जहाँ हुए बलिदान मुखर्जी वो कश्मीर हमारा है...

जहाँ हुए बलिदान मुखर्जी वो कश्मीर हमारा है. श्यामा प्रसाद मुखर्जी, जनसंघ के संस्थापक, हिन्दू महासभा के के अध्यक्ष , कलकत्ता यूनिवर्सिटी के वाइस चांसलर, मुस्लिमलीग की सरकार में मंत्री, नेहरू सरकार में मंत्री.



" खुदीराम बोस - 18 वर्ष ८ महिने 8 दिन और फ़ासी " क्या देश भूल गया इस वलिदान को ?

वह केवल 18 वर्ष का था, जब उसे 1908 में बिहार के मुजफ्फरपुर में एक हमले और तीन अंग्रेजों की हत्या के लिए मौत की सजा सुनाई गई थी। एक सदी बीत चुकी है, फिर भी खुदीराम बोस का नाम परछाइयों में है।भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के सबसे युवा क्रांत



हिंदी लेखन का विस्तार ?

शब्दनगरी को कैसे और बेहतर व ज़्यादा से ज़्यादा लोगों से जोड़ सकते है ? कैसे एक राष्ट्रीय विख्यात मंच बना सकते है कि जैसे २०१५ में thequint thewire बने और आज देश की प्रमुख website media news में एक हैं वैसे ही हिंदी लेखन में कैसे हम इसे उस स्तर पे ले जा सकते है ?



उधम सिंह - इतिहास के शब्दों तक ही क्यों जीवित ?

प्रस्तावना - भारतीय क्रांतिकारी इतिहास प्रायः अनैतिक रूप से दो भागों में बाँट दिया गया जो कि उन सभी बलिदानियों के ऊपर आज़ाद भारतियों का कलंक है, जिसका हमें स्वयं ही अभाश नहीं हैं | तथाकथित स्वतंत्रता का राजनीतिकरण कर विद्यार्थियों व् देशवासिओं को त्याग,



गोडसे की विचारधारा में गांधीवाद की खोज ( भाग 1)

कहते है कि महात्मा गांधी की हत्या 30 जनवरी 1949 में नाथू राम गोडसे ने की थी. यह अपने आप में पूरा सत्य नहीं है. यदि हम गांधी और गोडसे को व्यक्ति के रूप में देखे तो यही सत्य है, पर गाँधी और गोडसे को एक विचारधारा के रूप में देखे तो यह अर्ध सत्



कविता खुशबू का झोंका

कविता खुशबू का झोंका, कविता है रिमझिम सावनकविता है प्रेम की खुशबू, कविता है रण में गर्जनकविता श्वासों की गति है, कविता है दिल की धड़कनहॅंसना रोना मुस्काना, कवितामय सबका जीवनकविता प्रेयसी से मिलन है, कविता अधरों पर चुंबनकविता महकाती सबको, कव



ज़िंदगी ?

अगर जीवन बोझ लगने लगे तो क्या करना चाहिए ?



डाल डाल की दाल (व्यंग्य)

"दाल रोटी खाओ प्रभु के गुण गाओ "बहुत बहुत वर्षों से ये वाक्य दोहरा कर सो जाने वाले भारतीयों का ये कहना अब नयी और मध्य वय की पीढ़ी को रास नहीं आ रहा है।दाल की वैसे डाल नहीं होती लेकिन ना जाने क्यों फीकी और भाग्य से प्राप्त चीजों की तुलना



bacche aur mata pita

जय श्री कृष्ण मित्रो ... #हक़ीक़त ये भी है कि आज बच्चों के माता पिता बने रहने की बजाय उनके मित्र बनने की कोशिश करें ।अपनी मनमर्जी थोपने की बजाय उनकी खुशियों पर भी ध्यान दें तभी समाज को विकृति से बचाया जा सकता है ।बच्चों के साथ बैठना ,उन्हें सही संस्कार देना और घरों मे



कीर्ति के लिए क्या secular लोग माँगेंगे इंसाफ़? क्या bjp साफ़ करेगी अपना द्रष्टिकोंण?

दो प्रशन सिर्फ़ मेरे पहला क्या हिंदू-मुस्लिम का भेद ख़ुद social-media व news-media द्वारा किया जाता है? कोई क्यों न्याय की भावना से नहीं कहता लड़का मुनासिर है लड़की कीर्ति ? यहीं अगर इसका विरूद्ध प्रकरण होता तो हर जगह बात सुनी जाती ,मुस्लिम समाज व secular-बुध्ह्जीवी c



प्यार और प्यार मे क्या अंतर है?

प्यार प्यार मे अंतर ?



विफलता?

मेरे प्यारे दोस्तों, या यूँ कहूं कि मेरे दसवीं , बारहवीं और प्रतियोगी परीक्षा के अचयनित दोस्तों। ये लेख विर्निदिष्टतः आपके सब के लिए ही लिख रहा हूँ जो किसी परीक्षा में विफल हो जाने पर आत्महत्या जैसे बेतुके विचारो को अपने मष्तिष्क द्वारा आमंत्रित करते है। और क



ऊँची नाक का सवाल (व्यंग्य)

इस दौर में जब देश में बाढ़ का प्रकोप है तो नाक से सांस लेने वाले प्राणियों में नाक एक लक्ष्मण रेखा बन गयी है ,पानी अगर नाक तक ना पहुंचा तो मनुष्य के जीवित रहने की संभावना कुछ दिनों तक बनी रहती है,बाकी फसल और घर बार उजड़ जाने के बाद आदमी कितने दिन जीवित रहेगा ये उतना ही बड़ा सवाल है जितनी कि हमारे देश म



रिजेक्शन

धीरज जैसे ही बाइक खड़ी कर हेलमेट उतारता है, वैसे ही बगल वाली सविता आंटी की आवाज़ आती है, "क्यों धीरज बेटा, इंटरव्यू देकर आ रहे हो? "जी आंटी" "अब तक तो कई इंटरव्यू दे चुके हो, कहीं कुछ बात नहीं बनी क्या?" ह



24 जुलाई 2019

भारत में सबसे ज्यादा बिकने वाले स्मार्टफोन से हैं?

इसके बरेमे पूरी जानकारी यही दी हुई है



बच्चों के लिए 3 शिक्षाप्रद कहानियां

बच्चों के लिए ये तीन कहानियां 2018 में नींव पत्रिका में प्रकाशित हुई .1) - सामान्य जीवनबीनू बंदर अपने घर में सबका लाडला था। उसकी हर तरह की ज़िद पूरी की जाती थी। उसका परिवार भारत के उत्तराखण्ड प्रदेश स्थित जिम कॉर्बेट राष्ट्रीय पार्क में रहता था। जंगल में अन्य



परख

ज़रूरी नहीं कि जो दिखता है वो वही होता है, थोड़ा बहुत परख लेना किसी को सही होता है. हर कोई वो करता है,जो भी आप देखना चाहे, होता आप के साथ है,ध्यान और कहीं होता है. थोड़ा बहुत परख लेना किसी को सही होता है. सब के अपने ही तरीके हैं,संस्कार तो फीकें हैं, दिखावा करते है



चाँद की धरती पर इंसान का पहला कदम...

20जुलाई से ठीक 50 साल पहले नील आर्मस्ट्रांग,माइकल कालिंस और एडविन एल्ड्रिन, एक रोमांचकयात्रा पर गए । उस वक्त किसी ने सोचा भी नहीं था कि जिस काम के लिए वे दोनों चाँद परजा रहे थे, उसमें सफल होंगे भी या नहीं । लेकिन आंखों मेंढेरों सपने लिए



मातृभाषा एवम विदेशी भाषा

बच्चे की भाषा को माँ औरमाँ की भाषा को बच्चा कब से समझता है ?आपको पता है न ?जन्म से...शायद जन्म से भी पहले से ?..तब से ...जब बच्चा बोल भी नहीं पाता ।किंतु वह समझता है माँ की भाषा माँ समझती है बच्चे की भाषा । वह भाषा कौन सी होती है ?वह भाषा जो भी होती है,बच्चे का माँ से संवाद उसी भाषामें होता है ।



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