किशोर अलंकरण प्रियदर्शन को ....

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गीतिका

नफरत नहीं उर में रखें, अब प्रेम की बौछार हो। इक दूसरे की भावना का अब यहाँ सत्कार हो।। अब भाव की अभिव्यक्ति का,ये सिलसिला है चल पड़ा। ये लेखनी सच लिख सके ,जलते वही अँगार हो ।। ये रूठने का सिलसिला क्यों आप अब करने लगे । अनुराग से तुमको मना लें ये हमें अधिकार हो। जीवन चक्र का सिलसिला यूँ अनवरत चल



भौरा जिया

💥💥भौरा जिया 💥💥तुम जो गये हमसे दूर पिया ,दिल के और भी करीब हो गये।यह बात अलग है तुम्हें खो कर, हम मुफलिस और गरीब हो गये।मेरी साँसें, मेरी धड़कन, गाती रहती है इक गीत ।तेरे सिवा न दूजा होगा, तू तो जन्मो का मेरा मीत। दूर मुझे क्यों खुद किया । तुम जो गये हमसे दूर पिया ।।आज जो ये चाँ



खो कर ही इस जीवन में कुछ पाना है ...

मूल मन्त्र इस श्रृष्टि का ये जाना हैखो कर ही इस जीवन में कुछपाना हैनव कोंपल उसपल पेड़ों पर आते हैंपात पुरातन जड़से जब झड़ जाते हैं जैविक घटकोंमें हैं ऐसे जीवाणू मिट कर खुद जोदो बन कर मुस्काते हैं दंश नहीं मानो,खोना अवसर समझो यही शाश्वतसत्य



बिटिया मेरी हुई सियानी

🧚🏻‍♂🧚🏻‍♂🧚🏻‍♂🧚🏻‍♂🧚🏻‍♂🧚🏻‍♂🧚🏻‍♂ लोक गीत÷÷÷ बिटिया मेरी हुई सियानी """""""""""""****"""""""""बिटिया रानी अब तो हुई है सियानी।मुझे बोलेगी छोटी परी अब नानी।। होsssss माँ के अंगना में खेली- कूदीकरती रहती थी हरदम ठिठोलीबड़े जतन से पिता पढ़ायेपढ़ा कर उसे राह दिखायेघर की र



आल्हा छंद

विधान---- आल्हा छंद मात्रिक- -- 31 मात्रा (16 , 15)पदान्त- ---21 🌹गीत🌹 """"**""""नारी ही है जननी तेरी, नारी ही तेरी पहचान। नारी का सम्मान करो रे, करो नहीं अपमान ।।नारी माता वो ही त्राता, है तेरी नारी से शान। रखो हमेशा उस नारी का, तुम भी सच्चे दिल से



💥जलती रही बाती 💥

🙏🏻 🙏🏻🌹जलती रही बाती 🌹""""""""""""****""""""""""""रात भर तेरे इन्तजार में- जलती रही बाती । बुझती रही बाती।।इधर लौ जल रहे थे, भौरें मचल रहे थे। क्या करती वह बाती मन मोम गल रहे थे।। रात भर तेरे इन्तजार में , जलती रही बाती बुझती रही बाती ।अकेली क्या करेंगी



घर मेरा टूटा हुआ सन्दूक है ...

घर मेरा टूटा हुआ सन्दूक हैहर पुरानी चीज़ से अनुबन्ध है पर घड़ी से ख़ास ही सम्बन्ध हैरूई के तकिये, रज़ाई, चादरें खेस है जिसमें के माँ की गन्ध हैताम्बे के बर्तन, कलेंडर, फोटुएँजंग लगी छर्रों की इक बन्दूक हैघर मेरा टूटा ..."शैल्फ" पे चुप सी कतारों में खड़ी अध्-पड़ी



दो नयन अपनी भाषा में जो कह गए

नेत्र भर आए और होंठ हँसते रहे,प्रेम अभिनय से तुमको,कहाँ छ्ल सका?दो नयन अपनी



हिंदी दिवस पर प्रस्तुत गीत

"गीत"हिंदी हिंद की जान है, आन बान और शान हैभारत के हर वासी का, युग-युग से पहचान हैहर बोली में लहजा हिंदी, हर माथे पर सोहे बिंदीघर-घर में इंसान है, आँगन मुख मुस्कान है.......लिखना रुचिकर पढ़ना रुचिकर, रुचिकर है आठो डाँड़ीहिंदी के हर शब्द में बहती, गंगा यमुना की नाड़ीस्वर व्यंजन की आरती, प्रिय प्रतीक माँ



संगीत का अनोखा कार्यक्रम...

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एक सौदागर हूँ सपने बेचता हूँ ...

मैं कई गन्जों को कंघे बेचता हूँएक सौदागर हूँ सपने बेचता हूँकाटता हूँ मूछ पर दाड़ी भी रखता और माथे के तिलक तो साथ रखता नाम अल्ला का भी शंकर का हूँ लेताहै मेरा धंधा तमन्चे बेचता हूँएक सौदागर हूँ ...धर्म का व्यापार मुझसे पल रहा हैदौर अफवाहों का मुझसे चल रहा है यूँ नहीं



पल दो पल फिर आँख कहाँ खुल पाएगी ...

धूल कभी जो आँधी बन के आएगीपल दो पल फिर आँख कहाँ खुल पाएगीअक्षत मन तो स्वप्न नए सन्जोयेगाबीज नई आशा के मन में बोयेगाखींच लिए जायेंगे जब अवसर साधनसपनों की मृत्यु उस पल हो जायेगीपल दो पल फिर ...बादल बूँदा बाँदी कर उड़ जाएँगेचिप चिप कपडे जिस्मों से जुड़ जाएँगेचाट के ठेले जब



दुश्मन देश पाकिस्तान में गाना मीका सिंह के लिए बनी मुसीबत, AICWA ने किया बहिष्कार

जब से पुलवामा हमला हुआ है तब से पूरा देश और भारत सरकार एकजुट होकर पाकिस्तान का बहिष्कार करने में लगा हुआ है। छुट्टी से ड्यूटी पर लौट रहे भारतीय जवानों की बस में धमाका करवाने वाले आतंकियों का समूह जैश-ए-मोहम्मद का था लेकिन पाकिस्तान ने इस बात से इंकार कर दिया। भारत ने इसका सबूत दिया फिर भी पाक को अपन



घास उगी सूखे आँगन ...

धड़ धड़ धड़ बरसा सावनभीगे, फिसले कितने तनघास उगी सूखे आँगनप्यास बुझी ओ बंजर धरती तृप्त हुईनीरस जीवन से तुलसी भी मुक्त हुई,झींगुर की गूँजे गुंजनघास उगी ...घास उगी वन औ उपवनगीले



आशा का घोड़ा ...

आशा की आहट का घोड़ासरपट दौड़ रहासुखमय जीवन-हार मिलासाँसों में महका स्पंदनमधुमय यौवन भार खिलानयनों में सागर सनेह कासपने जोड़ रहा सरपट दौड़ रहा ...खिली धूप मधुमास नयाखुले गगन में हल्की हल्कीवर्षा का आभास नयामन अकुलाया हरी घास परझटपट पौड़ रहासरपट दौड़ रहा ...सागर लहरों क



कजरी गीत

"कजरी गीत"मोहन गोकुल नगर सुधारी, मधुवन कीन्ह सुखारी नाजाकर मथुरा डगर निहारी, सुखी कीन्ह महतारी ना......मोहन गोकुल नगर....धारी गोवर्धन गिरधारी, आओ न फिर यमुन कछारी नागाय ग्वाल गोपिन दुख हर्ता, पनघट की सखियाँ न्यारी..... मोहन गोकुल नगर ......रास आस तुमसे बनवारी, गौतम तो रहा अनारी नासावन झूला डाल-डाल प



चातुर्मास्य :--- आचार्य अर्जुन तिवारी

*सनातन धर्म में समय-समय पर विभिन्न व्रत उपवास एवं त्योहारों का पर्व मनाने की परंपरा रही है | प्रत्येक व्रत / पर्व के पीछे एक वैज्ञानिक मान्यता सनातन धर्म में देखने को मिलती है | आषाढ़ मास की शुक्ल पक्ष की एकादशी जिसे पद्मा एकादशी के नाम से जाना जाता है | इसका बहुत ही



बाल गीत

"बाल गीत"चंदा मामा आ भी जाओ, लेकर अपना प्यारमेरी माँ के भाई हो तुम, तारों के सरदारबहुत खिलाया माँ ने कहकर, लाएंगे चंदा मामादूध-भात से भरा कटोरा, रहते घिर बादल श्यामाछुप जाते क्यों आप बताओ, वादा नहीं निभाते होआज छमाछम है सावन की, तुम हो झूला के रखवारचंदा मामा आ भी जाओ, लेकर अपना प्यारमेरी माँ के भाई



गीतिका

मंच को प्रस्तुत गीतिका, मापनी- 2222 2222 2222, समान्त- अन, पदांत- में...... ॐ जय माँ शारदा!"गीतिका"बरसोगे घनश्याम कभी तुम मेरे वन मेंदिल दे बैठी श्याम सखा अब तेरे घन मेंबोले कोयल रोज तड़फती है क्यूँ राधाकह दो मेरे कान्ह जतन करते हो मन में।।उमड़ घुमड़ कर रोज बरसता है जब सावनमुरली की धुन चहक बजाते तुम मध



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