महान वैज्ञानिक मैडम मैरी क्यूरी - पार्ट 2

महान वैज्ञानिक मैडम मैरीक्युरी पार्ट-2 डॉ शोभा भारद्वाजविवाह के दो वर्ष बाद बेटी ने जन्म लिया अब मैरी काकाम बहुत बढ़ गया था लेकिन अदम्य साहस की प्रतिमा अपनी प्रयोगशाला में बच्ची को साथही ले जाती थी . घर में मैरी माँ और पत्नी थी परन्तु प्रयोगशाला में अपने काम कोसमर्पित वैज्ञानिक थीं .



मरघट का सन्नाटा :- आचार्य अर्जुन तिवारी

*हमारे जीवन में अनेकों शब्द , लोकोक्तियां एवं मुहावरे ऐसे हैं जिनका जीवन पर सीधा प्रभाव पड़ता है | देखने में तो ये बहुत ही साधारण शब्द होते हैं परंतु यदि सकारात्मकता के साथ सूक्ष्मता से इनका अवलोकन किया जाय , गहनता से इन मुहावरों पर विचार किया जाय तो इनका बहुत ही गूढ़ अर्थ निकल कर सामने आता है | इन



कन्या सदैव पूज्यनीय है :- आचार्य अर्जुन तिवारी

*भारत देश अपनी परंपराओं एवं मान्यताओं के लिए जाना जाता है , हमारे देश भारत की मान्यता है कि नर को प्रकट करने वाली नारी ही इस सृष्टि का मूल है | नारी के बिना नर की कल्पना करना भी व्यर्थ है | हमारे शास्त्रों में नारी की पूजा एवं उसका आदर करने का निर्देश स्थान स्थान पर प्राप्त होता है | "यत्र नार्यस्तु



अकाल मृत्यु क्या है ? :- आचार्य अर्जुन तिवारी

*इस धरा धाम पर जन्म लेने के पहले मनुष्य के जीवन एवं मृत्यु का निर्धारण हो जाता है | परमात्मा ने एक निश्चित आयु देकर सभी जीवो को इस धरा धाम पर भेजा है | कलयुग में मनुष्य की आयु १०० वर्ष की निर्धारित की गई है परंतु जब इसके पहले मनुष्य की मृत्यु हो जाती है तो उसे अकाल मृ



भगवान का कच्छप अवतार :- आचार्य अर्जुन तिवारी

*इस विशाल सृष्टि की उत्पत्ति ब्रह्मा जी के द्वारा हुई , इसका पालन भगवान श्री हरि नारायण करते हैं और संहार करने का भार भगवान शिव के ऊपर है | सनातन धर्म में उत्पत्ति अर्थात सृजन कर्ता , पालक एवं संहारक त्रिदेव को माना जाता है | सृजन एवं संहार के बीच में पालन करने का सबसे महत्वपूर्ण कार्य भगवान विष्णु



भगवान नरसिंह का अवतार :- आचार्य अर्जुन तिवारी

*इस समस्त सृष्टि में ईश्वर कण कण में समाया हुआ है | कोई भी ऐसा स्थान नहीं है जहां ईश्वर की उपस्थिति ना हो | संसार में समस्त जड़ चेतन की रचना ईश्वर ने ही की है | ईश्वर के लिए सभी समान है इसीलिए भी ईश्वर को समदर्शी कहा गया है | ईश्वर कभी भी भेदभाव नहीं करता बल्कि सबको समान रूप से वायु , सूर्य का प्रक



भगवन्नाम ही श्रेष्ठ साधन :- आचार्य अर्जुन तिवारी

*इस धराधाम पर आकर मनुष्य का परम उद्देश्य ईश्वर की प्राप्ति ही होता है | *ईश्वर को प्राप्त करने के लिए मनुष्य अनेकों प्रकार के साधन करता है , भिन्न-भिन्न उपाय करके वह भगवान को रिझाना चाहता है | *भगवान को प्राप्त करने के चार मुख्य साधन हमारे शास्त्रों में बताए गए हैं जिन्हें "साधन चतुष्टय" कहा जाता है



सनातन में सनातन क्या है ?:- आचार्य अर्जुन तिवारी

*इस संसार में अनादिकाल से जो धर्म स्थित है उसे सनातन धर्म कहा जाता है | सनातन का अर्थ है जो शाश्वत हो, सदा के लिए सत्य हो | जिन बातों का शाश्वत महत्व हो वही सनातन कही गई है | जैसे सत्य सनातन है , ईश्वर ही सत्य है, आत्मा ही सत्य है , मोक्ष ही सत्य है और इस सत्य के मार्ग को बताने वाला धर्म ही सनातन धर



आयुर्वेद की दिव्यता :- आचार्य अर्जुन तिवारी

*हमारा देश भारत आदिकाल से दिव्य ऋषि - मुनियों का देश रहा है | ऋषि - मुनियों ने सदैव मानव मात्र के कल्याण के लिए ही समस्त ज्ञान प्रसारित किया है | हमारे ग्रन्थों में स्थान - स्थान पर मनुष्यों के लिए दिशा - निर्देश प्राप्त होते हैं | इस संसार का आदिग्रन्थ स्वयंभू वेदों को माना जाता है | हमारे चारों वे



जनहित में जारी।

जनहित में जारी।भगवान (भगवान---राम, रहीम, अल्ला, मसीहा, गुरु)भ भूमिग गगनव वायुअ आँगन नीरपूर्वजो से सुना था कि सूखा में अनगिनत लोग मरे थे। तब से जल संरक्षण की शुरुवात हुई थी।आज आँखों से देख रहे है। ऑक्सीजन की कमी से लाखों लोग मर चुके है। करोङो मरने के लिए लाईनो में लगे है। वायु संरक्षण की



भगवान की माया :-- आचार्य अर्जुन तिवारी

*परमपिता परमेश्वर जिन्हें ब्रह्म कहा जाता है उन्होंने अपनी माया से इस सृष्टि की रचना की | सृष्टि का कण-कण माया से परिपूर्ण रहे बिना माया की / ब्रह्म की शक्तियां काम नहीं कर पाती , अर्थात ब्रह्म एवं माया से मिलकर ही यह सृष्टि बनी है और इस सृष्टि का प्रत्येक जीव माया से अभिभूत होकर ही कार्य करता है |



अन्तर्विकारों से बचने का उपाय :-- आचार्य अर्जुन तिवारी

🌻🌹🌻🌹🌻🌹🌻🌹🌻🌹🌻🌹 *‼️ भगवत्कृपा हि केवलम् ‼️*🎄🎈🎄🎈🎄🎈🎄🎈🎄🎈🎄🎈*श्रीरामचंरितमानस में तुलसीदास जी महाराज ने उत्तरकांड के लेखन में अंतर्मन के विकारों का बहुत विस्तृत वर्णन किया है |उसके अनुसार अंतर्मन के विकार निम्नवत् है :---**काम , क्रोध , लो



बिना विचारे जो करै :-- आचार्य अर्जुन तिवारी

*मानव जीवन में समय समय पर अनेकों समस्यायें उत्पन्न होती रहती हैं ! कुछ समस्यायें तो ऐसी होती हैं जो स्वयं मनुष्य के द्वारा ही उत्पन्न कर ली जाती हैं | यदि किसीने कह दिया कि हमने तो ऐसा सुना है तो मनुष्य को उसे तब तक सत्य सत्य नहीं मानना चाहिए जब तक स्वयं न देख ले | बिना विषय की सच्चाई जाने ही यदि उस



उत्पन्ना एकादशी :-- आचार्य अर्जुन तिवारी

*सनातन धर्म में अनेकों व्रत उपवास बताए गए है जो मनुष्य को भौतिकता से कुछ क्षण के लिए उबार कर सात्त्विकता की ओर अग्रसर करते हैं | अपनी संस्कृति एवं संस्कार को.जानने का सशक्त साधन हैं समय समय पर पड़ने वाले हमारे व्रत एवं उपवास | वैसे तो सनातन धर्म में व्रत उपवासों की वृहद श्रृंखला है परंतु कुछ व्पत वि



इन्र्दिय सुख की अधिकता से बचें :- आचार्य अर्जुन तिवारी

*इस धरा धाम पर जन्म लेने के बाद मनुष्य अपने जीवन में पग पग पर सावधानी के साथ कदम बढ़ाता है | संसार में किससे अपना हित होना है और किससे अहित होना है इस विषय में मनुष्य बहुत ही सावधान रहता है , परंतु जिससे उसे सावधान रहना चाहिए वह उससे सावधान नहीं रह पाता | मनुष्य को किस से सावधान रहना चाहिए ? इसके वि



कर्तिक पूर्णिमा :- आचार्य अर्जुन तिवारी

*आदिकाल से इस धरा धाम पर प्रतिष्ठित होने वाला एकमात्र धर्म सनातन धर्म मानव मात्र का धर्म है क्योंकि सनातन धर्म ही ऐसा दिव्य है जो मानव मात्र के कल्याण की कामना करते हुए एक दूसरे को पर्व त्योहारों के माध्यम से समीप लाने का कार्य करता है | सनातन धर्म में वर्ष के प्रत्येक माह में कुछ ना कुछ पर्व ऐसे मन



जीवन को उत्कृष्ट करता है ज्ञान :- आचार्य अर्जुन तिवारी

*इस संसार में जन्म लेने के बाद मनुष्य अनेक प्रकार से ज्ञानार्जन करने का प्रयास करता है | जब से मनुष्य का इस धरा धाम पर विकास हुआ तब से ही ज्ञान की महिमा किसी न किसी ढंग से , किसी न किसी रूप में मनुष्य के साथ जुड़ी रही है | मनुष्य की सभ्यता - संस्कृति , मनुष्य का जीवन सब कुछ ज्ञान की ही देन है | मनु



वर्तमान को सुधारें :-- आचार्य अर्जुन तिवारी

*यह सृष्टि निरंतर गतिशील है , आज जो समय है कल वह भूत बन जाता है | काल गणना की सुविधा की दृष्टि से समय को तीन भागों में बांटा गया है जिसे भूतकाल वर्तमान काल एवं भविष्य काल कहा गया है | ध्यान देने वाली बात है भूत एवं भविष्य दोनों के लिए एक ही शब्द का प्रयोग किया जाता है जिसे कहा जाता है "कल" | अंतर सि



एकादशी व्रत निर्णय :- आचार्य अर्जुन तिवारी

💥🌳🌳💥🌳🌳💥🌳🌳💥🌳🌳 *‼️ भगवत्कृपा हि केवलम् ‼️* 🚩 *एकादशी व्रत निर्णय* 🚩🍀🏵️🍀🏵️🍀🏵️🍀🏵️🍀🏵️🍀🏵️*दशम्येकादशी यत्र तत्र नोपवसद्बुध: !* *अपत्यानि विनश्यन्ति विष्णुलोकं न गच्छति !!*यह परमावश्यक है कि एकादशी दशमीविद्धा (पूर्वविद्धा) न हो ! हाँ द्वादशीविद्धा (



तुलसी विवाह एवं पंचकोसी परिक्रमा :- आचार्य अर्जुन तिवारी

*सनातन धर्म का प्रत्येक कार्य शुभ कर्म करके तब प्रारंभ करने की परंपरा रही है | विगत चार महीनों से सभी शुभ कार्य चातुर्मास्य के कारण बंद पड़े थे , आज देवोत्थानी एकादशी के दिन भगवान श्री हरि विष्णु के जागृत होने पर सभी शुभ कार्य प्रारंभ हो जाएंगे | शुभ कार्य प्रारंभ होने से पहले मनुष्य के द्वारा कुछ अ



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