विज्ञान कथा परिवर्तन : भाग - 1

लेखक - जीशान जैदी बेरोज़गारी के धक्कों ने उसे बेहाल कर दिया था. दो दिन से उसके पेट में एक दाना भी नहीं गया था. मीठे पानी को तो वह बहुत दिन से तरस रहा था, क्योंकि पानी अब बहुराष्ट्रीय कंपनियों की संपत्ति हो चुका था. समुन्द्र का खारा पानी वह किसी तरह पी रहा था. ग्लोबल वार्मिंग की वजह से समुन्द्र में न



इस हफ्ते का साप्ताहिक ज्ञान

😂झूठ बोलना …बच्चों के लिए … पाप ,,कुंवारों के लिए …. अनिवार्य ,,प्रेमियों के लिए ….. कला ,,और …शादीशुदा लोगों के लिए … शान्ति से जीने का मार्ग होता है....!!""✋ये है इस हफ्ते का साप्ताहिक ज्ञान।बड़ी मुश्किल से ढूंढ़ कर निकाला है।गीता में लिखना रह गया था।



"बाग़ बिन पर्यावरण"

"बाग़ बिन पर्यावरण"बुजुर्गों ने अपने हाथों से बाग़ लगाया था गाँव के चारों ओर, याद है मुझे। मेरा गांव बागों सेघिरा हुआ एक सुन्दर सा उपवन था।कहीं से भी निकल जाओं, फलों से मन अघा जाता था। महुआ, जामुन मुफ़्त में मिल जाते थे तोआम, आवभगत के रसीले रस भर देते थे। शीतल हवा हिलोरें मारती थी तो बौर के खुश्बू, हर



दुनिया के प्रमुख देशों में पर्यावरण की स्थिति

इस्राएल की बात हमने पीछले लेख में की| इस्राएल जल संवर्धन का रोल मॉडेल हो चुका है| दुनिया में अन्य ऐसे कुछ देश है| जो देश पर्यावरण के सम्बन्ध में दुनिया के मुख्य देश हैं, उनके बारे में बात करते हैं| एनवायरनमेंटल परफार्मंस इंडेक्स ने दुनिया के १८० देशों में पर्यावरण की स्थिति की रैंकिंग की है| देशों म



माँ मैं एक आनुवंशिक वैज्ञानिक हूँ

"माँ, मैं एक आनुवंशिक वैज्ञानिक हूँ। मैं अमेरिका में मानव के विकास पर काम कर रहा हूं। विकास का सिद्धांत, चार्ल्स डार्विन, आपने उसके बारे में सुना है?" वासु ने पूछा। उसकी मां उसके पास बैठी और मुस्कुराकर बोली, “मैं डार्विन के बारे में जानती हूं, वासु। मैं यह भी जानती हूं कि तुम जो सोचते हो कि उसने जो



विज्ञापन विज्ञान - व्यंग्य ‬

यह विज्ञापनों का देश था।कुछ विज्ञापन देकर कमाते थे, कुछ लेकर।गली, मोहल्ले, बाजार, स्कूल, पेड़, पौधे, सार्वजनिक सुविधा घर यहां तक कि दूसरों की फेसबुक दीवार और रोटी पर तक लोग विज्ञापन लगाने से नहीं चूकते थे। जो लोग विज्ञापन नहीं लगवाना चाहते थे वे भी अपनी दीवारों पर विज्ञापन देकर लिखते थे कि यहां विज्ञ



विकास की दौड़ की कीमत चुकाता पर्यावरण

        एक आकलन के अनुसार, यदि विश्व का प्रत्येक व्यक्ति एक औसत अमेरिकीजितना संसाधन उपभोग करे तो हमारी पृथ्वी जैसे तीन और ग्रहों की ज़रुरत पड़ेगीअर्थात कुल चार ग्रह. ब्रिटेन के टीवी चैनल आईटीवी पर स्टीफन हॉकिन्स ने आगाह कियाकि जलवायु परिवर्तन करीब सात करोड़ साल पहले के क्षुद्र ग्रहों के उस टकराव से भीज



सोशल मीडिया से समाज में उथल- पुथल

कोई कुछ भी कहे मगर सोशल मीडिया ने समाज में उथल पुथल मचा रखी है , विश्वास नहीं होता तो इनसे पूछिए .... १) पत्रकार और मीडिया - ख़बरों के बाजार में इनकी अकेली दुकान  थी  जिसमे झूठ मनमर्जी कीमत पर भी बिक जाता था ! अब ये दुकान  बंद होने के कगार  पर है !२)लेखक और लेखन - विशेष कर हिन्दी में अब तक लेखन के ना



सामान्य ज्ञान

संसदीय समितियांसंसद के कार्यों में विविधता तो है, साथ ही उसके पास काम की अधिकता भी रहती है। चूंकि उसके पास समय बहुत सीमित होता है, इस‍लिए उसके समक्ष प्रस्‍तुत सभी विधायी या अन्‍य मामलों पर गहन विचार नहीं हो सकता है। अत: इसका बहुत-सा कार्य समितियों द्वारा किया जाता है।संसद के दोनों सदनों की समितियों



प्रकृति, पर्यावरण और हम ८: इस्राएल का जल- संवर्धन

इस्राएल! एक छोटासा लेकिन बहुत विशिष्ट देश! दुनिया के सबसे खास देशों में से एक! इस्राएल के जल संवर्धन की चर्चा करने के पहले इस्राएल देश को समझना होगा| पूरी दुनिया में फैले यहुदियों का यह देश है| एक जमाने में अमरिका से ले कर युरोप- एशिया तक यहुदी फैले थे और स्थानिय लोग उन्हे अक्सर 'बिना देश का समाज' क



पर्यावरण संरक्षण सर्वोत्तम मानवीय संवेदना

पर्यावरण संरक्षण सर्वोत्तम मानवीय संवेदना सुशील शर्मा मनुष्य और पर्यावरण का परस्पर गहरा संबंध है।अग्नि , जल, पृथ्वी , वायु और आकाश यही किसी न किसी रूप में जीवन का निर्माण करते हैं, उसे पोषण देते हैं। इन सभी तत्वों का सम्मिलित , स्वरूप ही पर्यावरण है। पर्यावरण संरक्षण पाँच स्तरों पर सम्भव होगा-1- मान



पर्यावरण प्रेमी समाज

विश्व का एक मात्र उदारण जो पेड़ों के लिये अपनी कीमती जान देना वह् 363 अमर शहीद विशनोई जो अमृता देवी की अगवाई में हुआ जोधपुर नरेश ने किले की चिनाई के लिए चुना पकाने के लिए लकड़ी लाने का आदेश् दिया उनके सैनिक लकड़ी लेने के लिए निकले तो खेजड़ली गांव में बहुत खेजड़ी के पेड़ देखे तो उसे काटने लगे यह देख विशनोई



विश्व पर्यावरण दिवस

                               दिन पर दिन बढती जा रही  हमारी वैज्ञानिक प्रगति और नए संसाधनों से हम सुख तो उठा रहे हैं लेकिन अपने लिए पर्यावरण में विष भी घोल रहे हैं . हाँ हम ही घोल रहे हैं . प्रकृति के कहर से बचने के लिए हम अब कूलर को छोड़ कर किसी तरह से ए सी खरीद कर ठंडक का सुख उठाने लगे हैं लेकिन उ



ज्ञान बुद्धि का बल हैं!

    ज्ञान जितना पा लो कम है। प्रतिदिन अनेक किताब प्रकाशित होती हैं, सभी तो कोई पढ़ नहीं सकता। ज्ञान से बुद्धि बल बढ़ता है। बुद्धि का बल सबसे बड़ा है। ज्ञान से बुद्धि बल बढ़ता है और बुद्धि में विवेक जागता है। विवेक सम्‍मत बुद्धि से हम सभी सम्‍ास्‍याओं एवं शंकाओं का समाधान कर पाते हैं। इसलिए ज्ञान की म



नेलपॉलिश लगाने से हो सकती हैं ये भयंकर बीमारियां

खूबसूरत दिखना किसको पसंद नहीं होता | और खासकर लड़कियां तो खूबसूरत दिखने में कोई कसर नहीं छोड़ती फिर चाहे बात उनके बालों की हो या नाखूनों की | वो अपनी सजावट का पूरा ध्यान रखती हैं | महिलाएं खूबसूरत दिखने के तरह तरह के नुस्खें अपनाती है जैसे लिपस्टिक लगाना,  काजल लगाना, क्रीम लगाना , नेलपॉलिश यूज़ करना औ



आज का ज्ञान

मोह सबसे बुरा रोग है। ये हमें कई बार उन चीजों से भी अलग नहीं होने देता जो भविष्य में हमारे लिए ही विनाशकारी हो सकती हैं। - वेद व्यास



वैज्ञानिकों ने दी हिमालयी ग्लेशियरों को लेकर एक खुशखबरी

ग्लोबल वार्मिग को चलते हिमांचल प्रदेश और उत्तराखंड़ के ग्लेशियरों पर पिघलनें का खतरा बढ़ता जा रहा है, लेकिन इसी बीच कश्मीर के ग्लेशियरों को लेकर एक खुश खबरी आई है। यहां पिछले कई समय से ग्लेशियरों का आकार बढा है। भारत, पाकिस्तान, चीन और अफगानिस्तान तक फैली काराकोरम पर्वत श्रृंखला के करीब 10 ग्लेशियर



वेदों में विज्ञान ...

हिंदु वेदों को मान्यता देते हैं और वेदों में विज्ञान बताया गया है । केवल सौ वर्षों में पृथ्वीको नष्टप्राय बनाने के मार्ग पर लानेवाले आधुनिक विज्ञान की अपेक्षा, अत्यंत प्रगतिशील एवं एक भी समाज विघातक शोध न करने वाला प्राचीन ‘हिंदु विज्ञान’ था ।पूर्वकाल के शोधकर्ता हिंदु ऋषियों की बुद्धि की विशालता दे



खली-पीली बेकार ख्याली बातों से

खाली-पीली बेकार ख्याली बातों से, दिन अपने न बदलो काली रातों से । यारा तेरे ज़ख्म एक दिन भर जाएंगे, अच्छे मरहम भी मिलते  हालातों से।  उठो तुम्हें लड़ना होगा तूफानो से, न घबराना मौसम की बरसातों से।  जब तक सूरत नहीं बदलती देखेंगे ,जंग रहेगी तख्त-ताज गलियारों से। तरकश में हैं तीर अभी उम्मींदों के,  सूरज न



OMG! इस स्वदेशी वैज्ञानिक ने गाय के गौबर से बना डाला वातानुकूलीत मकान

हरियाणा (रोहतक) : वर्तमान में बन रहे मकान गर्मी में तपते हैं तो सर्दी में सिकुड़ने को मजबूर कर देते हैं। इसके पीछे कारण है कि मकान निर्माण में प्रयोग होने वाला लोहा, सीमेंट और पक्की ईंट ऊष्मा को अंदर आने से नहीं रोक पाते। इस समस्या से निजात पाने के लिए डॉ. शिव दर्शन मलिक ने गाय के गोबर एवं जिप्सम को



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