चमत्कारिक महामृत्युंजय मन्त्र

    जब कोई व्यक्ति मृत्यु शय्या पर पड़ा होता है, किसी असाध्य रोग से पीड़ित होता है, ऊपरी प्रभाव या हवाओं से निरन्तर रोगग्रस्त रहता है या अचानक दुर्घटना के कारण मृत्यु की घड़ियां गिन रहा होता है तो कहते हैं कि महामृत्युंजय मन्त्र का पाठ करा लो। इससे मृत्यु भी टल जाती है।    मन्त्र के लिए कह सकते हैं



शब्‍द सामर्थ्‍य बढ़ाईए - 13

1. तिय     क-छाया  ख-अंधकार  ग-स्त्री    2. तिरिया क-पार होना ख-औरत ग-पत्ते  3. तिरोधान क-अंतर्धान ख-आड़   ग-अपमान   4. तीमार       क-अंधेरा  ख-परछाईं   ग-सेवा  उत्तर 1. ग   2. ख 3. क 4. ग



विज्ञान और धर्म

विज्ञान और धर्म की ऐसी एक पहचान होविज्ञान ही धर्म हो और धर्म ही विज्ञान हो|आतंक हिंसा भेदभाव मिटें इस संसार सेएक नया युग बने रहे जहाँ सब प्यार से||विज्ञान जो है सिमट गया उसकी नयी पहचान होमेरा तो कहना है, कि हर आदमी इंशान हो||हर आदमी पढ़े बढ़े नये-2 अनुसंधान होउन्नति के रास्ते चले, पर सावधान हो||प्या



वैवाहिक विलम्ब दूर करने का अनुभूत प्रयोग

    यदि आपके विवाह में विलम्ब हो रहा है और बिना बात की बाधांए आ रही है, काम बनते बनते बिगड़ रहा है! प्रयास कर-कर के थक गए हैं तो इस बाधा व विलम्ब को दूर करने के लिए एक अनुभूत प्रयोग बता रहे हैं। इस प्रयोग से विवाह की बाधाएं दूर होती हैं, विवाह होने का मार्ग प्रशस्त होता है और अच्छे व सम्पन्न परिवारों



व्यवहार की कुशलता के गुप्त रहस्य

गुप्त रहस्य छिपाये रखिएन दूसरों से इतने खुल जाइये कि दूसरों को आपमें कुछ आकर्षण ही नहीं रहे, न इतने दूर ही रहिये कि लोग आपको मिथ्या अभिमानी या घमंडी समझें। मध्य मार्ग उचित है। दूसरों के यहाँ जाइये, मिलिए किन्तु अपनी गुप्त बातें अपने तक ही सीमित रखिए। “आपके पास बहुत सी उपयोगी मंत्रणायें, गुप्त भेद, ज



शब्‍द सामर्थ्‍य बढ़ाईए - 12

1. तीय    क-गीला ख-तीखा ग-औरत   2. तुंगिमा क-मुख ख-ऊंचाई ग-नाभि 3. तुमुल क-कोलाहल, हलचल ख-हल्का  ग-दुर्बल  4. तुर्त-फुर्त      क-घुड़सवार ख-घोड़ी  ग-झटपट, तुरन्त उत्तर 1. ग   2. ख 3. क 4. ग



गीता ज्ञान

ब्रह्म ,ब्रह्मा और ब्राह्मण का अर्थ कितने प्रतिशत लोग जानते है . मेरे अनुमान से शायद करोड़ो में एक इसका सच्चा अर्थ जाननेवाला है . अपने आप को हिन्दू कहने वाले क्या हिन्दू का अर्थ या हिन्दू की परिभाषा जानते है .विश्व में कोई भी हिन्दू धर्म नहीं है . हिन्दू धर्म अपने आप में कुछ भी नहीं है . भारत वर्ष मे



शब्द सामर्थ्‍य बढ़ाईए - 11

1. झुठकाना   क-झूठ बोलना ख-गोबरग-भ्रम में डालना  2.झौर क-गन्‍दगी  ख-समूह ग-झटका 3. टल्‍लेबाजी  क-बहानेबाजी   ख-कीड़ा ग-झूमना 4. टसुआ     क-टेसू के फूल ख-भारी वस्तु  ग-आंसू  उत्तर 1. ग   2. ख 3. क 4. ग



सूर्य की उत्पत्ति

    आप को बता दें कि सृष्टि के प्रारम्भ में ब्रह्मा जी के मुख से ॐ शब्द प्रकट हुआ था वही सूर्य का प्रारम्भिक सूक्ष्म स्वरूप था। तदोपरान्त भूः, भुव तथा स्व शब्द उत्पन्न हुए। ये तीनों शब्द पिंड रूप में ॐ में विलीन हए तो सूर्य को स्थूल रूप मिला। सृष्टि के प्रारम्भ में उत्पन्न होने से इसका नाम आदित्य पड



नख भी बोलते हैं!

    अंगुलियों में जड़े नाखुन भी कुछ कहते हैं, यह कभी नहीं सोचा होगा आपने। आज नाखुनों की चर्चा करते हैं। मानव की ऊर्जा हमेशा खर्च होती रहती है, ऐसी स्थिति में उसे आहार की आवश्यकता होती है।     आयुर्वेद के अनुसार व्यक्ति के भोजन से रस बनता है रस से मांस, मांस से मेदा, मेदा से मज्जा, मज्जा से शुक्र बनत



सम्मान

आज का सुवचन 



सुपरिणाम

आज का सुवचन 



वृहस्पति पर 'नासा': वैज्ञानिकों की असीम उड़ान - Jupiter Mission NASA, Hindi Article, Space Science, Mithilesh

... यह बात भी उतनी ही सच है कि अमेरिकी वैज्ञानिकों ने मानव-सभ्यता के विकास में अपना महत्वपूर्ण योगदान भी उतनी ही शिद्दत से दिया है. इस बार उनकी उपलब्धि तो बेहद खास है, जो हमें ब्रह्माण्ड के रहस्यों के और भी नजदीक ले जा सकता है. लगभग पांच साल की अथक मेहनत और 1.1 अरब डॉलर की भारी-भरकम राशि खर्च करने क



हंसी और स्वस्थ्य

यह अच्छी तरह अनुभव कर लिया गया है कि खिलखिलाकर हँसने से अच्छी भूख लगती है, पाचनशक्ति बढ़ती है और रक्त का संचार ठीक गति से होता है ।। क्षय जैसे भयंकर रोगों में हँसना अमृत- तुल्य गुणकारी सिद्ध हुआ है ।। खिल- खिलाकर हँसने से मुँह, गरदन, छाती और उदर के बहुत उपयोगी स्नायुओं को आवश्यकीय कसरत करनी पड़ती है,



इन्सान ही प्रश्न और इन्सान ही उत्तर

उत्तराखण्ड में हो रही‌ तबाही २०१३ के प्रलय की याद दिला रही है| एक तरह से वही विपदा फिर आयी है| देखा जाए तो इसमें अप्रत्याशित कुछ भी नही है| जो हो रहा है, वह बिल्कुल साधारण नही है, लेकिन पीछले छह- सात सालों में निरंतर होता जा रहा है| हर बरसात के सीजन में लैंड स्लाईडस, बादल फटना, नदियों को बाढ और जान-



ज्ञान विज्ञान प्रतियोगिता

ज्ञान विज्ञान प्रतियोगिता                             मित्रों 'सफलता सूत्र' आपके लिए लेकर आया है, हिन्दी की पहली 'ज्ञान विज्ञान प्रतियोगिता'। यहां आप पाएंगे ज्ञान और उपहार का खजाना। यह प्रतियोगिता प्रारंभ करने का मुख्य उद्देश्य राष्ट्रभाषा हिन्दी का सम्मान व आप सभी का ज्ञान अभिवर्धन करना है। यह प्रत



विज्ञान ईश्वर के अस्तित्व से इन्कार नहीं कर सकता

संसार की प्रत्येक वस्तु का कोई न कोई निर्माता होता है तभी वह बनती है। इतने बड़े विश्व का भी कोई न कोई निर्माता होना चाहिए। सृष्टि की विभिन्न वस्तुओं में से प्रत्येक में अपने-अपने नियम क्रम पाये जाते हैं। उन्हीं के आधार पर उनकी गतिविधियां संचालित होती हैं। यह नियम न होते तो सर्वत्र अस्त-व्यस्तता और अ



प्रकृति, पर्यावरण और हम: कुछ कड़वे प्रश्न और कुछ कड़वे उत्तर

पर्यावरण के सम्बन्ध में चर्चा करते हुए हमने कई पहलू देखे| वन, पानी और अन्य प्राकृतिक संसाधनों के संवर्धन के कई प्रयासों पर संक्षेप में चर्चा भी की| कई व्यक्ति, गाँव तथा संस्थान इस दिशा में अच्छा कार्य कर रहे हैं| लेकिन जब हम इस सारे विषय को इकठ्ठा देखते हैं, तो हमारे सामने कई अप्रिय प्रश्न उपस्थित ह



आश्चर्य की बात

अहन्यहनि भूतानि गच्छन्तहि यमालयम ।शेषा:स्थावरमिच्छ्न्ति,किमाश्चर्यमत:परम् ।।- हम देख रहे हैं कि प्रतिदिन प्राणी मृत्यु के मुख में समा रहे है जो उत्पन्न हुए हैं वे मर रहे हैं फिर भी जो शेष हैं ।वे सोचते हैं कि हम सदा जीवित रहेंगे,इससे बढ़कर और क्या आश्चर्य की बात हो सकती है।



ज्ञान

कोई काम शुरू करने से पहले, स्वयं से तीन प्रश्न कीजिये – मैं ये क्यों कर रहा हूँ, इसके परिणाम क्या हो सकते हैं और क्या मैं सफल होऊंगा. और जब गहराई से सोचने पर इन प्रश्नों के संतोषजनक उत्तर मिल जायें, तभी आगे बढिए.



आसान हिन्दी  [?]
तीव्र हिंदी  [?]
ऑनस्क्रीन कीबोर्ड  [?]
हिन्दी टाइपिंग  [?]
डिफ़ॉल्ट कीबोर्ड  [?]

(फोन के लिए विकल्प)
X
1 2 3 र्4 ज्ञ5 त्र6 क्ष7 श्र8 (9 )0 --   =
q w e r t y u i o p [   ]
a s d िfि g h  j k l ; '  \
  z x c  v  b n m ,, .. ?/ एंटर
शिफ्ट                                                         शिफ्ट बैकस्पेस
x