वो लेखक जिन्होंने वक्त से पहले छोड़ दी दुनिया

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हिंदी भाषा का दबदबा कहां तक?

क्या हिंदी भाषा वैश्विक भाषा है या ये केवल भारत तक ही सिमित है?



शहरी कबूतर

तेज उड़ते शहरी कबूतर आए थे देहात से,मतला निकालना इस जाहिल की बात से,रंगीन पंख हैं टूटे जिस पर माँस ताजा हैं,म



जब बॉलीवुड पर चढ़ा फुलकारी का खुमार

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क्या आप अपनी लाइफ से बोर हो गए हो , या परेशानी में हो ?

आजकल दौड़ भाग वाली जिंदगी में सभी लोग परेशान रहते है . किसी न किसी परेशानी से ग्रषित होते है. किसी को नौकरी नहीं मिल रही है , कोई अपने करियर को लेकर परेशान है , कोई पैसो की कमी से परेशान है , तो किसी को शरीर में होने वाली बीमारियों से परेशान है , अब आपको परेशान होने की जरुरत नहीं है आपको बस अपनी प



भारत में एक ऐसा भी मंदिर है जहां गजमुख नहीं इंसान रूप में विराज है भगवान गणेश

भारत का एकमात्र मंदिर जहां गजमुख की नहीं इंसान रूप की होती है पूजादेश में गणेश चतुर्थी बड़े धूम धाम से मनाते है. गणेश चतुर्थी का पर्व पुरे देश में मनाया जाता है यह पर्व १० दिन बड़े उत्साह के साथ मनाया जाता है. आपने हमेशा गणेश जी को गजराज मुख



ऐसे बनाएं मीठी - मीठी साटोरी

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सब निपटा दिए गए

*मिर्ज़ापुर नगर पालिका से पहले महिंद्रा बोलेरो, फिर वीरेंद्र, फिर सौरभ, फिर डीएस चौबे, फिर पीएन पाल, फिर मुकेश, अब अवधेश.... सब निपटा दिए गए* *एक और ईमानदार अधिकारी पर गिरी गाज*मिर्जापुर के बारे में कुछ खास बातमीरजापुर। नगर पालिका परिषद मीरजापुर की कहानी खत्म नहीं हो



क्यों देरी से विवाह कर रहे है युवा ?

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एक शाम के इंतज़ार में

कोई शाम ऐसी भी तो हो जब तुम लौट आओ घर को और कोई बहाना बाकी न होमुदत्तों भागते रहे खुद सेजो चाहा तुमने न कहा खुद सेतुम्हारी हर फर्माइश पूरी कर लेने कोकोई शाम ऐसी भी तो होजब



निकाह के लिए बॉलीवुड हीरोइन्स लिबास

बॉलीवुड में कई ऐसी फ़िल्में है जिसमें मुस्लिम कल्चर को बड़े ही खूबसूरत तरीके से दिखाया गया है। कई फ़िल्मों में निकाह की रस्म भी दिखाई गई है। अगर आप भी भविष्य में दुल्हन बनने जा रही है तो बॉलिवुड की दुल्हन से इन्सपिरेशन ले सकती है। हमारे लेख



नारी होना अच्छा है

नारी होना अच्छा है पर उतना आसान नहींमेरी ना मानो तो इतिहास गवाह है किस किस ने दिया यहाँ बलिदान नहीं जब लाज बचाने को द्रौपदी की खुद मुरलीधर को आना पड़ा सभा में बैठे दिग्गजों को



एक सौदागर हूँ सपने बेचता हूँ ...

मैं कई गन्जों को कंघे बेचता हूँएक सौदागर हूँ सपने बेचता हूँकाटता हूँ मूछ पर दाड़ी भी रखता और माथे के तिलक तो साथ रखता नाम अल्ला का भी शंकर का हूँ लेताहै मेरा धंधा तमन्चे बेचता हूँएक सौदागर हूँ ...धर्म का व्यापार मुझसे पल रहा हैदौर अफवाहों का मुझसे चल रहा है यूँ नहीं



क्या कश्मीर में लौटेगा रूमानी फ़िल्मों का दौर ?

कितनीख़ूबसूरत ये तस्वीर है, मौसमकी बेमिसाल बेनजीर है,



जब बॉलीवुड पर चढ़ा "बंधेज" और "बांधनी" का रंग

भले ही बॉलीवुड पर वेस्टर्न स्टाइल को फॉलो करने वाले का तमगा मिला हुआ हो, लेकिन आज भी भारतीय प्रिंट का काफी खूबसूरत तरीके से इस्तेमाल हो रहा है। अब बांधनी और बंधेज प्रिंट की ही बात कर ले। गुजरात और राजस्थान के



थोड़ा स्वार्थी होना चाहता हूँ मैं

कल्पनाओं में बहुत जी चूका मैंअब इस पल में जीना चाहता हूँ मैं हो असर जहाँ न कुछ पाने का न खोने का उस दौर में जीना चाहता हूँ मैं वो ख्वाब जो कभी पूरा हो न सका उनसे नज़र चुराना चाहता हूँ मैं तमाम उम्र देखी जिनकी राह हमने उन रास्तों से व



लघुकथा -बदलती निगाहें

कहानी-बदलती निगाहेंवक्त के साथ लोग भी बदल जाते है,लेकिन स्मिता से मुझें ऐसी उम्मीद नहीं थी. मुझे यकीन ही नहीं हो रहा था कि ये वही स्मिता है, जिस



सिर्फ तुम्हारी

जब तुम आँखों से आस बन के बहते होउस वख्त तम्हारी और हो जाती हूँ मैंलड़खड़ाती गिरती और संभलती हुईसिर्फ तुम्हारी धुन में नज़र आती हूँ मैंलोगो की नज़रो में अपनी बेफिक्री में मशगूल सीऔर भीतर तुम में मसरूफ खूद को पाती हूँ मैंवो दूरियां



अलग अलग

अलग अलग आती मुश्किलें, अलग अलग जाल हैं. अपने अपने शौक हैं सब के, अपने अपने ख्याल हैं, उलझी उलझी सी राहें, बिखरा बिखरा सा है सफर, टूटी टूटी सी नींद आती, टुकड़े टुकड़े आते ख्वाब हैं. लाख लाख इच्छाएं सबकी,हजार हजार हैं कोशिशें, पाव पाव सब पा लेते, पौने पौने रह जाते सवाल



मेरा स्वार्थ और उसका समर्पण

मैनें पूछा के फिर कब आओगे, उसने कहा मालूम नहींएक डर हमेशा रहता है , जब वो कहता है मालूम नहींचंद घडियॉ ही साथ जिए हम , उसके आगे मालूम नहींवो इस धरती का पहरेदार है, जिसे और कोई रिश्ता मालूम नहींउसके रग रग में बसा ये देश मेरा, और मेरा जीव



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