कभी एक दिवस नहीं एक युग महिलाओं का भी आएगा

मुझे याद है जब हम बहुत छोटे थे तो हमारे घर- परिवार की तरह ही गांव से कई लोग रोजी-रोटी की खोज में शहर आकर धीरे-धीरे बसते चलते गए। शहर आकर किसी के लिए भी घर बसाना, चलाना आसान काम नहीं रहता है। घर-परिवार चलाने के लिए पैसों की आवश्यकता होती है। उसके बिना न रहने का ठिकाना, न पेट भरना और नहीं तन ढ़



शबरी जयंती

आज कुटिया पधारे जो श्रीराम जी, देख शबरी कि आँखे सजल हो गयीं।राह में फूल नित जो सजाती रही, साधना आज उसकी सफल हो गयी।।रूप सुन्दर मनोहर धनुष हाथ में, और हैं साथ में भ्रात उनके लखन।राम ने जब कुटी में किया आगमन, देखते ही प्रफुल्लित हुआ आज मन।।प्रेम से दौड़ शबरी मिली राम से, आज कठनाइयाँ सब सरल हो गयी।राह म



‘कौमी एकता’ उर्फ़ "राष्ट्रीय एकता"

एकतामें बड़ी शक्ति होती हैं । वह परिवार, समाज, देशबहुत ज्यादा तरक्की करता हैं जहाँ एकता होती हैं. एकता हमें एक दूसरे का मान-सम्मानकरना सिखाती हैं । एकता हमें बुराइयों के खिलाफ़ लड़ने की ताकत देती हैं । एकता हीमानव जाति की पहचान हैं ।‘कौमी एकता’ मुख्यतः राष्ट्रीय एकता की



Sweet Pagal Rap Song लेखक दीनदयाल सरोज

Sweet सा पागल हू ,मस्ती में रहता हु देख भाई तेरा अब वीडियो में रहता है ,पहले तो भाई तेरा isqa में रहता था ,जब भी कॉल आता बिजी बताता था ,दोस्त मेरे मुह पे गाली दे जाते थे जब मेरा Call Busy जो आता था लड़की थी Temu गांव उसकी भानु कहती थी Sweet



अटल जी की जयंती

#मुक्तक रत्न पुरुष बन विश्व पटल पर, नाम देश का बढा गया।हिन्द देश का कलम सिपाही, पाठ सहिष्णुता पढ़ा गया।आज जयंती पर उसकी आ, मिलके शीश नवाएं हमइतिहासों के पन्नो पर जो, नाम अटल इक चढ़ा गया।अदम्य



अब मैं वह दिल की धड़कन कहाँ से लाऊंगा

जब-जब भी मैं तेरे पास आयातू अक्सर मिली मुझे छत के एक कोने मेंचटाई या फिर कुर्सी में बैठीबडे़ आराम से हुक्का गुड़गुड़ाते हुएतेरे हुक्के की गुड़गुड़ाहट सुन मैं दबे पांव सीढ़ियां चढ़कर तुझे चौंकाने तेरे पास पहुंचना चाहताउससे पहले ही तू उल्टा मुझे छक्का देती मेरे कहने पर



किसान आंदोलन! उत्पन्न ‘‘आशंका के परसेप्शन‘‘ को दूर करने के लिए सरकार को ‘‘कदम उठाने‘‘ ही होंगे।

अभी हाल में ही मैंने बिहार विधानसभा के आम चुनाव और मध्य प्रदेश के उपचुनावों के संबंध में यह लिखा था कि ‘‘अंकगणित की जीत‘‘ के साथ ही उससे उत्पन्न ‘‘परसेप्शन‘‘ को जीतने पर ही ‘‘जीत पूर्ण‘‘ कहलाती है। किसान आंदोलन को देखते हुए परसेप्शन का उक्त सिद्धांत संसद एवं सरकार द्वारा लागू अधिनियम एवं लि



सत्ता माँ की गोद नहीं है

सत्ता माँ की गोद नहीं है डॉ शोभा भारद्वाज 26 / 11 तीन दिनों तक चला आतंकी हमला इसका मास्टर माईंड हाफिज सईद था ,हमले में देश विदेश के अनेक लोग ,पुलिस कर्मी शहीद हुए उन शहीदों को ‘नमन’ 300 घायल थे . अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा ने अपनी पुस्तक में 26 /11 के आतंकी हमले का जिक्र करते हुए लिखा ह



‘‘न्यूटन के गति‘‘ का नियम क्या ‘‘अपराधिक राजनीति पर भी लागू होता है?

‘‘न्यूटन‘‘ क्या भारतीय राजनीति को ‘‘न्यूट्रल‘‘ कर देगें?मैं विज्ञान का छात्र रहा हूं। बचपन में मैंने पढ़ा है कि ‘‘न्यूटन के गति‘‘ के तीसरे नियम के अनुसार ‘‘हर क्रिया के बराबर (समान) और विपरीत प्रतिक्रिया होती है‘‘। प्रसिध्द वैज्ञानिक ‘‘न्यूटन‘‘ ने अपनी पुस्तक ‘‘प्रिंसीपिया मैथमैटिका‘‘ (वर्ष 1687) के



कोई रोता है।

( 1)क्यों? मुझको ऐसा लगता है। दूर कहीं कोई रोता है।कौन है वो? मैं नही जानता। पर,मानो अपना लगता है।कहीं दूर कोई रोता है। मुझसे मेरा मन कहता है। ( 2)अक्सर अपनी तन्हाई में, ध्



किरायेदार

लघुकथाकिरायेदार" भैया ये छह पाईप हैं जो पास की दूकान पर ले चलने हैं , ले चलोगे ? " मैंने ई - रिक्शे वाले को रोककर कहा ।" जी, ले चलेंगे । "" बताओ किराया क्या लोगे ? " " सत्तर रुपए लगेंगे ।"" भैया , पचास लो । सत्तर का काम तो नहीं है । "" ठीक है , पचास दे दीजिएगा ।"" तो फिर लाद लो । "वो अपने काम पर



एक रूपये नहीं तो जेल, झूठे आरोप की सजा

एक रूपये नहीं तो जेल, झूठे आरोप की सजा ! एक गरीब व्यक्ति से लेकर एक बड़े से बड़े व्यक्ति तक उसकी इज्जत उसके लिए बहुत माईने रखती है. कहा भी गया की व्यक्ति को अपनी इज्जत बनाने में वर्षो लग जाते है और गवाने में एक मिनट ही काफी है. समाज में प्रत्येक व्यक्ति को ये अधिकार है की वो अपनी मान प्रतिष्‍ठा, इज्



पथिक

(1)वो घर से निकला पीने को, मानो अंतिम पल जीने को।उसे अंतिम सत्य का बोध हुआ। मानो अंतिम घर से मोह हुआ।सोते बच्चों को जी भर देखा, सोती बीबी के गालों को चूमा,माँ-बाप को छूपकर देखा, चुपके सोते चरणों को पूजा।कुछ पैसे



छत्‍तीसगढ के स्‍कूलों में अब नहीं ली जा सकेगी मनमानी फीस !

छत्‍तीसगढ के स्‍कूलों में अब नहीं लीजा सकेगी मनमानी फीस ! वैसे तो देशभर में स्‍कूलफीस अभिभावकों के लिये एक समस्‍य बनती आई है लेकिन अब कम से कम छत्‍तीसगढ सरकार नेतो इसपर संज्ञान लिया है: पालकों की समस्‍याओं को समझते हुए विधानसभा के मानसूनसत्र में छत्तीसगढ़ अशासकीय विद्यालय फीस विनियमन विधेयक 2020 बहु



कट्टर पंथियों द्वारा राम मन्दिर के भूमि पूजन के खिलाफ प्रोपगंडा

कट्टर पंथियों द्वारा राम मन्दिर के भूमि पूजन के खिलाफ प्रोपगंडा डॉ शोभा भारद्वाज 'ऑल इंडिया इमाम एसोसियेशन के मौलाना साजिद रशिदी टीवी डिबेट में कहते थे राम मंदिर बनाइये कौन मना करता है ,मन्दिर वहीं बनायेंगे तारीख नहीं बतायेंगे| जब मंदिर निर्माण के लिए भूमि पूजन हुआ उनके विचार अलग थे मौलाना ने कहा



‘‘फेक’’ ‘‘एनकाउंटर’’ को ‘‘वैध‘‘ बनाने के लिए ‘‘कानून‘ क्यों नहीं बना देना जाना चाहिए?

‘‘विकास दुबे एनकाउंटर’’ (मुठभेड़) पूरे देश में ही नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी चर्चित है। यह घटना न केवल स्वयं ‘‘सवालों में सवाल’’ लिये हुये है, बल्कि उपरोक्त ‘‘शीर्षक’’ प्रश्न भी पुनः उत्पन्न करता है। लगभग हर ‘एनकाउंटर’ के बाद उस पर हमेशा प्रश्नचिन्ह अवश्य लगते रहे हैं। उक्त ‘प्रश्नचिन्ह’ क



‘विकसित’’ यूपी में ‘‘विकास‘‘ ‘‘राज‘‘ के साथ ‘‘ अराजकता राज‘‘ भी चल रहा है!

जिस बात की आशंका ‘‘गैंगस्टर’’ विकास दुबे की गिरफ्तारी के समय उत्पन्न हो रही थी व कतिपय क्षेत्रों में व्यक्ति भी की गई थी, वह अंततः चरितार्थ सही सिद्ध हुई। मुठभेड़ की घटना के पूर्व ही माननीय उच्चतम न्यायालय में एक वकील द्वारा दायर याचिका में भी उक्त आंशका व्यक्त की गई थी। यह आशंका भी व्यक्त की जा रही



भारतीय राजनीति में ‘सवालों’ के ‘जवाब’ के ‘उत्तर’ में क्या सिर्फ ‘सवाल’ ही रह गए हैं?

भारतीय राजनीति का एक स्वर्णिम युग रहा है। जब राजनीति के धूमकेतु डॉ राम मनोहर लोहिया, अटल बिहारी बाजपेई, बलराम मधोक, के. कामराज, भाई अशोक मेहता, आचार्य कृपलानी, जॉर्ज फर्नांडिस, हरकिशन सिंह सुरजीत, ई. नमबुरूदीपाद, मोरारजी भाई देसाई, ज्योति बसु, चंद्रशेखर, तारकेश्वरी सिन्हा जैसे अनेक हस्तियां रही है।



नर्तकी ( कहानी )

नर्तकी a अम्बुज जब तीन दिन के बादविभावरी के घर पंहुचा तो वह उससे बिलकुल नहीं बोली और मुँह फुलाये बैठी मेजपोशकाढती रही | वह पास ही कुर्सी पर बैठ गया और मेजपोशखींचते हुए बोला -`` पता है , मैं कल सुबह ही पूरे एक साल के लिए बनारस जारहा हूँ और तुम हो कि काढने से ह



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