06 अगस्त 2015

मानव जीवन का लक्ष्य क्या है?

मनुष्य जीवन का अधिकांश भाग आहार, निद्रा, भय और भोग में व्यतीत हो जाता है। शारीरिक आवश्यकताओं की पूर्ति में समय और शक्तियों का अधिकांश भाग लग जाता है। विचार करना चाहिए कि क्या इतने छोटे कार्यक्रम में लगे रहना ही मानव जीवन का लक्ष्य है? यह सब तो पशु भी करते हैं। यदि मनुष्य इसी मर्यादा के अंतर्ग



भुट्टा, पॉप-कॉर्न और गणित, विज्ञान

दिल्ली के बाराखंबा पर अख़बार के एक दफ्तर में शाम को बैठने जाता हूँ. मेट्रो के गेट न. 5 से निकलने पर वहां बाहर एक भुट्टे वाला, भुट्टे उबालकर बेचता है. हालाँकि, भुट्टे तो बचपन से खाता रहा हूँ, लेकिन सच कहूँ तो उबले भुट्टे मैंने पहले नहीं खाए थे. एक दिन टेस्ट किया तो बेहद स्वादिष्ट लगा, नींबू और काला नम



सम्मोहन विद्या के 10 रहस्य, जानिए

सम्मोहन को अंग्रेजी में हिप्नोटिज्म कहते हैं। इस प्राचीन विद्या का एक ओर जहां दुरुपयोग हुआ और हो रहा है, वहीं इस विद्या के माध्यम से लोगों का भला ‍भी किया जा रहा है। भला करने वालों का अपना स्वार्थ भी उसमें शामिल है। सम्मोहन के बारे में हर कोई जानना चाहता है, लेकिन सही जानकारी के अभाव में वह इसे समझ



योग और ध्यान

दस साल तक बिल्कुल मासूमफिर भी पहले वर्ष से ही बस्ते में गुमबीस साल तक पढ़ाई,बाद बीस के पढ़ाई को पूर्णविरामऔर सुरक्षित भविष्य को जद्दोजहद 25 वर्ष तक शादी की आसकालसैंटरों ने किया लेकिन बहुत बुरा हालतीस वर्ष तक जब-तब काम की तलाशइंजीनियरिंग के बाद भी अर्धबेकारऑनरोड़ कनौपी लगाने की थमें न तलाशचालीस वर्ष



नेपाल में भूकंप आया तो किसी के लिए बिप्पत लाया तो किसी के लिए धन का बरसा हुवा I

दोस्तों आज भूकंप के बाद नेपाल का परिस्थिति को देखने पर मुझे दो चीजो का ख्याल आता है ई पहला तो ये की यहाँ के जो पहाड़ी मूल के नेता लोग है वो लोग अपने आप को बहुत बड़े भाग्यशाली समझते है, क्युकी इनको जिन काम के लिए यहाँ पे भेजा गया था संबिधान बनाने के लिए वह काम तो अब भूल गया या इनकी नियत उलट गयी I अब तो



अंतरिक्ष में आत्मनिर्भर भारत

टी.वी, रेडियो, दूरसंचार, मौसम की भविष्यवाणी करने, अंतरराष्ट्रीय टेलीफोन संवादों, सुरक्षा उपायों, जासूसी करने, दूरस्थ ग्रह-नक्षत्रों का अध्ययन करने के लिए कृत्रिम अपग्रह अंतरिक्ष में भेजे जाते हैं। संसार का पहला उपग्रह स्पुतनिक-1 था। इसे 4 अक्तूबर, 1957 को सोवियत संघ से अंतरिक्ष में छोड़ा गया था। आज



संतुलित पर्यावरण

पर्यावरण यानी वातावरण । पृथ्वी और इसके कक्ष में आने वाली हवा, पानी, समुद्र, पहाड़ियां, पेड़ों से भरे जंगल, मिट्टी, झील, झरने जानवर, सौरमंडल इत्यादि पर्यावरण के विभिन्न अंग हैं। पर्यावरण में संतुलन होना चाहिए। इसे सदा साफ और स्वच्छ रखना सभी का कर्तव्य है। पशु-पक्षी और हम सब के जीने के लिए ऑकसीजन बहुत



06 मई 2015

अपने दिल की सुनें ,आप सब कुछ कर सकते हैं

दो छोटे लड़के घर से कुछ दूर खेल रहे थे। खेलने में वे इतने मस्त थे कि उन्हें पता ही नहीं चला कि वे भागते-भागते कब एक सुनसान जगह पहुँच गए। उस जगह एक पुराना कुंवा था , और उनमे से एक लड़का गलती से उस कुवें में जा गिरा। “बचाओ-बचाओ”, वो चीखने लगा। दूसरा लड़का एकदम से डर गया और मदद के लिए चिल्लाने लगा , पर उस



क्यों धरती काँप उठी

इतना मजमा जमा कर लिया हैइतना मलबा लाद दिया है कि जमीन का सीना काँप उठा है। साथ-साथ चलने की,सारी नसीहतें गुमशुदा है,करीब इतने है पर जुदा जुदा है। हर दूसरा हर पहले की ,टांग खीच लेता है,इस फिसलन से ,जमीन पर पड़ गयी है दरारें बोलो! इन्हे कैसे बटोरे ? कैसे संवारें?घर रहे ही कहाँ जो गिर गए,लोग रहे ही कहाँ



क्या आप जानते हैं ...हिन्दी भाषा

-हिन्दी भाषा 'इंडो यूरोपियन' परिवार से संबंध रखती है। - इस भाषा के उद्गम का महाद्वीप 'एशिया' व देश 'भारत' है। - भारत देश में हिन्दी भाषा को अधिकृत रुप से उपयोग किया जाता है। - 366,000,000 लोगों के लिए यह भाषा 'मातृभाषा' है वहीं इस भाषा को कुल 487,000,000 लोग उपयोग करते हैं। - हिन्दी की वर्णमाला में



23 अप्रैल 2015

अपने देश में इतने अनैतिक और यौन अपराध क्यों हो रहे है?

 प्लीज पोस्ट को जरूर पढ़ीयेगा चाहे लाईक करे ya ना करे-: ............................................................................ अपने देश में इतने अनैतिक और यौन अपराध क्यों हो रहे है?? ....जब किसी व्यक्ति से पूछा जाता है कि अपने बच्चे को क्या बनाओगे?? तो जवाब मिलता है-ः डॉक्टर,इंजिनियर,मैनेजर,पुल



जन संपर्क एक महत्वपूर्ण जिम्मेंदारी

सार्वजनिक, गैरसरकारी, कॉर्पोरेट व निजी क्षेत्र की स्थापनाओं को अपने कार्य को सफल बनाने के लिए अनेक योजनाएं तैयार करनी होती हैं। अनेक उत्पादन/सेवा क्षेत्र की उपयोगिता सिद्ध करने के लिए आवश्यक, यहां तक कि आवश्यक प्रचार-प्रसार भी किया जाता है जिससे अधिक से अधिक जनो का ध्यान आकर्षित करने में सफलता मिले



इतने बदसूरत है फिर भी दर्पण देख रहे है

एक बार सुकारात सुबह के समय दर्पण देख रहे थे ऐसा वह लगभग रोज करते थे  ऐसा देखकर उनका एक शिश्य पीछे से मुसकरा रहा था कि सुकारात इतने बदसूरत है फिर भी दर्पण देख रहे है  सुकारात ने उसे मुसकराते देखा तो पूँछा क्या बात है  उसने कहा कुछ नही  तब सुकारात ने कहा मै दर्पण इस लिए देखता हूँ  कि और कितने अच्छे का



12 अप्रैल 2015

किसी के दिल में घर बनाना बहुत मुशकिल

 इस दुनिया मैँ दोलत कमाना बहुत आसान है लेकिन किसी के दिल में घर बनाना बहुत मुशकिल है मुझे जाय्दा तर्जुवा तो नही जिदगी का किन्तु अपनी उम्र के इन 19 वषों इतना तो समझ आया कि जितनी मोहब्बत अपनी मोहब्बत से की उसकी अगर आधी भी मोहब्बत मैँ अपने माँ बाप से करता तो शायद मुझे जन्नत नसीन होती पर अब शायद उन लावा



भारत की छुपी प्रतिभाएं

भारत एक विशाल देश है और हर एक क्षेत्र में इसने बहुत ही उन्नति करली है। हर क्षेत्र में उन्नति करने के बावजूद कुछ प्रतिभाएं अभी भी छुपी हुई हैं जो अभी तक अपना उपयुक्त स्थान पाने के लिए प्रयत्नशील हैं। उन्हीं में से कुछ प्रतिभाओं का वर्णन मैं नीचे कर रहा हूं।गत वर्ष घर के बाहर चौराहे में मैने मदारी को



परिवर्तन लहरें और उनके प्रभाव

प्रकृति के नियम अनुसार पुरातन काल से ही परिवर्तन की लहरें चल रही हैं। समाज एवं प्रकृति में परिवर्तन एक शास्वत प्रक्रिया है। दुनिया में शायद ही कोई ऐसा समाज होगा जो इस परिवर्तन से अछूता होगा। जहां तक भारत का प्रश्न है, यह सर्विदित है कि उसके राजनीतिक इतिहास के आरंभ से बहुत पहले ही सामाजिक इतिहास का आ



गाय

भारत के इतिहास में गाय का बहुत ही महत्वपूर्ण स्थान है। अलग-अलग कालों में इसने अलग-अलग भूमिका निभाई है। सामान्यत: मानव जाति के उदयकाल तथा श्री कृष्ण जी के अवतार काल से विशेषत: गाय को भारत में बहुत श्रद्धा से पूजा जाता रहा है। भागवत में भगवान श्री कृष्ण ने कहा है कि समुद्र-मंथन के समय क्षीरसागर से पां



बलात्कार एक बङी समस्या

 ! एक लङकी थी रात को आँफिस से वापस लोट रही थी तो देर भी हो गई थी पहली बार ऐसा हुआ ओर काम भी ज्यादा था तो टाइम का पता ही नही चला वो सीधे बस स्टेशन पहुँची वहाँ एक लङका खङा था वो लङकी उसे देखकर डर गई की कही उल्टा सीधा ना हो जाए तभी वो लङका पास आया ओर कहा बहन तू मौका नही जिम्मेदारी हे मेरी ओर जब तक तुझ



20 मार्च 2015

कलाकार की स्वतंत्रता

ये सच है कि कलाकार स्वतंत्रता की ज़मीन परही काम करता है उसके विचारों कि स्वतंत्रता ही उसकी वोजादुई तूलिका होती है जिसके माध्यम से वो अनेकानेक रचनाओं में रंग भरता है. कलाकार स्वतंत्र नहीं होगा तोकिसी भी नयी रचना की सम्भावना भी नहीं रहेगी. विचारों कि जितनी स्वतंत्रता होती है, कल्पना कि उड़ान भी उतनी ही



16 मार्च 2015

सफलता के 20 मँत्र

सफलता के 20 मँत्र " 1.खुद की कमाई से कम खर्च हो ऐसी जिन्दगी बनाओ..! 2. दिन मेँ कम से कम 3 लोगो की प्रशंसा करो..!  खुद की भुल स्वीकारने मेँ कभी भी संकोच मत करो..! 4. किसी के सपनो पर हँसो मत..! 5. आपके पीछे खडे व्यक्ति को भी कभी कभी आगे जाने का मौका दो..! 6. रोज हो सके तो सुरज को उगता हुए देखे..! 7. ख



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