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से सम्बंधित लेख निम्नलिखित है :-

एक बार इस कविता को दिल से पढ़िये , शब्द शब्द में गहराई है

जब आंख खुली तो अम्‍मा कीगोदी का एक सहारा थाउसका नन्‍हा सा आंचल मुझकोभूमण्‍डल से प्‍यारा थाउसके चेहरे की झलक देखचेहरा फूलों सा खिलता थाउसके स्‍तन की एक बूंद सेमुझको जीवन मिलता थाहाथों से बालों को नोंचापैरों से खूब प्रहार कियाफिर भी उस मां ने पुचकाराहमको जी भर के प्‍



क्या आप “अशिमा चटर्जी” के बारे में जानते है ???

अशिमाचटर्जी : आजभी देश में कई जगह ऐसी हैं जहाँ पर लड़कियों को पढ़ाया नहीं जाता है । अगरहम सन् 1920 और 1930कीबात करें तो उस समय लड़कियों क



कायनात खरीद लाया...

चरागों में तुझको ढूंढा, खुशबुओं में तुझको पाया,पता तेरा मालूम न था, तभी तो यह लुत्फ पाया।पिछली गली में साया कोई अंधेरे में गुनगुनाता था,तेरे लिए जो खरीदी थी पाजेब, मैं उसको दे आया।पगली ही थी, चीथरों में लिपटी दुआएं बांट रही थी,मेरी कोट में पड़ा गुलाब मैं उसके पल्लू में बांध आया।भुट्टे बेचती बुढ़िया न



लेख--- देश में असुरक्षित होता बचपन

आज समाज की स्थिति में असामाजिक तत्वों का समावेश अधिक होता जा रहा है, फिर हम नए भारत का निर्माण किसके लिए कर रहें हैं? जब देश के वर्तमान ही भविष्य के लिए सुरक्षित नहीं, फ़िर क्या बात की जाए? किस संस्कृति और आचरण को महत्व दिया जाए? इस बाज़ार में सब नंगे नजऱ आ रहें हैं। आज समाज को हवशीपने का जो ज्वार लगा



रे दरपन .....

रे दरपनरे दरपन, तू फिर इतना उदास क्यों है,ऋतु बदली है, पगले निराश क्यों है,फिर पुरवाई महकी बासंती आ गई ,फिर थकी –थकी सी यह सांस क्यों है,चेहरे पर गुलाबी गंध महकी-महकी है,मयूर संग आम्रपाली फिर प्यास क्यों है ,झुरमुट मालती के , रात-रानी संग,अश्क यह मुरझाया सा पलास क्यों ह



खगोलशास्त्र और ज्योतिष - भाग 6

यह लेख मेरे द्वारा कुछ WhatsApp समूहों पर १८ अगस्त २०१६ से २७ नवम्बर २०१६ तक सम्प्रेषित चर्चा का संकलन है. पाठकों की सुविधा के लिए इसे 6 खण्डों में प्रकाशित कर रहा हूँ.दो सप्ताह पूर्व की चर्चा में मैंने तिथिपत्र का संक्षिप्त उल्लेख किया था जिस पर कुछ टिप्पणियाँ भी प्राप्त हुईं थीं। उन टिप्पणियों का



लेख--ये तो उत्तम प्रदेश बनने की निशानी नहीं

गोरखपुर के चर्चे सियासी गलियारों में तेज़ है। तो उसी गोरखपुर के चर्चे जनमानस के जुबां पर भी है। अगस्त महीने के शुरुआती दौर में 60 बच्चों की मौत ने लोंगो को अचंभित कर दिया था। अब जब महीने के आखिर में भी 42 मौत हो गई । तो जनता के पैर के नीचे से जमीं खिसक रहीं है। इसके अलावा वह हतप्रभ, और व्याकुल हो उठी



लेख-- राजनीतिक उदासीनता के शिकार गांव और ग्रामीण

भारत की दो तिहाई आबादी अगर जेल से भी कम जगह में रह रही है। तो ऐसे में निजता के मौलिक अधिकार बन जाने के बावजूद छोटे होते मकान और रहवासियों की बढ़ती तादाद प्रतिदिन की निजता को छीन रही है। जिस परिस्थिति में देश में सबको घर उपलब्ध कराने की बात सरकारें कह रही हैं। उस दौर में देश की आबादी का अधिकांश हिस्सा



Sketches from Life: विपासना शिविर का चौथा दिन

विपासना शिविर की तीसरी शाम को गोयनका जी के एक घंटे के वीडियो प्रवचन में साधकों के मन में उठे सवालों की चर्चा की गई और समझाया गया. जैसा की रोज़ होता है उसी प्रवचन में अगले दिन की रूप रेखा भी बता दी गई. चौ



Sketches from Life: नास्तिकवाद

बुद्ध का जन्म ईसापूर्व 563 में हुआ और महानिर्वाण ईसापूर्व 443 में. 29 की आयु में महल और परिवार त्याग कर वन की ओर प्रस्थान किया और 6 वर्ष तक सत्य की खोज में लगे रहे. उस समय वेद, पुराण और उपनिषद का प्रचलन था. साथ ही नास्तिकवाद भी प्रचलित



एक देश , एक कानून पर अमल हो

देश में आज के दौर में कोई सबसे बड़ा बदलाव दिख रहा है। तो वह 1400 वर्षों बाद देश में मुस्लिम महिलाओं की सुदृढ़ होती सामाजिक स्थिति की ओर बढ़ता क़दम। महिलाएं जो सामाजिक औऱ धार्मिक प्रथा के नाम पर सामाजिक बुराई रूपी तीन तलाक के दंश से पीड़ित थी, उस समस्या से निजात दिलाने का प्रयास सार्थक रहा। अब इस समस्या



लेख-- खेल के मैदानों से दूर होता बचपन

देश में तीव्र गति से बच्चों का झुकाव आक्रमक रवैये और अन्य असामाजिक कार्यों में लग रहा है। जिसका अहम कारण बच्चों की खेलों के प्रति बढ़ती दूरी भी है। आज के समाज में बच्चा जहां घर में माता-पिता की भाग-दौड़ भरी जिंदगी में अकेलेपन का एहसास करता है, वहीं खेलों से बढ़ती दूरी उसके मानसिकता के विकास को भी अवरुद



राम रहीम के दामाद ने किया अबतक का सबसे बड़ा खुलासा, बताया सिर्फ साध्वियों के साथ नहीं बल्कि अपनी खुद की बेटी के साथ बाबा राम रहीम…

‘बलात्कारी बाबा’ की गिरफ़्तारी के बाद से देश ने ना जाने कितने ही खुलासे देखें हैं. एक के बाद एक हो रहे इन खुलासों से जहाँ देश दंग है इसी बीच बाबा राम रहीम के दामाद ने बाबा के बारे में ऐसा चौंकाने वाला खुलासा कर दिया है जिसे सुनकर आपके पैरों तले की ज़मीन खिसकनी तय है.2009 दि



जीत

आज का सुवचन



Sketches from Life: हम चले विपासना करने

पेंशन मिल जाने के बाद बैंक की रोज़मर्रा की व्यस्तता ख़त्म हो गई. अब नाश्ते का समय 8 बजे से खिसक कर 9 बजे पहुँच गया. अखबार जो कभी दस मिनट में निपट जाता था अब दो तीन घंटों तक खींचता चला जाता है. दफ्तर जाना नहीं तो क्या जूते चमकाने और क्या टा



पाकिस्तानी न्यूज़ चैनल ने दिखाई ओम पुरी की भटकती आत्मा का ये वीडियो

एक पाकिस्तानी टीवी न्यूज चैनल ने दावा किया है कि ओम पुरी की आत्मा कई दिनों से मुंबई की सड़कों पर भटक रही है।पाकिस्तानी पत्रकार आमिर लियाकत का कहना है कि ओमपुरी की आत्मा कई दिनों से मुंबई की सड़को पर भटक रही है। ओम पुरी की आत्मा को पिछले कई दिनों से उस सोसायटी में द



आजादी के 70 वर्ष

[ ...भूतकाल को कोसने के बदले भविष्य सुधारें... ]“बीत गई, वह बात गई ।" भूतकाल को कोसना और दोष देना बंद करके, उससे सबक लेकर भविष्य के निर्माण हेतु ध्य



माँ का एक झूठ आज पकड़ ही लिया

मैं नित्य अपने मन मे उभरते हुए विचारो को कलम के माध्यम से ब्लॉग द्वारा अपने विचारो को रखता हु व आप सभी मित्रो से साझा करता हु आज मेरी माँ का एक ममतामयी झूठ मेने देखा वह झुठ मेरी माँ ने मुझसे बोला मे तुरंत समझ भी गया की मेरी माँ मुझसे झुठ बोल रही है आंखो मे आँसू भर आए माँ के ममतामयी झुठ से सोचा क्यू



Sketches from Life: कुंवारा कपूर

सरकारी बैंक की काफी बड़ी शाखा है झुमरी तलैय्या में. कुछ नहीं तो 55 से भी ज्यादा लोग काम करते होंगे. इनमें एक तिहाई तो महिलाएँ ही होंगी. दो बजे तक तो ग्राहकों की चहल पहल रहती है फिर तीन बजे तक महिला मंडल सक्रिय हो जाता है और चार बजे के बा



सनकी तानाशाह वाले इस देश में ये 10 काम करना है Not Allowed

उत्तर कोरिया का नाम लेते ही कैदी टाइप फील होने लगता है। क्यूट चेहरे वाले खूंखार तानाशाह किम जोंग उन के किस्से सुनकर मन गुस्से से तमतमा जाता है। कैसे कोई इंसान एक देश को अपनी जागीर समझ सकता है। एक देश को अपनी बपौती समझने वाले इस शख्स ने उत्तर कोरिया में अजीबो-गरीब नियमों की झड़ी लगा रखी है।कुछ एक तो



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