दोहा

महोदय आपको सादर प्रणाम मैंने कुछ दोहे आपको लिंक में भेंजे है आपको अच्छा लगे तो सूचित करे ...और प्रकाशित कर सके तो बड़ी कृपा होगी बहुत बहुत धन्यबाद रुपेश धनगर मथुरा 9410490520 9760986966



दोहा

"दोहा"चाँद आज का मनचला, करता बहुत किलोल।लुक्का-छुप्पी खेलकर, हो जाता है गोल।।-1साजन करवा चौथ का, है निर्जल उपवास।जल्दी लाना चाँद घर, चिलमन चलनी खास।।-2मुखड़ा तेरा देखकर, बुझ जाएगी प्यास।साजन तुम दीर्घायु हो, यहीं चाँद से आस।।-3रूप निखारूँगी सजन, कर सोलह शृंगार।तेरे खातिर रात-दिन, रहती पिय बेजार।।-4चा



दोहा द्वादसी

विजय दशमी विशेष "दोहा द्वादसी"रावण के खलिहान में, चला राम का तीर।लंका का कुल तर गया, मंदोदरी अधीर।।-1दश दिन के संग्राम में, बीते चौदह साल।मेघनाथ का बल गया, हुआ विभीषण लाल।।-2कुंभकरण सोता रहा, देख भ्रात अनुराग।सीता जी की आरती, हनुमत करते जाग।।-3कैकेई को वर मिला, सीता को वनवास।राम ढूढ़ते जानकी, खग मृग



आरे में आरी

हमें काटते जा रहे ,पारा हुआ पचास।नित्य नई परियोजना, क्यों भोगें हम त्रास।।धरती बंजर हो रही ,बचा न खग का ठौर।बढ़ा प्रदूषण रोग दे ,करिये इस पर गौर ।।भोजन का निर्माण कर ,हम करते उपकार।स्वच्छ प्राण वायु दिये , जो जीवन आधार ।।देव रुप में पूज्य हम ,धरती का सिंगार ।है गुण का भंडार ले औषध की भरमार ।।संतति



शरद ऋतु

🌹सिंहावलोकनी दोहा मुक्तक🌹"""""""""""""""""""""""दस्तक देती शरद ऋतु , मन मुखरित उल्लास ।जूही की खुशबू उड़े, पिया मिलन की आस।।आस किसी की मैं करूँ , जो ना आएं पास ।बाट निहारें दृग विकल टूट रहा विश्वास ।।🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹व्यंजना आनंद ✍



शरद ऋतु

🌹सिंहावलोकनी दोहा मुक्तक🌹"""""""""""""""""""""""शरद ऋतु करे आगमन, मन होए उल्लास ।जूही की खुशबू उड़े, पिया मिलन की आस।।आस किसी की मैं करूँ , जो ना आएं पास ।नित देखू राह उसकी, जाता अब विश्वास ।।🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹व्यंजना आनंद ✍



दोहावली

शिक्षक दिन पर व मंच व मित्रों को हार्दिक बधाई, गुरुजनों को नमन! ॐ जय माँ शारदा!"दोहा"शिक्षक दिन पर आप को, बहुत बधाई मीत।मिला ज्ञान इनसे सुखद, गौतम गाए गीत।।बहुत धीर गंभीर हैं, लिए ज्ञान का बोधनमन करूँ शारद पुता, नित नव नूतन शोध।।माँ शारद संचित करो, मेरे अंदर ज्ञान।नमन करूँ आराध्य को, जय गणेश भगवान।।



दोहा

"दोहा"कश्मीर संग देखिए, सगर हिन्द के घाट।भेद-भावना मिट गई, खुली प्यार की हाट।।-1जन-जीवन हर्षित हुआ, सुधरी भारी भूल।घाटी की रौनक बढ़ी, खिले प्यार के फूल।।-2बड़े शान से आ मिले, गले हजारों हाथ।न्याय मिला इंसान को, झंडा डंडा साथ।।-3लहराते हैं तरु सभी, देवदार कचनार।फहर रहा झंडा लहर, अरु भारती विचार।।-4बड़े



दोहा

कुछ दोहेदिया हाथ में हाथ है, दिल भी इसके साथ।करना दिल से जतन तुम, मेरे कोमल हाथ।।-1दिल की गागर कोमली, रखना अपने पास।छूट न जाये हाथ से, अति सुन्दर अहसास।।-2कभी छोड़ जाना नहीं, मर्म मुलायम साथ।मिलते हैं दिल खोलकर, मतलब के भी हाथ।।-3कर जाती हैं आँख यह, हाथों के भी काम।दिल की नगरी कब बसी, चाहत राहत आम।



दोहा

"दोहा"व्यंग बुझौनी बतकही, कर देती लाचारसमझ गए तो जीत है, बरना दिल बेजार।।हँस के मत विसराइये, कड़वी होती बात।व्यंग वाण बिन तीर के, भर देता आघात।।सहज भाव मृदुभासिनी, करती है जब व्यंग।घायल हो जाता चमन, लेकर सातों रंग।।व्यंग बिना बहती नहीं, महफ़िल में रसधार।इक दूजे को नोचकर, देते हैं उपहार।।बड़े-बड़े घंटाल



"दोहावली" नमन शहीदों को नमन, नमन हिंद के वीर। हर हालत से निपटते, आप कुशल रणधीर।।

"दोहावली"नमन शहीदों को नमन, नमन हिंद के वीर।हर हालत से निपटते, आप कुशल रणधीर।।-1नतमस्तक यह देश है, आप दिए बलिदान।गर्व युगों से आप पर, करता भारत मान।।-2रुदन करे मेरी कलम, नयन हो रहे लाल।शब्द नहीं निःशब्द हूँ, कौन वीर का काल।।-3राजनयिक जी सभा में, करते हो संग्राम।जाओ सीमा पर लड़ो, खुश होगी आवाम।।-4वोट



"सिंहावलोकनी दोहा"

विधान- 13-11 की यति, चौपाई की अर्धाली व दोहा का सम चरण, सम चरण का अंतिम शब्द विषम चरण का पहला शब्द हो, यही इस दोहा की विशेषता है"सिंहावलोकनी दोहा" परम मित्र नाराज है, कहो न मेरा दोष।दोष दाग अच्छे नही, मन में भरते रोष।।-1रोष विनाशक चीज है, भरे कलेश विशेष।विशेष मित्र



भास्कर मलीहाबादी

पंख लगा देता अगर,छेरी_के_करतार ।तो हरियाली से रहित,_होता यह संसार ।। -भास्कर मलीहाबादी



"दोहावली"

"दोहावली"गली छोड़ कर क्यूँ गए, ओ मेरे मन मीतकोयल अब गाती नहीं, सुबह सुरीली गीत।।-1दूर जा रहें हैं सभी, जैसे जूनी रीत।गाँव छोड़ कर बस रहे, शहर अनोखी प्रीत।।-2सुना रहे हैं अब सभी, अपने मन की गीत।मानों ओझल हो गई, लोक प्रीत संगीत।।-3बूढ़ी दादी की कथा, अरु चौपाली हीत।शंकित लगती चाल है, दम्भित लगते मीत।।-4फै



"दोहावली"

"दोहावली"हँसते मिलते खेलते, दिल हो जाता खास।प्रेम गली का अटल सच, आपस का विश्वास।।-1राधा को कान्हा मिले, मधुवन खुश्बू वास।थी मीरा की चाहना, मोहन रहते पास।।-2गोकुल की गैया भली, थी कान्हा के पास।ग्वाल-बाल की क्या कहें, हुए कृष्ण के दास।।-3यशुदा के दरबार में, दूध दही अरु छास।मोहन मिश्री ले उड़े, माखन मुख



"दोहावली"

"विधा- दोहा"बादल है आकाश में, लेकर अपना ढंगइंद्रधनुष की नभ छटा, चर्चित सातों रंग।।-1दाँतों में विष भर चला, काला नाग भुजंग।नाम सुने तो डर गए, सर्प मुलायम अंग।।-2जीवन की अपनी व्यथा, हर जीवों के संग।इक दूजे को हम सभी, क्यों करते हैं तंग।।-3सरेआम होता गया, नियम नगर का भंग।कभी टूटते हैं महल, कभी झोपड़ी तं



"दोहा"इंसानों के महल में पलती ललक अनेक।

"दोहा"इंसानों के महल में पलती ललक अनेक।खिले जहाँ इंसानियत उगता वहीँ विवेक।।जैसी मन की भावना वैसा उभरा चित्र।सुंदर छाया दे गया खिला साहसी मित्र।।अटल दिखी इंसानियत सुंदर मन व्यवहार।जीत लिया कवि ने जगत श्रद्धा सुमन अपार।।महातम मिश्र गौतम गोरखपुरी



अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस पर प्रस्तुत दोहावली

अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस पर प्रस्तुत दोहावली "दोहा"भोर हुई निकलो सजन महके बगिया फूल।हाथ पाँव झटकार लो आलस जाओ भूल।।-१रात देर तक जागते दिन भर घोड़ा बेंच।सोते हो तुम देर तक अब तो चादर खेंच।।-२ऋषियों की यह देन है दुनिया करती योग।बिन हर्रे बिन फिटकरी भागे सगरो रोग।।-३ऋषियों की



“दोहा”

“दोहा”चक्र सुदर्शन जोर से घूम रहा प्रभु हाथरक्षा करें परमपिता जग के तारक नाथ।।-१ जब जब अंगुली पर चढ़ा चक्र सुदर्शन पाशतब तब हो करके रहा राक्षस कुल का नाश।।-२ महातम मिश्र गौतम गोरखपु



"दोहा"

"दोहा"हरिहर तुम बिन कौन अब हरे जगत की पीर मंशा मानस पातकी शीतल करो समीर।।-१प्रभु आया तुम्हरी शरण तुम हो तारणहारतन मन धन अर्पण करूँ हे जग पालनहार।।-२सुख संपति सुंदर भवन निर्मल हो व्यवहारघात हटे घट-घट घृणा घटना हटे कुठार।।-३मूरख मनवा हरि बिना भरे न भव्य विचारकामधेनु बिन बाछ



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