फलसफां

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श्री गणेशाय नमः (कहानी शुरू होती है.......)

अनगिनत ख्वाबों को दिल में संजोये जब वो अपने शहर से निकला था, तो उसकी आँखों में झिलमिल से सपने थे । वाबस्ता थीं उसकी हर सांसें उच्चश्रृंखल से श्वास के । दूर शहर में उसको फिर से अपने घर का शहर सजाना था । पर जिस शहर में पढ़कर कभी पलट कर न आने के बारे में सोचा था, आज फिर उसी शहर ने ही उसको दस वर्षों तक अ





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