से चलाने के लिए जहां अनेकों प्रकार के संसाधन बनाएं वही समय-समय पर वह ईश्वर का भी आश्रय लेता रहा है इसके लिए मनुष्य ने वैदिक कर्मकांड एवम पूजा पाठ का सहारा लिया | सतयुग से लेकर के त्रेता , द्वापर तक ईश्वर



मीरा के वचन मोहन के लिए

भेजा था विष का प्याला अमृत बन गया। भेजा था विषैला सांपफूलों का हार बन गया। तेरी ही करामात है ये मोहनकि कलियुग में भी जी रही हूं। बिना डरे तेरी भक्ति के गीतगा रही हूं। शिल्पा रोंघे



भारतीय संस्कृति में जन मानस में धार्मिक आस्था

भारतीय संस्कृति में जन मानस में धार्मिक आस्थाभारत में उत्तर से दक्षिण तक और पूरबसे पश्चिम तक अनगिनत जातियाँ हैं | उन सबके अपने अपने कार्य व्यवहार हैं, रीतिरिवाज़ हैं, जीवन यापन की अनेकों शैलियाँ हैं, अनेकों पूजा विधियाँ हैं, उपासना केपंथ हैं और अनेकों प्रकार के कर्म विस्तार हैं, तथापि उनका धर्म एक ही



संविधान दिवस (26 नवम्बर)

: संविधान की प्रस्तावना : हम भारत के लोग, भारत को एक संपूर्ण प्रभुत्व संपन्न, समाजवादी , धर्मनिरपेक्ष, लोकतंत्रात्मक गणराज्य बनाने के लिए तथा उसके समस्त नागरिकों को सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक न्याय, विचा



धार्मिक विश्वास और त्याग भावना

धार्मिक विश्वास और त्याग भावना हम प्रायः दो शब्द साथ साथ सुनते हैं– संस्कृति और धर्म | संस्कृति अपने सामान्य अर्थ में एक व्यवस्था का मार्ग है, औरधर्म इस मार्ग का पथ प्रदर्शक, प्रकाश नियामक एवं समन्वयकारी सिद्धान्त है | अतःधर्म वह प्रयोग है जिसके द्वारा संस्कृति को जाना जा सकता है | भारत में आदिकाल स



धर्म: इस अमावस्या हनुमानजी के सामने जलाएं दीपक, फिर करें इस तरह पूजा

मंगलवार का दिन बजरंगबली का होता है और इस दिन इनकी पूजा करने से हर किसी की मनोकामनाएं पूरी हो जाती हैं। बस इस पूजा को बहुत अच्छे और सावधानीपूर्वक करना चाहिए जिससे हनुमानजी को प्रसन्न करने में आसानी रहे। इसके अलावा कुछ ऐसे भी पर्व होते हैं जिस दिन हनुमानजी की पूजा करने से उचित लाभ मिलता है। और इस बार



द्वादश तिलक :--- आचार्य अर्जुन तिवारी

*सनातन धर्म में नित्य पूजन एवं त्रिकाल संध्या का विधान आदिकाल से चला आ रहा है | त्रिकाल संध्या करके मनुष्य स्वयं में ऊर्जा प्राप्त करता चला आया है | किसी भी पूजन / अनुष्ठान का मुख्य अंग है तिलक धारण करना क्योंकि बिना तिलक लगाये किया जाने वाला कोई भी पूजा / पाठ - शुभकार्य फलीभूत नहीं होता है | हमारे



जनम जनम की बात है

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संस्कृति का सच और अश्लीलता पर हल्ला

(जो देश चांदतारों, मंगल पर पहुंच कर इठला रहे हैं,विज्ञान के नए-नए आविष्कार कर देश के लिए खुशियां समेट रहे हैं,उन की तुलना में हम कहां हैं ? पढ़ कर आप कीआंखें खुली की खुली रह जाएंगी ।)अधिकतरभारतीय जानते ही नहीं कि, संस्कृति है क्या ? जिसे वे अपनी संस्कृति बता रहेहैं, क



वृषभ(Taurus) राशि को इन तीन राशि से है खतरा - हो सकता है बड़ा नुकसान

वृषभ राशि वाले जातको के लिए कोनसी राशि के जातक मित्र है और कोनसी राशि के जातक शत्रु ,यह जानना बहुत जरुरी है| यदि आपकी राशि वृषभ है तो आपको किन राशि वालो से मित्रता करनी चाहिए और किन राशि वालो से दूर रहना चाहिए | यह भी वृषभ राशि वालो के लिए



कार्तिक पूर्णिमा :--- आचार्य अर्जुन तिवारी

*सनातन धर्म में समय - समय पर अनेक व्रत / त्यौहार मनाये जाते रहते हैं | यहाँ शायद ही कोई दिन ऐसा हो जिस दिन कोई व्रत या पर्व न मनाया जाता हो | कार्तिक मास तो सबसे दिव्य है | अनेक अलौकिक , पौराणिक एवं लोक मान्यताओं के रूप में अनेक त्योहारों को स्वयं में समेटे हुए कार्तिक मास का आज समापन हो रहा है | जह



वैकुण्ठ चतुर्दशी :--- आचार्य अर्जुन तिवारी

*सनातन धर्म मैं कार्तिक मास का बहुत महत्वपूर्ण स्थान है | अनेक त्योहारों एवं पर्वों को स्वयं में समेटे हुए कार्तिक मास अद्वितीय है | सनातन धर्म में अनेक देवी-देवताओं का पूजन उनके विशेष दिन पर होता है परंतु आज कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी को भगवान शिव और भगवान विष्णु का पूजन एक साथ करने का व



हरिप्रबोधिनी एकादशी :--- आचार्य अर्जुन तिवारी

*सनातन धर्म में चातुर्मास्य का विशेष महत्त्व है | चार महीने चलने वाला यह विशेष समय भगवत्भक्ति प्राप्त करने वाले साधकों के लिए महत्त्वपूर्ण होता है | आषाढ़ मास के शुक्लपक्ष की एकादशी अर्थात हरिशयनी एकादशी को जब भगवान सूर्य मिथुन राशि पर जाते हैं तो चातुर्मास्य प्रारम्भ हो जाता है | हरिशयनी का अर्थ हो



Guru Purnima 2019 -गुरु मंत्र की महिमा

हर परम्परा का अपना एक गुरु मंत्र होता है और किसी भी मंत्र को गुप्त रूप से और मौखिक रूप से एक गुरु द्वारा संप्रेषित किया जाता है जो उस व्यक्ति के लिए एक गुरु-मंत्र बन जाता है, जिसके लिए इसका संचार किया जाता है



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